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Bihar Flood: बाढ़ के बीच लालू यादव का केंद्र-राज्य सरकार पर हमला, बोले- भीख नहीं, बिहार को क्रेडिट के अनुरूप पैसा दो

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में बाढ़ के बीच लालू प्रसाद यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए स्थायी समाधान, आर्थिक सहायता और कम Credit Deposit Ratio पर सवाल उठाए।

पटना, 8 सितंबर। बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्र और बिहार सरकार को घेरा है। उन्होंने राहत और सहायता की मांग को केवल तत्काल आर्थिक पैकेज तक सीमित रखने के बजाय बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत बताई। लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वर्ष 2011 के अपने संसद भाषण का वीडियो साझा करते हुए बिहार के वित्तीय हालात, नदियों के रखरखाव, नेपाल के साथ बातचीत और राज्य के कम Credit Deposit Ratio को लेकर कई सवाल उठाए।

बिहार में इस समय कई नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। 8 सितंबर की सरकारी प्रसारण सेवा की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा, गंडक, कोसी और सोन के जलस्तर में कुछ स्थानों पर कमी आई है, लेकिन निचले इलाकों में स्थिति अब भी गंभीर है और करीब 27 लाख लोग 13 जिलों में बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।

इसी पृष्ठभूमि में लालू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार को राहत के नाम पर किसी तरह की कृपा नहीं चाहिए, बल्कि राज्य की जरूरत, योगदान और आर्थिक हिस्सेदारी के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि बिहार किसी से भीख नहीं मांग रहा है और उसे उसके Credit के अनुरूप पैसा मिलना चाहिए।

पुराने संसद भाषण का वीडियो साझा कर सरकारों को घेरा

लालू प्रसाद यादव ने जो वीडियो साझा किया है, वह वर्ष 2011 के उनके संसद भाषण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र में यूपीए-2 की सरकार थी, जबकि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी। उनके मुताबिक राजनीतिक परिस्थितियां अलग होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली में बिहार के हितों को लेकर आवाज उठाई थी।

लालू ने अपने पोस्ट में दावा किया कि बिहार की बाढ़ की समस्या को लेकर उन्होंने सत्ता में रहते और विपक्ष में रहते दोनों समय केंद्र से मदद की मांग की। उनका आरोप है कि बाढ़ आने के बाद राहत सामग्री या मुफ्त अनाज की घोषणा करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे हर साल आने वाली बाढ़ से बिहार को दीर्घकालिक राहत मिल सके।

2004 से 2009 के बीच 1.44 लाख करोड़ रुपये का दावा

आरजेडी प्रमुख ने अपने पोस्ट में वर्ष 2004 का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जब वह आरजेडी के 24 सांसदों के साथ यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बने, तब अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बिहार के विकास कार्यों के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि दिलाई।

यह लालू यादव का राजनीतिक दावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में इसी तरह की केंद्रीय सहायता से बिहार में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया, लेकिन आज केंद्र में बड़ी संख्या में सांसद होने के बावजूद बिहार की समस्याओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है।

नीतीश कुमार और एनडीए पर भी निशाना

लालू यादव ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार से एनडीए के करीब 30 सांसद होने के बावजूद राज्य के मुद्दों की दिल्ली में पर्याप्त सुनवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में अलग-अलग गठबंधन की सरकार होने के बावजूद उन्होंने बिहार के लिए केंद्र से लड़ाई लड़ी। अब जब केंद्र और बिहार दोनों जगह एनडीए की सरकार है, तब बाढ़ जैसी गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

नेपाल से बातचीत और नदियों के रखरखाव का मुद्दा

लालू यादव ने बिहार की बाढ़ को केवल राज्य सरकार के स्तर की समस्या मानने से इनकार करते हुए नेपाल से जुड़े नदी तंत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाली नदियों के प्रबंधन और उनके रखरखाव को लेकर भारत सरकार को नेपाल सरकार के साथ स्पष्ट और प्रभावी बातचीत करनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि नदियों के रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि बिहार को नहीं मिल रही है। साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर द्वारा भी इस मुद्दे को उठाए जाने का उल्लेख किया।

