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Bihar Flood News: गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में बढ़ी चिंता, 13 प्रभारी मंत्री और सचिव संभालेंगे बाढ़ प्रभावित जिलों की निगरानी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में गंगा, कोसी और गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों की निगरानी तेज की। 13 प्रभारी मंत्री और सचिवों को राहत-बचाव कार्यों की जिम्मेदारी दी गई।

पटना, 05 सितंबर 2026। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा, कोसी और गंडक के उफान के बीच कई इलाकों में बाढ़ का दबाव बढ़ रहा है, जबकि भागलपुर सहित कुछ क्षेत्रों में नदी कटाव की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। राजधानी पटना में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ और कटाव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से राहत और बचाव की तैयारियों के बारे में जानकारी लेते हुए स्पष्ट किया कि जलस्तर में वृद्धि के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

बक्सर से कटिहार तक विशेष निगरानी

सरकार ने गंगा के तटवर्ती जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। बक्सर से कटिहार तक गंगा किनारे बसे जिलों में प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों को सक्रिय रहने के लिए कहा गया है।

प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में कैंप कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने और किसी भी आपात परिस्थिति में तत्काल निर्णय लेने पर जोर दिया गया है।

पटना शहरी क्षेत्र में भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। गंगा के बढ़ते पानी के साथ-साथ तटबंधों और उनके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।

इन जिलों की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गंगा के तटवर्ती जिलों में प्रभारी मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार समेत प्रभावित क्षेत्रों में मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करेंगे।

सरकार की कोशिश है कि बाढ़ की स्थिति बिगड़ने से पहले संवेदनशील इलाकों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को भी सक्रिय रहने और लोगों की जरूरतों के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

गांधी घाट पर खतरे के निशान से काफी ऊपर गंगा

पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर चिंता बढ़ाने वाला बना हुआ है। 5 सितंबर की सुबह 9 बजे गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर बताया गया है। नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ने की प्रवृत्ति में है।

गंगा यहां अपने अब तक के उच्चतम जलस्तर 50.52 मीटर के बेहद करीब बह रही है। विभागीय आकलन के मुताबिक गांधी घाट पर नया उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL बनने की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी के आसपास बसे दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर निगरानी और बढ़ा दी गई है।

दियारा क्षेत्रों में बढ़ रहा पानी का दबाव

गंगा के प्रवाह क्षेत्र में पानी बढ़ने के साथ दियारा क्षेत्रों में दबाव बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। तटबंध के नदी वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी समय पर देने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है।

बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिलास्तर पर गठित टीमों को भी सक्रिय रखा गया है। इन टीमों को संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त करने और स्थानीय स्थिति की रिपोर्ट प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

बांध और नहरों पर 24 घंटे नजर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। बांधों और नहरों की निगरानी के लिए अधिकारियों को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने को कहा गया है। जलस्तर में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था रखने पर जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक आने वाले समय में करीब 26 किलोमीटर के इंबैंकमेंट को दुरुस्त करने की योजना पर काम किया जाएगा। इसके अलावा करीब 10 से 12 किलोमीटर क्षेत्र में स्ट्रेट तैयार करने और बीच के हिस्से में ड्रेजिंग की व्यवस्था करने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य नदी के प्रवाह और कटाव से जुड़े दबाव को कम करना है।

भागलपुर में कटाव ने बढ़ाई परेशानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच भागलपुर के कई क्षेत्रों में कटाव की समस्या भी सामने आ रही है। नदी के किनारे बसे इलाकों में लगातार पानी का दबाव बने रहने से लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन को विशेष निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार राहत-बचाव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा की होती है। इसलिए प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी, स्थानीय लोगों को समय पर सूचना और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण की तैयारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार ने बढ़ाई निगरानी, अब मैदान में रहेंगे मंत्री

नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच सरकार ने केवल जिला प्रशासन के भरोसे रहने के बजाय प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को भी सीधे निगरानी में लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य राहत और बचाव कार्यों की जमीनी स्थिति की नियमित जानकारी लेना तथा किसी भी समस्या के सामने आने पर उसका तेजी से समाधान कराना है।

फिलहाल गंगा के साथ कोसी और गंडक के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में जलस्तर में क्या बदलाव होता है, यह बाढ़ की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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