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Bihar News: 2 अक्टूबर से बिहार के सभी थानों में शुरू होगा बाल सहायता डेस्क, बच्चों की शिकायतों पर होगी त्वरित कार्रवाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Bihar News | 2 अक्टूबर से बिहार के सभी पुलिस थानों में बाल सहायता डेस्क शुरू होंगे, नाबालिगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विशेष व्यवस्था।

पटना, 19 सितंबर 2026 | Alam Ki Khabar: बिहार में नाबालिगों की सुरक्षा और उनसे जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए पुलिस व्यवस्था में नया बदलाव होने जा रहा है। गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से राज्य के सभी पुलिस थानों में बाल सहायता डेस्क शुरू करने की तैयारी है। इन डेस्क पर बच्चों और उनके अभिभावकों की शिकायतें सुनी जाएंगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को बाल सहायता डेस्क की व्यवस्था लागू कराने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से 5 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।

बच्चों के लिए थाने में अलग और सुलभ स्थान

अपराध अनुसंधान विभाग के कमजोर वर्ग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार बाल सहायता डेस्क को थाने में ऐसी जगह स्थापित किया जाएगा, जहां बच्चों और उनके अभिभावकों को पहुंचने में परेशानी न हो। इसे पुलिस थाने के लॉकअप से अलग रखा जाएगा, ताकि शिकायत लेकर आने वाले बच्चों के लिए अलग और सहज वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

डेस्क पर चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। यहां दिए गए संपर्क नंबर चौबीसों घंटे सक्रिय रखने का निर्देश है।

महिला पुलिसकर्मियों की भी होगी तैनाती

नाबालिग लड़कियों से संबंधित मामलों को ध्यान में रखते हुए बाल सहायता डेस्क पर महिला पुलिसकर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इससे बच्चियों और उनके अभिभावकों को अपनी शिकायत रखने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक बनेगा रिकॉर्ड

बाल सहायता डेस्क पर बच्चों या उनके अभिभावकों से मिलने वाली शिकायतों और सहायता के अनुरोध पर निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्राप्त शिकायत, की गई कार्रवाई और मामले से संबंधित आवश्यक जानकारी का उचित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी होगी।

वरीय अधिकारी करेंगे निगरानी

बाल सहायता डेस्क की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी डीएसपी और जिला स्तर के अन्य वरीय अधिकारी करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में शिकायतों पर समय से कार्रवाई हो और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

पांच साल में बाल अपराध के मामलों में बड़ा इजाफा

पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में बाल अपराध से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में 7,631 बालक और किशोरों के विरुद्ध 6,543 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 21 हजार से अधिक हो गई।

2020 से 2025 के बीच के आंकड़ों को देखें तो इस अवधि में 80 हजार से अधिक आपराधिक मामलों में बालक-किशोर शामिल रहे। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के विरुद्ध दर्ज मामलों में चोरी, डकैती, वाहन चोरी, दुष्कर्म, नशीले पदार्थों की तस्करी या सेवन, साइबर अपराध और समूह हिंसा जैसे मामले शामिल हैं।

बाल सहायता डेस्क केवल बच्चों के विरुद्ध अपराध तक सीमित नहीं रहेगा। किशोरों की ओर से किए गए आपराधिक मामलों में भी आवश्यक कार्रवाई और सहायता की व्यवस्था इसी प्रणाली के तहत की जाएगी।

थानों में महिला हेल्प डेस्क पहले से संचालित

राज्य के पुलिस थानों में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था पहले से लागू है। यहां महिलाओं की समस्याएं सुनी जाती हैं और उनके मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

बाद में महिला हेल्प डेस्क पर ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित शिकायतों और समस्याओं को भी सुनने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों के लिए थानों में एक अलग सहायता केंद्र उपलब्ध होगा, जहां शिकायत दर्ज कराने से लेकर कार्रवाई तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने का प्रयास किया जाएगा।

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