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Bihar Politics: प्रशांत किशोर को विधानसभा की पर्यटन उद्योग समिति में मिली जगह, सात महीने के लिए हुए सदस्य

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर को बिहार विधानसभा की पर्यटन उद्योग संबंधी समिति का सदस्य बनाया गया है।

पटना, 3 सितंबर। Alam Ki Khabar। बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर को अब विधानसभा की एक महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी मिली है। बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार प्रशांत किशोर को पर्यटन उद्योग संबंधी समिति का सदस्य बनाया गया है। उनकी यह सदस्यता चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की शेष सात महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी।

विधानसभा की समितियां सदन के कामकाज को अलग-अलग क्षेत्रों में गहराई से देखने का काम करती हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का पर्यटन उद्योग संबंधी समिति में शामिल होना उनके विधायक के रूप में सक्रिय संसदीय दायित्व का एक नया पहलू सामने लाता है।

इस समिति के सभापति जनता दल यूनाइटेड के विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह हैं। प्रशांत किशोर के शामिल होने के बाद समिति में कुल 10 सदस्य हो गए हैं।

समिति में अब 10 सदस्य

पर्यटन उद्योग संबंधी समिति में सभापति समेत अलग-अलग दलों के विधायक शामिल हैं। समिति में मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह के अलावा सुनील कुमार पिंटू, अनिल सिंह, वीरेंद्र कुमार, संजय सिंह, वशिष्ठ सिंह, रामानंद मंडल, बबलू कुमार, गौतम कृष्ण और अब प्रशांत किशोर सदस्य हैं।

इस समिति का काम केवल पर्यटन स्थलों की स्थिति की समीक्षा तक सीमित नहीं है। पर्यटन से जुड़े उद्योग, विभागीय गतिविधियां और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयास भी इसके दायरे में आते हैं।

पर्यटन के क्षेत्र में समिति की क्या भूमिका?

बिहार ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। नालंदा, राजगीर, बोधगया, वैशाली, पावापुरी, विक्रमशिला और पटना साहिब जैसे स्थान देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

ऐसे में विधानसभा की पर्यटन उद्योग संबंधी समिति के सामने कई स्तरों पर काम करने की जिम्मेदारी रहती है। समिति पर्यटन क्षेत्र से संबंधित विभागों के कामकाज की समीक्षा कर सकती है और जरूरत के मुताबिक सुधार के सुझाव विधानसभा के सामने रख सकती है।

पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे, पर्यटक सुविधाओं, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रचार-प्रसार और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने जैसे विषय भी इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रशांत किशोर के लिए नई भूमिका

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए प्रशांत किशोर के लिए समिति की यह सदस्यता विधानसभा के भीतर उनकी नई भूमिका को मजबूत करती है। राजनीतिक गतिविधियों के साथ अब उन्हें एक ऐसे क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी काम करने का अवसर मिलेगा, जिसका सीधा संबंध बिहार की अर्थव्यवस्था और रोजगार से है।

पर्यटन उद्योग को केवल घूमने-फिरने से जोड़कर नहीं देखा जाता। किसी राज्य में पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, गाइड सेवा, छोटे कारोबार और दूसरे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

बिहार जैसे राज्य में जहां ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत की बड़ी श्रृंखला मौजूद है, वहां पर्यटन को व्यवस्थित उद्योग के रूप में विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं।

बिहार पर्यटन के सामने बड़ी संभावनाएं

बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी विरासत है। प्राचीन विश्वविद्यालय नालंदा से लेकर बौद्ध धर्म से जुड़े स्थलों और सिख धर्म के प्रमुख तीर्थ पटना साहिब तक राज्य में अलग-अलग प्रकार के पर्यटन केंद्र मौजूद हैं।

इसके बावजूद कई पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, ठहरने की व्यवस्था, स्वच्छता और पर्याप्त प्रचार की चुनौती बनी रहती है। अगर इन क्षेत्रों में लगातार सुधार किया जाए तो बिहार देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों की सूची में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

विधानसभा की संबंधित समिति ऐसे विषयों की समीक्षा करके सरकार को सुझाव देने में भूमिका निभा सकती है।

स्थानीय रोजगार से भी जुड़ा है पर्यटन

पर्यटन उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार पैदा होते हैं। किसी ऐतिहासिक या धार्मिक स्थल पर पर्यटकों की संख्या बढ़ती है तो स्थानीय दुकानदार, होटल संचालक, वाहन चालक, हस्तशिल्प कारोबारी और दूसरे छोटे व्यवसायों को इसका फायदा मिल सकता है।

