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Bihar Politics: आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम पर तेजस्वी यादव का हमला, बाढ़ के बीच 100 करोड़ खर्च का लगाया आरोप

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधा और बाढ़ के बीच 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर बिहार में आयोजित किए जा रहे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। 17 सितंबर 2026 को Alam Ki Khabar के लिए सामने आए घटनाक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कार्यक्रम और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एक तरफ बिहार के बड़े हिस्से में लोग बाढ़ की परेशानी झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि दीया-बाती और आयोजन से जुड़े कामों पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, यह तेजस्वी यादव का आरोप है; इस राशि के सरकारी खर्च होने की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। कार्यक्रम को लेकर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने की अपील की गई है।

बाढ़ प्रभावित बिहार का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरा

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में बिहार की मौजूदा बाढ़ की स्थिति को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और ऐसे समय में सरकार की प्राथमिकता राहत और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराने के बजाय प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों पर पैसा खर्च किया जा रहा है। इससे पहले भी तेजस्वी यादव बिहार की बाढ़ को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से राहत एवं विशेष सहायता की मांग कर चुके हैं।

बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी राहत एवं बचाव की समीक्षा की गई है। 16 सितंबर को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मुख्यमंत्री के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की थी।

सरकारी स्कूलों में दीया जलाने को लेकर भी सवाल

तेजस्वी यादव ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को दीया जलाने से जुड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है।

बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की तैयारियों की खबरें सामने आई हैं। कुछ जिलों में स्कूलों और प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों की जानकारी भी सामने आई है।

तेजस्वी यादव ने इसी आधार पर आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारियों और शिक्षकों को ऐसे राजनीतिक कार्यक्रमों में लगाया जाना प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। यह आरोप विपक्ष के नेता की राजनीतिक टिप्पणी है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया

तेजस्वी यादव ने अपने बयान को केवल बाढ़ और दीया कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि आम लोगों के सामने रोजगार और महंगाई जैसी समस्याएं हैं। उनका आरोप है कि इन मुद्दों से ध्यान हटाकर प्रचार और आयोजनों को प्राथमिकता दी जा रही है।

तेजस्वी यादव ने यह भी सवाल उठाया कि अगर कार्यक्रमों पर खर्च होने वाली राशि को बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद में लगाया जाता, तो उसका इस्तेमाल राहत, भोजन, आवास और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए किया जा सकता था।

‘100 करोड़’ के दावे पर क्या है स्थिति?

इस पूरे विवाद में ₹100 करोड़ का आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े दीया-बाती कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्टों में भी उनके इसी दावे का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, इस राशि को सरकारी खर्च के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार या संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक वित्तीय दस्तावेज या स्पष्ट पुष्टि इस रिपोर्ट के उपलब्ध स्रोतों में सामने नहीं आई है। इसलिए ₹100 करोड़ के आंकड़े को तेजस्वी यादव के आरोप के तौर पर ही प्रस्तुत किया जाना उचित है।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा की ओर से ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का आह्वान किया गया है। पार्टी के अनुसार, यह प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर लोगों से दीया जलाने की अपील से जुड़ा अभियान है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर भी तेज हुआ राजनीतिक विवाद

कार्यक्रम को लेकर विवाद सिर्फ खर्च तक सीमित नहीं है। सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों और शिक्षकों की कथित भागीदारी को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

तेजस्वी यादव ने इसे प्रशासनिक संसाधनों के इस्तेमाल से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को राजनीतिक आयोजन से दूर रहना चाहिए और प्रशासन को बाढ़ राहत जैसे जनहित के कामों पर ध्यान देना चाहिए।

वहीं, ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर के जन्मदिन से जुड़ा है। भाजपा की ओर से इसे सेवा और शुभकामना से जुड़े अभियान के तौर पर प्रचारित किया गया है।

बाढ़ के बीच सियासी बयानबाजी तेज

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम ने राज्य की राजनीति में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि कार्यक्रम के समर्थक इसे प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित अभियान के रूप में देख रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में सरकार से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने और सरकारी संसाधनों को जनहित के कामों में लगाने की मांग की है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी इसी बहस से जोड़ा है।

17 सितंबर 2026 को Alam Ki Khabar के लिए सामने आए इस राजनीतिक घटनाक्रम में फिलहाल सबसे अहम मुद्दा बाढ़ राहत और जन्मदिन कार्यक्रम पर होने वाले खर्च को लेकर उठे सवाल हैं। ₹100 करोड़ खर्च किए जाने का दावा तेजस्वी यादव की ओर से किया गया है, जबकि इस राशि की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आगे सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस आरोप पर क्या स्पष्टीकरण आता है, यह इस विवाद का महत्वपूर्ण अगला पक्ष होगा।

बाढ़ राहत बनाम आयोजन के खर्च पर राजनीतिक बहस

बिहार में बाढ़ के कारण बड़ी आबादी प्रभावित होने के बीच राहत कार्य और सरकारी खर्च को लेकर राजनीतिक बहस पहले से चल रही है। ऐसे में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर तेजस्वी यादव का बयान इसी व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।

विपक्ष जहां बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है, वहीं प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब और खर्च से संबंधित विवरण सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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