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Samastipur News: जिला कोषागार पहुंचे डीएम रोशन कुशवाहा, वित्तीय कार्यों और अभिलेखों की व्यवस्था परखी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | डीएम रोशन कुशवाहा ने जिला कोषागार का निरीक्षण कर वित्तीय कार्यों, विपत्रों, ई-भुगतान, पेंशन मामलों और अभिलेखों के संधारण की समीक्षा की।

समस्तीपुर, 05 सितंबर। जिला प्रशासन के कामकाज में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने शनिवार को जिला कोषागार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोषागार में चल रहे वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों से विभिन्न मामलों की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि सरकारी वित्तीय कार्य निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप समय पर पूरे हों। उन्होंने कोषागार में रखी जाने वाली विभिन्न पंजियों, वित्तीय अभिलेखों तथा दस्तावेजों के संधारण की स्थिति को देखा। साथ ही सरकारी विपत्रों के निष्पादन और ई-भुगतान से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की।

डीएम ने पेंशन से संबंधित मामलों पर भी जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेंशनधारियों से जुड़े मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। सरकारी प्रक्रिया के तहत प्राप्त मामलों को समयबद्ध तरीके से निष्पादित करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया, ताकि संबंधित लोगों को अपनी राशि अथवा सुविधा के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़े।

जिला कोषागार सरकारी वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। विभिन्न विभागों के वित्तीय दायित्वों, सरकारी भुगतान और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े कार्यों का संचालन यहां निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है। ऐसे में जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कर्मियों को वित्तीय नियमों के पालन के साथ-साथ कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की हिदायत दी।

निरीक्षण के दौरान कोषागार के स्ट्रांग रूम की व्यवस्था भी जांची गई। जिलाधिकारी ने महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेखों और दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि संवेदनशील रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।

डीएम ने केवल वित्तीय कामकाज तक निरीक्षण को सीमित नहीं रखा, बल्कि कार्यालय की समग्र व्यवस्था पर भी ध्यान दिया। कोषागार परिसर में साफ-सफाई, अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से रखने और कार्यस्थल को सुव्यवस्थित बनाए रखने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड के रख-रखाव में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि कोषागार से जुड़े कार्य सीधे सरकारी वित्तीय व्यवस्था से संबंधित हैं। इसलिए यहां काम करने वाले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनावश्यक देरी से वित्तीय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए सभी वित्तीय मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष तरीके से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों से अपने दायित्वों का पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने को कहा।

निरीक्षण के दौरान विपत्रों के निष्पादन की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। डीएम ने निर्देश दिया कि जो मामले नियमानुसार निष्पादन के योग्य हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए। संबंधित मामलों की जांच और प्रक्रिया पूरी करते हुए समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ई-भुगतान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों से वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। डिजिटल माध्यम से होने वाली वित्तीय प्रक्रियाओं में नियमों का पालन, रिकॉर्ड का सही संधारण और समय पर निष्पादन जरूरी है। उन्होंने संबंधित कर्मियों को इस दिशा में विशेष सतर्कता बरतने को कहा।

निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू अभिलेख प्रबंधन भी रहा। पुराने और महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखना सरकारी कार्यालयों के लिए जरूरी है। किसी भी दस्तावेज की जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से खोजा जा सके, इसके लिए रिकॉर्ड को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रखने पर जोर दिया गया।

डीएम के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को यह संदेश भी दिया गया कि सरकारी कार्यालयों में केवल काम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि काम को निर्धारित नियम, समयसीमा और जवाबदेही के साथ पूरा करना जरूरी है। खासकर कोषागार जैसे संवेदनशील वित्तीय कार्यालय में रिकॉर्ड और भुगतान से संबंधित प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि कोषागार से जुड़े कार्यों का सीधा संबंध सरकारी कर्मियों, पेंशनधारियों और अन्य लाभुकों से होता है। इसलिए किसी आवेदन या वित्तीय मामले के निपटारे में अनावश्यक विलंब से संबंधित व्यक्ति को परेशानी हो सकती है। उन्होंने ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर नियमानुसार निष्पादित करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, वरीय कोषागार पदाधिकारी रमेश कुमार बरनवाल, विशेष कार्य पदाधिकारी अली एकराम सहित संबंधित पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को कोषागार से जुड़े विभिन्न कार्यों की जानकारी दी।

जिला प्रशासन की ओर से किए गए इस निरीक्षण को सरकारी वित्तीय व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और कार्यों के समयबद्ध निष्पादन पर जोर देने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अब संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर यह जिम्मेदारी होगी कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करें।

प्रशासनिक व्यवस्था में निरीक्षण का महत्व

जिला कोषागार की व्यवस्था मजबूत रहना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सरकारी भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं में किसी तरह की अनावश्यक देरी का असर सीधे संबंधित विभागों और लाभुकों पर पड़ सकता है। नियमित निरीक्षण के माध्यम से रिकॉर्ड की स्थिति, भुगतान प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और कार्यालयीन अनुशासन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है।

डीएम रोशन कुशवाहा के निरीक्षण में भी इन्हीं बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। जिला प्रशासन का जोर स्पष्ट है कि वित्तीय मामलों में नियमों का पालन हो, रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और जरूरतमंद लोगों से जुड़े भुगतान एवं पेंशन मामलों का निपटारा समय पर किया जाए।

समस्तीपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर रोशन कुशवाहा को जिलाधिकारी-सह-जिला दंडाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।

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जनता के लिए क्या मायने रखता है?

कोषागार से संबंधित कामकाज का असर आम लोगों और सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचता है। पेंशन, सरकारी भुगतान और विभिन्न वित्तीय मामलों में समय पर कार्रवाई होने से लाभुकों को राहत मिलती है। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा समयबद्ध निष्पादन पर दिया गया जोर महत्वपूर्ण है।

वहीं, वित्तीय अभिलेखों की सुरक्षा और सही तरीके से संधारण प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए आवश्यक है। रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रहने से भविष्य में किसी मामले की जांच अथवा जानकारी की जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं।

कुल मिलाकर जिला कोषागार के निरीक्षण में जिलाधिकारी ने वित्तीय अनुशासन, रिकॉर्ड की सुरक्षा, कार्यालय की साफ-सफाई और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। आने वाले समय में इन निर्देशों के पालन से कोषागार की कार्यप्रणाली और अधिक व्यवस्थित एवं जवाबदेह बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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