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई ऐसे स्थल हैं, जिन्हें पर्यटन के नक्शे पर बेहतर तरीके से लाया जा सकता है। यदि स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाए तो इससे गांवों और छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।

समिति विधानसभा में रखेगी अपनी रिपोर्ट

पर्यटन उद्योग संबंधी समिति संबंधित विभागों और योजनाओं की समीक्षा करने के बाद अपने सुझाव और निष्कर्ष विधानसभा के समक्ष रख सकती है। समिति की रिपोर्ट के माध्यम से सरकार के सामने पर्यटन क्षेत्र की समस्याओं और सुधार की संभावनाओं को उठाया जा सकता है।

प्रशांत किशोर के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अब सरकार की पर्यटन नीतियों, विभागीय कार्यप्रणाली और राज्य में पर्यटन उद्योग के विस्तार से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण नियुक्ति

प्रशांत किशोर की राजनीति का केंद्र लंबे समय से शासन, व्यवस्था और बिहार के विकास से जुड़े मुद्दे रहे हैं। विधानसभा समिति की सदस्यता उन्हें इन्हीं विषयों को संस्थागत और संसदीय मंच पर उठाने का अवसर देती है।

हालांकि समिति में सदस्य बनना किसी राजनीतिक पद के समान नहीं है। समिति सामूहिक रूप से काम करती है और उसके सभापति के नेतृत्व में विभिन्न विषयों की समीक्षा की जाती है। इसलिए आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर पर्यटन क्षेत्र से जुड़े किन मुद्दों को समिति के सामने रखते हैं।

अब नजर समिति की आगामी गतिविधियों पर

प्रशांत किशोर की सदस्यता 2026-27 की शेष सात महीने की अवधि के लिए है। इस दौरान समिति के सामने बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दे आ सकते हैं।

पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार, नई पर्यटन परियोजनाएं, निजी निवेश, स्थानीय रोजगार, विरासत संरक्षण और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की रणनीति जैसे विषय समिति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

प्रशांत किशोर के शामिल होने से समिति की राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा भी बढ़ने की संभावना है। अब यह देखना होगा कि वह इस नई जिम्मेदारी का इस्तेमाल किस तरह करते हैं और बिहार के पर्यटन क्षेत्र को लेकर उनकी प्राथमिकताएं क्या रहती हैं।

कुल मिलाकर, बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर को विधानसभा की पर्यटन उद्योग संबंधी समिति में शामिल किया जाना उनके विधायी सफर में एक नई जिम्मेदारी है। अगले सात महीनों में समिति के कामकाज के दौरान पर्यटन और उससे जुड़े उद्योगों को लेकर उनकी सक्रियता पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

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पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से आगे बढ़कर रोजगार से जोड़ना होगा

बिहार के पास पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों की मौजूदगी से पर्यटन उद्योग मजबूत नहीं होता। पर्यटकों को बेहतर सड़क, परिवहन, होटल, साफ-सफाई, सुरक्षा और विश्वसनीय जानकारी चाहिए। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों में हिस्सेदार बनाना भी जरूरी है।

विधानसभा की पर्यटन उद्योग संबंधी समिति की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है। समिति अगर केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा तक सीमित न रहकर जमीन पर मौजूद समस्याओं को समझे तो उसके सुझाव ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।

प्रशांत किशोर के सामने भी यही चुनौती रहेगी। राजनीतिक बहस से अलग हटकर अगर वह पर्यटन स्थलों की वास्तविक स्थिति, स्थानीय कारोबारियों की समस्याओं और रोजगार की संभावनाओं को समिति के सामने मजबूती से रखते हैं तो उनकी नई भूमिका का व्यावहारिक असर दिखाई दे सकता है।

बिहार में पर्यटन का विकास केवल पटना, गया या राजगीर तक सीमित नहीं होना चाहिए। राज्य के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में मौजूद ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है।

स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। इससे बिहार की पहचान भी मजबूत होगी और युवाओं के लिए नए रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे।

अब प्रशांत किशोर की नई जिम्मेदारी में सबसे अहम सवाल यही होगा कि वह समिति के मंच पर पर्यटन को किस नजरिए से देखते हैं—सिर्फ विरासत संरक्षण के रूप में या फिर बिहार की अर्थव्यवस्था और रोजगार के बड़े अवसर के रूप में।

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