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Bihar News: बिहार में BDO संघ का आंदोलन तेज, 577 अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश के पक्ष में दी सहमति

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में ग्रामीण विकास सेवा संघ के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। 608 अधिकारियों में 577 ने सामूहिक अवकाश के पक्ष में सहमति दी है। सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया जाएगा।

बिहार में ग्रामीण विकास सेवा संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। संघ की ओर से 3 सितंबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक राज्य के 36 जिलों से अधिकारियों की राय ली गई, जिसमें बड़ी संख्या में पदाधिकारियों ने सामूहिक अवकाश के प्रस्ताव का समर्थन किया है। संघ का दावा है कि कुल 608 अधिकारियों से राय मांगी गई थी और इनमें 577 ने सामूहिक अवकाश के पक्ष में अपनी सहमति दी है।

सहमति का यह आंकड़ा बताता है कि संगठन के भीतर आंदोलन को लेकर व्यापक समर्थन है। अब संघ की रणनीति औपचारिक सूचना देने और सरकार को मांगों पर कार्रवाई का अवसर देने की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 सितंबर को ग्रामीण विकास विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और संबंधित जिलाधिकारियों को सामूहिक अवकाश से जुड़ी औपचारिक सूचना निर्धारित प्रपत्र में दी जाएगी।

संघ के अनुसार, सूचना दिए जाने के बाद सरकार और संबंधित विभाग को मांगों पर कार्रवाई के लिए 10 दिनों का समय दिया जाएगा। इस अवधि में यदि मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो आगे की रणनीति पर पुनर्विचार किया जा सकता है। वहीं, समाधान नहीं निकलने की स्थिति में बड़ी संख्या में अधिकारी सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला ले सकते हैं।

रायशुमारी में सबसे अधिक संख्या प्रखंड विकास पदाधिकारियों की रही। कुल 464 BDO से राय ली गई, जिनमें 447 ने सामूहिक अवकाश के पक्ष में सहमति जताई। इसके अलावा Director/DDO श्रेणी के 40 अधिकारियों में 35 ने समर्थन किया। RDO के 47 अधिकारियों में 40 ने सामूहिक अवकाश के पक्ष में अपनी राय दी।

इसी तरह EM श्रेणी के सभी 37 अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश के प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि APO के 20 अधिकारियों में 18 ने इसके पक्ष में सहमति जताई। इस तरह सभी श्रेणियों को मिलाकर 608 अधिकारियों में 577 अधिकारियों ने आंदोलन के इस स्वरूप का समर्थन किया है।

संघ की ओर से लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रयास किए जाने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं निकलने के कारण अब आंदोलन को निर्णायक दिशा में ले जाने की जरूरत महसूस हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। BDO स्तर पर ग्रामीण इलाकों में सरकार की कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रगति की समीक्षा और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में अधिकारी एक साथ सामूहिक अवकाश पर जाते हैं तो इसका असर प्रशासनिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।

प्रखंड स्तर पर योजनाओं की समीक्षा, लाभुकों से जुड़े मामलों की निगरानी, विकास कार्यों की प्रगति, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मैदानी स्तर पर होने वाले प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। जिला स्तर पर भी ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यों की मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग पर इसका असर पड़ने की संभावना है।

हालांकि सामूहिक अवकाश की स्थिति अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। संघ की ओर से पहले सरकार और विभाग को औपचारिक सूचना देकर अपनी मांगों पर कार्रवाई का अवसर दिया जाना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार और संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है।

577 अधिकारियों की सहमति को देखते हुए सरकार के सामने अब इस मामले को गंभीरता से संभालने की चुनौती है। एक तरफ ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ अधिकारियों की लंबित मांगों को लेकर संगठन का दबाव बढ़ता जा रहा है।

संघ ने अपने सदस्यों से एकजुट रहने और संगठन के सामूहिक निर्णय के साथ खड़े रहने की अपील की है। संगठन की रणनीति से साफ है कि वह चरणबद्ध तरीके से सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।

अब सबसे अहम भूमिका सरकार और ग्रामीण विकास विभाग की होगी। यदि निर्धारित अवधि के दौरान बातचीत और मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल होती है तो टकराव की स्थिति टाली जा सकती है। लेकिन यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण विकास सेवा के पदाधिकारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने की स्थिति बन सकती है।

ऐसी स्थिति में आम लोगों से जुड़े ग्रामीण विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका सबसे बड़ा मुद्दा होगी। योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रशासनिक निगरानी और प्रखंड स्तर की गतिविधियों की गति प्रभावित हो सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में सरकार की पहल और संघ के अगले फैसले पर पूरे बिहार की नजर रहेगी।

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