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Patna Vigilance Action: वाहन छोड़ने के बदले 10 हजार की रिश्वत, JP Ganga Path पर दारोगा उपेंद्र साह गिरफ्तार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते ट्रैफिक थाना से जुड़े दारोगा उपेंद्र साह को गिरफ्तार किया। कार्रवाई JP Ganga Path पर हुई।

पटना, 8 सितंबर। राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक पुलिस से जुड़े दारोगा उपेंद्र साह को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई जेपी गंगापथ के आसपास की गई। आरोप है कि जब्त वाहन को छोड़ने के एवज में दारोगा ने शिकायतकर्ता से रकम की मांग की थी। निगरानी की टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद जाल बिछाया और तय रकम लेते ही आरोपी पुलिस पदाधिकारी को दबोच लिया। इस कार्रवाई की पुष्टि मंगलवार को सामने आई रिपोर्टों में हुई है।

निगरानी विभाग के अनुसार मामले की शुरुआत कैमूर जिले के रहने वाले जमील अंसारी की शिकायत से हुई। बताया गया है कि जमील अंसारी पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री का कारोबार करते हैं। वाहन से जुड़े एक मामले में कार्रवाई के बाद उनकी गाड़ी पुलिस के कब्जे में चली गई थी। इसके बाद वाहन को मुक्त कराने के लिए कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई।

वाहन की खरीद-बिक्री के दौरान हुआ था विवाद

मामला पटना जंक्शन के आसपास वाहन की खरीद-बिक्री से जुड़ा बताया गया है। जानकारी के अनुसार जमील अंसारी एक वाहन की खरीद को लेकर चालक चंदन के संपर्क में थे। वाहन का ट्रायल किए जाने के दौरान एक अन्य व्यक्ति के वाहन से टक्कर हो गई।

घटना के बाद संबंधित पक्षों के बीच आपसी समझौता होने की बात सामने आई। इसके बावजूद पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर थाने में रख लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वाहन को छोड़ने के लिए उससे पैसे मांगे गए।

इसी कथित मांग के बाद जमील अंसारी ने मामले की जानकारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले आरोपों का सत्यापन कराया।

शिकायत सही मिलने के बाद बनाया गया ट्रैप

निगरानी अधिकारियों ने शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान प्रथम दृष्टया रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की तैयारी शुरू की गई।

इसके बाद निगरानी टीम ने शिकायतकर्ता के साथ समन्वय कर ट्रैप की योजना बनाई। तय रणनीति के अनुसार शिकायतकर्ता को रकम लेकर संबंधित पुलिस पदाधिकारी के पास भेजा गया।

मंगलवार को जेपी गंगापथ के पास जैसे ही 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत की रकम ली गई, निगरानी टीम ने कार्रवाई करते हुए दारोगा उपेंद्र साह को पकड़ लिया। उनके पास से ट्रैप में इस्तेमाल की गई रकम बरामद किए जाने की बात भी सामने आई है।

तीन जिलों में एक साथ निगरानी की कार्रवाई

उपेंद्र साह की गिरफ्तारी मंगलवार को हुई निगरानी की एक बड़ी कार्रवाई का हिस्सा रही। इसी दिन निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बिहार के तीन अलग-अलग स्थानों पर रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई की।

जहानाबाद में मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। वहीं शेखपुरा DTO कार्यालय में बड़ा बाबू कुणाल जी को 15 हजार रुपये लेते पकड़ा गया। पटना में उपेंद्र साह के खिलाफ 10 हजार रुपये का ट्रैप किया गया। तीनों मामलों में कुल 45 हजार रुपये की कथित रिश्वत पकड़ी गई।

निगरानी की कार्रवाई से पुलिस महकमे में चर्चा

ट्रैफिक पुलिस से जुड़े दारोगा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से ऐसे मामलों में पहले शिकायत की जांच और सत्यापन किया जाता है, जिसके बाद ट्रैप की कार्रवाई की जाती है।

इस मामले में भी शिकायत मिलने के बाद सत्यापन और उसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। अब निगरानी टीम आरोपी पुलिस पदाधिकारी से पूछताछ के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

रिश्वत के आरोप की जांच आगे भी जारी

निगरानी की कार्रवाई में गिरफ्तारी के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। आरोपी दारोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि कथित रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई और पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।

फिलहाल निगरानी की कार्रवाई का मुख्य आधार शिकायत, उसके सत्यापन और ट्रैप के दौरान कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रकम लेते पकड़े जाने से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

पटना में हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार को बिहार के अलग-अलग जिलों में रिश्वतखोरी के मामलों में लगातार तीन ट्रैप किए। इससे सरकारी कार्यालयों और पुलिस व्यवस्था में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी की सक्रियता का संकेत मिलता है।

टिप्पणी

सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी जब शिकायत मिलने के बाद निष्पक्ष जांच, त्वरित ट्रैप और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़े। पटना में ट्रैफिक पुलिस से जुड़े दारोगा की गिरफ्तारी इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है।

वाहन छोड़ने जैसी सामान्य नागरिक सेवा के लिए कथित तौर पर रिश्वत मांगने का आरोप गंभीर है, क्योंकि पुलिस और प्रशासन से आम लोगों को निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद रहती है। हालांकि गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करती और आरोपी को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।

निगरानी ब्यूरो की लगातार कार्रवाइयों से एक संदेश जरूर जाता है कि रिश्वत मांगने की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। लेकिन भ्रष्टाचार पर वास्तविक अंकुश तभी लगेगा जब विभागीय स्तर पर भी निगरानी मजबूत हो, शिकायतकर्ताओं को सुरक्षित माहौल मिले और दोष साबित होने पर प्रभावी कार्रवाई हो।

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