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Patna Crime: 2017 NEET-UG फर्जीवाड़े में संजीव मुखिया से EOU की पूछताछ, पेपर लीक मामलों को लेकर मिले अहम सुराग

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | 2017 NEET-UG फर्जीवाड़े मामले में EOU ने संजीव मुखिया से रिमांड पर पूछताछ की। पूछताछ में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक से जुड़े इनपुट मिलने की बात सामने आई है।

पटना, 2 सितंबर। वर्ष 2017 में सामने आए NEET-UG फर्जीवाड़े के पुराने मामले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में जेल में बंद संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया उर्फ लुटन मुखिया से रिमांड के दौरान पूछताछ की। जांच एजेंसी को पूछताछ के दौरान NEET प्रकरण के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े कुछ अहम इनपुट मिलने की जानकारी सामने आई है। इन जानकारियों की फिलहाल जांच और सत्यापन किया जा रहा है।

संजीव मुखिया लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच के दायरे में रहा है। वर्ष 2017 के NEET मामले में उसके बेटे डॉ. शिव का नाम भी आरोपितों में शामिल है। EOU अब पुराने मामले के रिकॉर्ड के साथ आरोपितों से जुड़े दूसरे मामलों और संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।

परीक्षा से पहले सामने आया था बड़ा मामला

यह मामला 7 मई 2017 का है, जब NEET परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले पुलिस ने एक कथित अंतरराज्यीय शिक्षा माफिया गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की थी। पटना के पत्रकारनगर थाना में इस संबंध में प्राथमिकी संख्या 224/2017 दर्ज की गई थी।

पुलिस को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों से संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद पत्रकारनगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ठिकाने पर छापेमारी की। जांच के दौरान प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था में कथित तौर पर हस्तक्षेप की योजना सामने आने की बात कही गई थी।

प्रश्नपत्र ले जाने वाली व्यवस्था पर थी नजर

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह द्वारा परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित योजना बनाई गई थी। इसमें प्रश्नपत्र ले जाने वाली वैन के चालक से संपर्क और रास्ते में वाहन बदलने की कोशिश जैसे आरोप जांच का हिस्सा रहे।

पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में संजीव मुखिया का बेटा डॉ. शिव भी शामिल था। इसके साथ ही मेडिकल और कानून की पढ़ाई कर रहे कुछ छात्रों के नाम भी मामले में सामने आए थे।

11 आरोपितों की गिरफ्तारी तक पहुंची जांच

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहा। अब तक इस केस में 11 लोगों की गिरफ्तारी होने की जानकारी है। जांच में पुलिस ने कथित नेटवर्क, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और परीक्षा से संबंधित गतिविधियों की अलग-अलग कड़ियों को खंगाला।

पुराना मामला होने के बावजूद इसकी जांच के दौरान सामने आए नाम और आरोपितों से जुड़े अन्य मामलों ने इसे फिर से महत्वपूर्ण बना दिया है। इसी वजह से अब EOU पुराने मामले के साथ-साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है।

पिछले साल EOU के पास पहुंची जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जून 2025 में आर्थिक अपराध इकाई ने पत्रकारनगर थाना में दर्ज इस केस की जांच अपने अधीन ली थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने पुराने दस्तावेज, केस रिकॉर्ड और आरोपितों से संबंधित सूचनाओं की दोबारा समीक्षा शुरू की।

इसी क्रम में बेउर जेल में बंद संजीव मुखिया को न्यायालय की अनुमति से रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान EOU अधिकारियों ने उससे मामले और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर पूछताछ की।

BPSC और शिक्षक भर्ती मामलों से भी जुड़ा नाम

जांच एजेंसी की दिलचस्पी केवल 2017 के NEET मामले तक सीमित नहीं है। संजीव मुखिया का नाम समय-समय पर BPSC और शिक्षक भर्ती सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामलों में भी सामने आया है।

यही वजह है कि EOU पूछताछ से मिली जानकारी को दूसरे मामलों में उपलब्ध तथ्यों से मिलाकर देख रही है। अधिकारियों की ओर से मिले इनपुट को तत्काल किसी निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया गया है। पहले इन जानकारियों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जा रहा है।

सत्यापन के बाद आगे बढ़ेगी कार्रवाई

EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों का संबंध किन घटनाओं, लोगों या परीक्षा मामलों से है। यदि जांच में इनपुट की पुष्टि होती है तो संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

पुराने NEET फर्जीवाड़े की फाइल खुलने से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और नकल माफिया के नेटवर्क को लेकर भी जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। फिलहाल EOU की प्राथमिकता पूछताछ से मिले तथ्यों का सत्यापन और उनके आधार पर आगे की जांच को दिशा देना है।

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पुरानी फाइल से नए सुराग तलाश रही जांच एजेंसी

प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े पुराने मामलों की दोबारा जांच कई बार उन कड़ियों तक पहुंचने में मदद करती है, जो पहली जांच के दौरान सामने नहीं आ पातीं। 2017 का NEET मामला भी इसी वजह से महत्वपूर्ण है। यदि EOU को रिमांड पूछताछ से मिले इनपुट का दूसरे मामलों के रिकॉर्ड से मिलान करने पर ठोस समानताएं मिलती हैं, तो जांच का दायरा काफी बढ़ सकता है।

हालांकि अभी सामने आई जानकारियों को जांच एजेंसी का प्रारंभिक इनपुट ही माना जाना चाहिए। किसी व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका को अंतिम रूप से तय करने के लिए सबूतों का सत्यापन जरूरी है। EOU की मौजूदा कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि पुराने मामले की जांच को नए तथ्यों और दूसरे परीक्षा मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में सत्यापन के परिणाम से स्पष्ट होगा कि पूछताछ से मिले सुराग कितने महत्वपूर्ण साबित होते हैं।

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