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पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, नालंदा में प्रशासनिक आदेश रद्द; दो नागरिकों को मुआवजा देने का निर्देश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना हाईकोर्ट ने नालंदा प्रशासन की कार्रवाई रद्द करते हुए दो नागरिकों को मुआवजा देने का निर्देश दिया और प्रशासनिक आदेश पर कड़ी टिप्पणी की।

पटना, 15 सितंबर 2026 | Alam Ki Khabar

पटना हाईकोर्ट ने नालंदा जिला प्रशासन द्वारा बिहार अपराध नियंत्रण कानून, 2024 के तहत की गई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले में दो स्थानीय नागरिकों को राहत देते हुए राज्य सरकार को दोनों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा प्रत्येक को मुकदमे के खर्च के रूप में 10-10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।

डीएम के आदेश पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी कुंदन की ओर से पारित आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश के तहत नालंदा के कटौती गांव निवासी शशि कुमार उर्फ फूकन और अजय सिंह के खिलाफ बिहार अपराध नियंत्रण कानून, 2024 के तहत कार्रवाई की गई थी।

प्रशासन की ओर से आशंका जताई गई थी कि विधानसभा चुनाव और छठ पर्व के दौरान दोनों के खुले तौर पर घूमने से कानून-व्यवस्था और शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर सितंबर 2025 में दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

स्पष्टीकरण पर विचार नहीं करने का आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों नागरिकों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर जिला प्रशासन ने उचित तरीके से विचार नहीं किया। हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई के लिए आवश्यक ठोस तथ्यों और स्वतंत्र जांच के अभाव को भी गंभीरता से लिया।

अदालत ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को केवल अनुमान या पर्याप्त आधार के बिना असामाजिक तत्व घोषित करना कानून और न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

'कट एंड पेस्ट' प्रारूप पर भी कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने नालंदा प्रशासन के आदेश के प्रारूप पर भी सवाल उठाया। अदालत के अनुसार आदेश में स्वतंत्र विचार और ठोस सामग्री का अभाव दिखाई देता है और उसका प्रारूप 'कट एंड पेस्ट' जैसा प्रतीत होता है।

खंडपीठ ने प्रशासनिक व्यवस्था में न्यायिक सोच की कमी पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई बिना पर्याप्त आधार और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए नहीं की जा सकती।

24 महीने में दो मामलों के प्रावधान का भी मुद्दा

मामले में बिहार अपराध नियंत्रण कानून, 2024 के प्रावधानों को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। संबंधित प्रावधान के अनुसार 24 महीने की अवधि में किसी व्यक्ति के खिलाफ थाने में दो मामले दर्ज होने जैसी परिस्थितियां कार्रवाई के आधार से जुड़ी हैं।

हाईकोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई कि इस मामले में दोनों नागरिकों के खिलाफ ऐसा आधार मौजूद नहीं था। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

अधिकारियों से वसूली जाएगी मुआवजे की राशि

पटना हाईकोर्ट ने दोनों पीड़ित नागरिकों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा और 10-10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मुआवजे की राशि संबंधित दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए।

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