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Bihar Flood: पुनपुन नदी के उफान से 48 सरकारी स्कूल जलमग्न, हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पुनपुन नदी के बढ़े जलस्तर से 48 सरकारी स्कूल बाढ़ की चपेट में हैं। स्कूल परिसरों में पानी भरने से पढ़ाई बंद है, जबकि 22 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।

पुनपुन, 7 सितंबर। पुनपुन नदी के उफान ने अब इलाके की शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बाढ़ का पानी सरकारी स्कूलों के परिसरों में घुसने के बाद प्रखंड के 48 विद्यालयों में पठन-पाठन फिलहाल बंद हो गया है। कई स्कूलों में पानी घुटनों से लेकर कमर तक पहुंच गया है, जबकि कुछ विद्यालय चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए कक्षाओं का संचालन रोक दिया गया है।

बाढ़ की वजह से प्राथमिक और मध्य विद्यालय स्तर के हजारों बच्चे फिलहाल स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। स्कूलों में नियमित पढ़ाई बंद होने के साथ मध्याह्न भोजन योजना का संचालन भी प्रभावित हुआ है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है कि बाढ़ की स्थिति लंबी चली तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान और बढ़ सकता है।

कई पंचायतों के स्कूल बाढ़ की चपेट में

बाढ़ का प्रभाव पुनपुन प्रखंड के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। बरावां, लखना पूर्वी, लखना उत्तरी-पश्चिमी और लखनपार पंचायत के कई सरकारी विद्यालय प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा पुनपुन नगर पंचायत क्षेत्र के भी कई स्कूलों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।

कुछ विद्यालयों के परिसर में इतना पानी जमा है कि वहां से बच्चों और शिक्षकों का सुरक्षित तरीके से आना-जाना मुश्किल हो गया है। कई जगह स्कूल भवन पानी से घिरे हुए हैं। ऐसे में स्कूल खोलकर बच्चों की कक्षाएं संचालित करना जोखिम भरा माना जा रहा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि कई बार स्थानीय स्तर पर राहत और सामुदायिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान होते हैं। लेकिन जब स्कूल परिसर ही पानी में डूब जाएं तो उनका सामान्य उपयोग संभव नहीं रह जाता।

बाढ़ सामान्य होने तक कक्षाएं बंद रहने की संभावना

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन विद्यालयों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, वहां स्थिति सामान्य होने तक कक्षाएं संचालित करना संभव नहीं है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल पठन-पाठन रोक दिया गया है।

स्कूल बंद होने का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। खासकर प्राथमिक और मध्य विद्यालय के बच्चों के लिए नियमित कक्षा महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक स्कूल बंद रहने पर पाठ्यक्रम पूरा करने और बच्चों को दोबारा पढ़ाई की लय में लाने की चुनौती सामने आ सकती है।

अभिभावकों को भी इस बात की चिंता है कि बाढ़ के कारण पहले से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई और पीछे न रह जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन पढ़ाई जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी हर परिवार के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होती।

22 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया

बाढ़ का असर केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। पानी से प्रभावित 22 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। यह व्यवस्था सीडीपीओ की पहल पर की गई है, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छोटे बच्चों और महिलाओं से जुड़ी जरूरी सेवाएं पूरी तरह बंद न हों।

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण संबंधी सहायता के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्रों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने से इन सेवाओं को जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है।

बाढ़ जैसी आपदा के दौरान छोटे बच्चों और महिलाओं के लिए पोषण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बेहद जरूरी हो जाती है। इसी वजह से प्रभावित आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्कूलों के लिए फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित कर सेवाएं जारी रखने की कोशिश की गई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित 48 सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए अभी कोई वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था सामने नहीं आई है।

यही स्थिति अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। यदि पानी जल्द नहीं उतरता है तो बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने में और देरी हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई को पटरी पर लाने की चुनौती होगी।

वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सुरक्षित भवनों में अस्थायी कक्षाएं चलाने, स्कूलों में पानी निकलने के बाद साफ-सफाई कराने और पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने जैसे विकल्पों पर आगे विचार किया जा सकता है।

जलस्तर घटने का इंतजार

फिलहाल प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी जरूरत बाढ़ का पानी कम होने की है। पानी उतरने के बाद भी विद्यालयों को तुरंत खोलना आसान नहीं होगा। स्कूल परिसरों की सफाई, जलजमाव समाप्त करना और भवनों की सुरक्षा जांचना जरूरी होगा।

बाढ़ प्रभावित बच्चों की पढ़ाई को सामान्य स्थिति में वापस लाने के लिए शिक्षा विभाग को भी आगे की कार्ययोजना बनानी होगी। स्कूल जितने लंबे समय तक बंद रहेंगे, बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियां उतनी ही प्रभावित होंगी।

पुनपुन में बाढ़ ने यह भी दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदा के समय शिक्षा व्यवस्था को वैकल्पिक रूप से संचालित करने की तैयारी कितनी जरूरी है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की गई है, लेकिन स्कूलों के लिए भी ऐसी व्यवस्था तैयार हो तो बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप होने से बचाई जा सकती है।

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बाढ़ के बीच शिक्षा को लेकर बड़ी चुनौती

बाढ़ के दौरान सबसे पहले लोगों की जान और सुरक्षा की चिंता होती है, लेकिन इसके साथ बच्चों की शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। 48 स्कूलों का बंद होना छोटी समस्या नहीं है। इससे हजारों विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाएं भी रुक रही हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर सेवाएं जारी रखने की कोशिश से यह संकेत मिलता है कि आपदा के बीच आवश्यक सेवाओं को वैकल्पिक तरीके से चलाया जा सकता है। इसी तरह स्कूलों के लिए भी अस्थायी शिक्षण केंद्र या सुरक्षित भवनों में कक्षाएं चलाने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद केवल स्कूल खोल देना पर्याप्त नहीं होगा। लंबे समय से पढ़ाई से दूर रहे बच्चों को दोबारा नियमित पढ़ाई से जोड़ना, छूटे हुए पाठ्यक्रम को पूरा कराना और प्रभावित विद्यालयों को साफ-सुरक्षित बनाना भी जरूरी होगा। प्रशासन की चुनौती अब सिर्फ पानी घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके बाद शिक्षा व्यवस्था को तेजी से सामान्य स्थिति में लाने की भी है।

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