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Siwan News: सिवान नगर परिषद में जमीन खरीद का बड़ा मामला, तत्कालीन EO राजकिशोर लाल पर 4 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के आरोप प्रमाणित

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सिवान नगर परिषद के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राजकिशोर लाल के खिलाफ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भूमि खरीद में वित्तीय अनियमितता के छह आरोप जांच में प्रमाणित हुए। सरकार ने तीन वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया।

समस्तीपुर, 02 सितंबर। सिवान नगर परिषद में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जमीन खरीद से जुड़े पुराने मामले में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राजकिशोर लाल के खिलाफ लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोप जांच में प्रमाणित हुए हैं। विभागीय जांच में कुल छह आरोपों को सही पाया गया है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद सरकार ने राजकिशोर लाल पर संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि रोकने का दंड लगाया है।

राजकिशोर लाल वर्तमान में ऊर्जा विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत बताए गए हैं। मामला उस समय का है, जब वह सिवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर तैनात थे।

जमीन खरीद में सामने आई वित्तीय अनियमितता

मामला ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भूमि खरीद से संबंधित है। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, इस खरीद प्रक्रिया में करीब 4 करोड़ 3 हजार 785 रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए थे।

नगर विकास विभाग ने इस मामले में 4 अगस्त 2022 को राजकिशोर लाल के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बाद में विभागीय स्तर पर अनुशासनिक कार्रवाई चलाने का निर्णय लिया गया।

10 किलोमीटर की सीमा से बाहर खरीदी गई जमीन

जांच में एक महत्वपूर्ण आरोप जमीन की स्थिति से संबंधित था। जांच पदाधिकारी के निष्कर्ष के अनुसार, सिवान नगर परिषद द्वारा खरीदी गई जमीन नगर क्षेत्र की निर्धारित 10 किलोमीटर की सीमा से बाहर थी।

नगर विकास विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जमीन नगर क्षेत्र से निर्धारित दूरी के भीतर खरीदने की बात कही गई थी। जांच में इस शर्त के अनुपालन में कमी पाई गई।

किसानों के बजाय दूसरे खाते में पहुंची रकम

जांच में जमीन की कीमत के भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। विभागीय निर्देश के अनुसार जमीन खरीद की राशि आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित किसानों के खाते में भेजी जानी थी।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, भुगतान किसानों के खातों में करने के बजाय यूनिक डेवलपर्स नामक संस्था के खाते में किया गया। इस बिंदु को भी जांच में आरोप के प्रमाणित होने के आधारों में शामिल किया गया।

सुबोध कुमार निराला के खाते में भेजे गए 1.79 करोड़ रुपये

जांच रिपोर्ट में एक अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार सुबोध कुमार निराला के बैंक खाते में 1 करोड़ 79 लाख 23 हजार रुपये भेजे गए।

जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित व्यक्ति की खरीदी गई जमीन में न तो स्वयं और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य की जमीन थी। इसके बावजूद उनके बैंक खाते में इतनी बड़ी राशि का हस्तांतरण हुआ।

यही नहीं, जांच के अनुसार भूमि खरीद के बाद सुबोध कुमार निराला के खाते से कई अन्य लोगों के खातों में भी रकम भेजी गई। इनमें नगर परिषद के कुछ कर्मियों और नगर पार्षदों के करीबी बताए जाने वाले लोगों के नाम सामने आने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।

छह आरोप जांच में प्रमाणित

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने 21 मई 2025 को अनुशासनिक कार्रवाई संचालित करने का निर्णय लिया था। इसके बाद मुख्य जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा की गई विभागीय जांच में कुल छह आरोप प्रमाणित बताए गए। जांच में जमीन खरीद की प्रक्रिया, जमीन की निर्धारित दूरी, भुगतान के तरीके और विभिन्न बैंक खातों में राशि के हस्तांतरण से जुड़े बिंदुओं की जांच की गई।

सरकार ने लगाया तीन वेतनवृद्धि रोकने का दंड

विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद सरकार ने राजकिशोर लाल के खिलाफ कार्रवाई की। उनके खिलाफ संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का दंड निर्धारित किया गया है।

संचयात्मक प्रभाव वाली वेतनवृद्धि रोक का मतलब यह है कि इसका प्रभाव भविष्य की वेतन वृद्धि पर भी पड़ सकता है। यह कार्रवाई विभागीय जांच में आरोपों के प्रमाणित पाए जाने के बाद की गई है।

अब ऊर्जा विभाग में उप सचिव हैं राजकिशोर लाल

राजकिशोर लाल फिलहाल ऊर्जा विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थापित हैं। सिवान नगर परिषद में उनके कार्यकाल से जुड़ा यह मामला अब विभागीय जांच और दंड की कार्रवाई तक पहुंच चुका है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल सरकारी धन के भुगतान की प्रक्रिया और जमीन खरीद के लिए निर्धारित नियमों के पालन को लेकर सामने आया। जांच रिपोर्ट में जिन छह आरोपों को प्रमाणित बताया गया, उनके आधार पर सरकार ने अनुशासनिक दंड निर्धारित किया है।

मामले के प्रमुख बिंदु

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जमीन खरीद से जुड़ा मामला

करीब 4 करोड़ 3 हजार 785 रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप

जांच में छह आरोप प्रमाणित

खरीदी गई जमीन निर्धारित 10 किलोमीटर की सीमा से बाहर पाई गई

किसानों के बजाय दूसरे खातों में भुगतान किए जाने का आरोप

सुबोध कुमार निराला के खाते में 1 करोड़ 79 लाख 23 हजार रुपये भेजे जाने का उल्लेख

सरकार ने तीन वेतनवृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड दिया

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हमारी बात

सरकारी धन से जमीन खरीद जैसी प्रक्रिया में नियमों का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। सिवान नगर परिषद से जुड़े इस मामले में विभागीय जांच ने जमीन की निर्धारित दूरी और भुगतान की प्रक्रिया समेत कई बिंदुओं पर गंभीर सवालों को प्रमाणित माना है।

खास तौर पर किसी ऐसी जमीन के लिए भुगतान, जिसमें संबंधित व्यक्ति की जमीन नहीं होने के बावजूद उसके बैंक खाते में बड़ी राशि पहुंचने की बात जांच में सामने आई, पूरे भुगतान तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। हालांकि इस मामले में जांच के निष्कर्ष और सरकार द्वारा दिया गया दंड ही प्रकाशित तथ्य का आधार हैं; इससे आगे किसी व्यक्ति या संस्था पर अतिरिक्त आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

सरकार की ओर से तीन वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई यह संकेत देती है कि विभागीय स्तर पर नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया गया। लेकिन भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए नगर निकायों में जमीन खरीद, भुगतान और बैंक खातों में सरकारी राशि के हस्तांतरण की निगरानी और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जितनी अधिक होगी, उतना ही आम लोगों का स्थानीय निकायों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।

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