मुफ्त अनाज के बजाय स्थायी समाधान की मांग

आरजेडी प्रमुख ने बाढ़ के दौरान राहत के तौर पर मुफ्त अनाज या अन्य घोषणाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि चुनाव या बाढ़ के समय राहत की घोषणाएं करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे बिहार को हर साल बाढ़ की त्रासदी से नहीं गुजरना पड़े।

उनके अनुसार बिहार की समस्या का समाधान केवल राहत सामग्री बांटने से नहीं होगा। नदियों के रखरखाव, तटबंधों की स्थिति, जल निकासी, नेपाल के साथ समन्वय और बाढ़ नियंत्रण की दीर्घकालिक योजना पर एक साथ काम करना होगा।

बिहार के Credit Deposit Ratio पर सवाल

लालू यादव ने अपने बयान में बिहार की अर्थव्यवस्था से जुड़े Credit Deposit Ratio यानी साख-जमा अनुपात का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बिहार में बैंकों में जमा होने वाली राशि के मुकाबले राज्य में ऋण और निवेश का अनुपात कम क्यों है।

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग रोजगार की तलाश में देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों तक जाते हैं। वहां मेहनत से कमाई करने के बाद पैसा बिहार भेजते हैं, लेकिन राज्य में उस आर्थिक योगदान के अनुरूप निवेश और खर्च नहीं हो पाता।

लालू यादव ने सरकार से इसी संदर्भ में सवाल किया कि बिहार के कम Credit Deposit Ratio को सुधारने के लिए ठोस नीति क्यों नहीं बनाई जा रही है। उनका कहना है कि राज्य को अपने आर्थिक योगदान के अनुपात में वित्तीय अवसर और संसाधन मिलने चाहिए।

बाढ़ के बीच तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

बिहार में बाढ़ के कारण जहां प्रशासन राहत और बचाव अभियान में जुटा है, वहीं राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। लालू यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा है। उन्होंने बाढ़ को तत्काल राहत से आगे ले जाकर बिहार की अर्थव्यवस्था, केंद्र से वित्तीय सहयोग और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन से जोड़ दिया है।

लालू यादव की मांग का मुख्य केंद्र यही है कि बिहार को राहत के नाम पर अस्थायी सहायता के बजाय ऐसी वित्तीय और तकनीकी मदद मिले, जिससे बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाशा जा सके। साथ ही उन्होंने राज्य में बैंकिंग निवेश बढ़ाने और Credit Deposit Ratio को बेहतर करने की दिशा में भी केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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राजनीतिक टिप्पणी

लालू प्रसाद यादव का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इस बयान में उन्होंने राहत राशि से लेकर बैंकिंग व्यवस्था तक कई सवाल एक साथ उठाए हैं। खास तौर पर Credit Deposit Ratio का मुद्दा बिहार की पुरानी आर्थिक चुनौती से जुड़ा है।

हालांकि लालू यादव द्वारा 2004-09 के दौरान बिहार के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि दिलाने का दावा राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है, इसलिए इस आंकड़े की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि और इसके घटकों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा। इसी तरह बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए नेपाल के साथ समन्वय, नदी प्रबंधन और तटबंधों की स्थिति पर भी सरकारों से स्पष्ट और सार्वजनिक रोडमैप की अपेक्षा की जा सकती है।

बाढ़ के दौरान राहत पहुंचाना जरूरी है, लेकिन हर साल उसी तरह की आपदा दोहराती रहे तो केवल राहत व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। बिहार को दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन, बेहतर जल निकासी, नदी और तटबंध प्रबंधन तथा केंद्र-राज्य-नेपाल समन्वय की मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यही है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को स्थायी राहत कब मिलेगी।

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