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रोसड़ा में हिंदी दिवस पर डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर की 16वीं पुण्यतिथि मनाई गई, कवि सम्मेलन में सजी साहित्य की महफिल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | रोसड़ा में हिंदी दिवस और साहित्य परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर की 16वीं पुण्यतिथि पर समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में हिंदी की महत्ता और साहित्यिक योगदान पर चर्चा के साथ कवि सम्मेलन हुआ।

Alam Ki Khabar, 16 सितंबर 2026:रोसड़ा शहर के महाराजा रिसॉर्ट के सभागार में सोमवार को हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्य परिषद रोसड़ा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर की 16वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और हिंदी प्रेमियों ने डॉ. ठाकुर के साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।समारोह की अध्यक्षता साहित्य परिषद के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. शिवशंकर प्रसाद सिंह ने की। मंच संचालन डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर स्मृति संस्थान के संयोजक रामस्वरूप सहनी रोसड़ाई ने किया। परिषद के सचिव प्रो. प्रफुल्ल चंद्र ठाकुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की भूमिका रखी।

हिंदी को एकता और संस्कृति से जोड़ने वाली भाषा बताया

मुख्य अतिथि के रूप में मुंगेर से पहुंचे साहित्यकार मधुसूदन आत्मीय ने हिंदी को जन-जन तक पहुंचने वाली भाषा बताते हुए कहा कि यह देश की विविध भाषाओं और संस्कृतियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम है। उन्होंने हिंदी और रामचरितमानस के संदर्भ में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति की जड़ों को समझने में साहित्यिक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्य अतिथि ने डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उन्हें गंभीर समीक्षक और साहित्यकार के रूप में श्रद्धांजलि दी।

शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में डॉ. ठाकुर का योगदान

समारोह में वक्ताओं ने बताया कि डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर ने शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। वे यूआर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य रहे। इसके साथ ही साहित्य सम्मेलन प्रयाग में उप सभापति और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे दायित्वों से भी जुड़े रहे।

डॉ. ठाकुर ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में मानविकी संकाय के अध्यक्ष (डीन), सीनेट एवं सिंडिकेट सदस्य तथा शोध निदेशक सहित विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का उल्लेख इस बात से भी जुड़ा रहा कि उनका निधन हिंदी दिवस के दिन हुआ था।

हिंदी को भाषाई विविधता के बीच जोड़ने वाली कड़ी बताया

विशिष्ट अतिथि गगनदेव चौधरी और नरेंद्र कुमार सिंह ने हिंदी की भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि हिंदी को केवल हिंदीभाषी समाज तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने इसे देश की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम बताया।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी की पहचान देश के बाहर भी बनी है और विभिन्न देशों में हिंदी भाषा एवं साहित्य को लेकर रुचि दिखाई देती है। दोनों अतिथियों ने डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर के साहित्यिक जीवन और हिंदी सेवा को भी याद किया।

संस्थाओं के निर्माण और साहित्यिक समीक्षा में निभाई भूमिका

समारोह में वक्ताओं ने डॉ. ठाकुर के सामाजिक-साहित्यिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रभाषा समिति, अभिव्यक्ति और साहित्य परिषद जैसी संस्थाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मैथिली साहित्य की कई पुरस्कृत रचनाओं की हिंदी में समीक्षा करने के साथ उन्होंने लंबे समय तक साहित्यिक और लेखकीय गतिविधियों को आगे बढ़ाया। वर्ष 1960 से 1990 तक उनका शिक्षण कार्य से जुड़ाव रहा। जीवन के अंतिम समय तक वे साहित्य और लेखन से जुड़े रहे।

कई साहित्यप्रेमियों ने रखे विचार

कार्यक्रम को पूर्व एचएम अमरनाथ झा, आदित्य झा, रचनाकार संजीव कुमार सिंह समेत कई साहित्य प्रेमियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने हिंदी भाषा के महत्व के साथ डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्वलित करने के साथ हुई। समारोह के अंत में साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष शंकर सिंह सुमन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

दूसरे सत्र में सजा कवि सम्मेलन

समारोह के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसकी शुरुआत अब्दुल सत्तार द्वारा सरस्वती वंदना के गायन से हुई। इसके बाद विभिन्न कवियों और रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

कवि सम्मेलन में त्रिलोक नाथ ठाकुर, कैलाश पोद्दार, नब्बी समस्तीपुरी, चंद्रभूषण कुमार, रामस्वरूप सहनी, रामबालक महतो, सत्यनारायण यादव, शंकर सिंह सुमन, मनोज कुमार झा, विजय व्रत कंठ, राहुल शिवाय, विजय कुमार, संजीव कुमार सिंह, पंकज पाण्डेय, अमित मिश्र, वाचस्पति मिश्र और विजय कुमार महतो समेत अन्य कवियों ने भाग लिया।

हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने रोसड़ा की साहित्यिक परंपरा और डॉ. विपिन बिहारी ठाकुर की स्मृति को एक बार फिर केंद्र में रखा। समारोह में हिंदी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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