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Bihar Politics: सहरसा में पत्रकार से मारपीट पर तेजस्वी यादव ने मांगी कड़ी कार्रवाई, IP गुप्ता भी बोले- हाथापाई का रास्ता गलत

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट के मामले पर तेजस्वी यादव और विधायक आईपी गुप्ता ने कार्रवाई की मांग की। पत्रकार के आरोपों की जांच जारी है।

सहरसा, 13 सितंबर, Alam Ki Khabar। सहरसा सदर अस्पताल में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। घटना को लेकर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने भी पत्रकार के साथ हाथापाई को गलत बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

तेजस्वी यादव ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी घटना के बाद सवाल पूछना पत्रकार और जनता दोनों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी रिपोर्टिंग या सवाल से किसी को आपत्ति है तो उसका जवाब नियम और कानून के दायरे में दिया जाना चाहिए, मारपीट के जरिए नहीं।

तेजस्वी ने घटना को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों में व्यवहार के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कभी थानेदार द्वारा मारपीट की बात सामने आती है तो कभी डॉक्टर पर ऐसे आरोप लगते हैं। उन्होंने पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

आईपी गुप्ता ने भी जताई नाराजगी

सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने पत्रकार के साथ हुई कथित हाथापाई को अनुचित और अशोभनीय बताया। उनका कहना है कि यदि किसी पत्रकार की रिपोर्टिंग से किसी व्यक्ति या संस्था को परेशानी है तो शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस को भी सूचना दी जा सकती है, लेकिन विवाद का समाधान मारपीट नहीं हो सकता।

विधायक ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भी चिंता जताई।

RJD ने भी उठाए अस्पताल प्रबंधन पर सवाल

घटना के बाद राष्ट्रीय जनता दल की ओर से भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने अस्पतालों में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। पार्टी की ओर से कहा गया कि अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ मीडिया कर्मियों के साथ भी मर्यादित व्यवहार होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

बताया गया है कि प्रभात खबर के पत्रकार अभिषेक मिड डे मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए सहरसा सदर अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चों की स्थिति की जानकारी लेने और वीडियो बनाने के बाद वह अस्पताल परिसर के बरामदे में रिपोर्टिंग के लिए पीटीसी कर रहे थे।

पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टरों को उनके बारे में शिकायत की गई। इसके बाद दो चिकित्सकों पर कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।

20 से 25 लोगों को बुलाने का भी आरोप

पत्रकार की शिकायत के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद करीब 20 से 25 लोगों को वहां बुलाए जाने का आरोप है। शिकायत में पत्रकार को जबरन ओटी की ओर ले जाने और एक कमरे में बंद किए जाने की बात भी कही गई है।

आवेदन में मारपीट के अलावा गला दबाने और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हमला करने तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था।

CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग

पत्रकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अस्पताल परिसर, इमरजेंसी और ओटी के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। CCTV फुटेज घटना के दौरान मौजूद लोगों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

सहरसा सदर अस्पताल की इस घटना के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ पत्रकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में जांच में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित पक्षों के कथनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पत्रकारिता के दौरान सवाल पूछना और किसी घटना की रिपोर्टिंग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। वहीं किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का रास्ता अपनाना ही उचित माना जाता है। इस मामले में अब देखना होगा कि प्रशासन जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है।

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