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Bihar CBI Rule: बिहार में CBI जांच को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, लोकसेवकों के मामलों में पूर्व सहमति जरूरी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार गृह विभाग ने CBI की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को लेकर नई अधिसूचना जारी की है। राज्य के लोकसेवकों से जुड़े मामलों में जांच के लिए पूर्व सहमति की व्यवस्था लागू की गई है।

पटना, 05 सितंबर। बिहार सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की राज्य में जांच से जुड़े अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। गृह विभाग ने 3 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत CBI की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के विस्तार तथा राज्य सरकार के लोकसेवकों से संबंधित मामलों में पूर्व सहमति की अनिवार्यता को स्पष्ट किया है। बिहार गृह विभाग की आधिकारिक सूची में यह आदेश क्रमांक 10770 के रूप में दर्ज है।

नई व्यवस्था का सीधा संबंध बिहार सरकार के प्रशासनिक दायरे में आने वाले लोकसेवकों और सरकारी संस्थानों से जुड़े मामलों से है। इसका मतलब यह है कि ऐसे मामलों में CBI की जांच प्रक्रिया राज्य सरकार की सहमति की निर्धारित व्यवस्था के अधीन होगी।

गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के प्रावधानों के तहत CBI की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। गृह विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 3 सितंबर 2026 की अधिसूचना का विषय ही CBI की शक्तियों एवं अधिकार क्षेत्र के विस्तार तथा राज्य सरकार के लोक सेवकों के मामलों में पूर्व सहमति की अनिवार्यता से संबंधित बताया गया है।

इस आदेश के बाद राज्य सरकार के लोकसेवकों से संबंधित मामलों में CBI की जांच को लेकर पूर्व सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

अब क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिहार सरकार के लोकसेवकों से जुड़े मामलों में CBI की जांच के लिए राज्य सरकार की पूर्व सहमति आवश्यक होगी।

यानी किसी मामले में यदि CBI जांच की जरूरत सामने आती है और वह मामला बिहार सरकार के लोकसेवक के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करना जरूरी होगा।

इससे राज्य सरकार के प्रशासनिक क्षेत्र में आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगी।

CBI की जांच शक्ति पर नहीं, प्रक्रिया पर जोर

इस फैसले को केवल CBI की जांच शक्ति समाप्त करने के रूप में देखना सही नहीं होगा। गृह विभाग की अधिसूचना मूल रूप से CBI के अधिकार क्षेत्र और राज्य सरकार के लोकसेवकों से संबंधित मामलों में पूर्व सहमति की आवश्यकता को लेकर व्यवस्था स्पष्ट करती है।

इसका असर जांच शुरू करने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर पड़ेगा। राज्य सरकार से संबंधित मामलों में CBI को निर्धारित सहमति प्रक्रिया का पालन करना होगा।

राज्य सरकार के लिए बढ़ेगी भूमिका

इस व्यवस्था में बिहार सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी प्रस्तावित जांच के मामले में राज्य सरकार के स्तर पर उपलब्ध तथ्यों और संबंधित विषय की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जा सकेगी।

इससे राज्य के प्रशासनिक मामलों में जांच एजेंसी और राज्य सरकार के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़े समन्वय की आवश्यकता बढ़ेगी।

अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या असर?

बिहार सरकार के लोकसेवकों के खिलाफ CBI जांच से जुड़े मामलों में अब पूर्व सहमति की व्यवस्था लागू होगी। इससे राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में जांच की शुरुआत से पहले राज्य सरकार की भूमिका सुनिश्चित होगी।

हालांकि इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच या कार्रवाई संभव ही नहीं होगी। बल्कि संबंधित मामले में निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार राज्य सरकार की पूर्व सहमति आवश्यक होगी।

केंद्र और राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा

CBI की राज्य में जांच का अधिकार क्षेत्र लंबे समय से केंद्र और राज्यों के बीच सहमति से जुड़ा विषय रहा है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 CBI के अधिकार क्षेत्र का प्रमुख कानूनी आधार है। बिहार सरकार ने अब अपने गृह विभाग के माध्यम से राज्य के लोकसेवकों से संबंधित मामलों में पूर्व सहमति की आवश्यकता को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी की है।

बिहार पुलिस की आधिकारिक जानकारी भी दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 को CBI/दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रमुख कानून के रूप में उल्लेख करती है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

राज्य सरकार के स्तर पर इस तरह की व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच की प्रक्रिया निर्धारित प्रशासनिक चैनल के माध्यम से आगे बढ़ेगी।

इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश मानी जा सकती है कि राज्य सरकार के प्रशासनिक दायरे से जुड़े मामलों में जांच शुरू करने से पहले संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हो।

गृह विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण

बिहार सरकार के गृह विभाग के पास राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस से संबंधित महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां हैं। विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार गृह विभाग पुलिस से जुड़े मामलों के साथ-साथ CBI को मामला भेजने और अन्य संबंधित प्रशासनिक विषयों में भी भूमिका निभाता है।

ऐसे में CBI के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी नई अधिसूचना को गृह विभाग की ओर से जारी किया जाना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

क्या हर CBI मामले में राज्य की अनुमति जरूरी होगी?

इस विषय में खबरों की भाषा को लेकर सावधानी जरूरी है। नई अधिसूचना का आधिकारिक विषय विशेष रूप से राज्य सरकार के लोक सेवकों के मामलों में पूर्व सहमति की अनिवार्यता से संबंधित है। इसलिए इसे इस रूप में नहीं कहा जाना चाहिए कि बिहार में CBI को हर प्रकार की जांच के लिए सामान्य रूप से राज्य सरकार की अनुमति लेनी ही होगी। आधिकारिक आदेश में जिस दायरे और श्रेणी का उल्लेख है, उसी के अनुसार इसकी व्याख्या की जानी चाहिए।

यही अंतर इस फैसले को समझने में सबसे महत्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा?

अब राज्य सरकार के लोकसेवकों से जुड़े ऐसे मामलों में जहां CBI जांच प्रस्तावित होगी, वहां पूर्व सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे जांच एजेंसी और बिहार सरकार के बीच औपचारिक समन्वय की आवश्यकता बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, बिहार गृह विभाग की 3 सितंबर की अधिसूचना ने CBI की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के साथ-साथ राज्य के लोकसेवकों से जुड़े मामलों में पूर्व सहमति की व्यवस्था को स्पष्ट किया है। यह फैसला राज्य के प्रशासनिक ढांचे में CBI जांच से संबंधित प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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