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Darbhanga News: स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा में आयुक्त के सख्त निर्देश, लेकिन जमीनी हकीकत पर भी निगरानी जरूरी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | दरभंगा प्रमंडल में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में दवा, डॉक्टर, सफाई, एंबुलेंस और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच के निर्देश दिए गए। वहीं जमीनी स्तर पर अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप इलाज को लेकर उठ रही शिकायतों की निगरानी जरूरी है।

दरभंगा, 21 सितंबर 2026। दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय की अध्यक्षता में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की प्रमंडल स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक के साथ दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के सिविल सर्जन, बीएमएसआईसीएल के अधिकारी तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अस्पतालों में दवा, जीवन रक्षक औषधि, चिकित्सकों की उपलब्धता, साफ-सफाई, एंबुलेंस, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के साथ-साथ निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

आयुक्त ने डीएमसीएच के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और विशेष रूप से जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता हर समय बनी रहनी चाहिए, ताकि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दवा के अभाव में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

बैठक में अस्पतालों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश दिए गए। सभी सिविल सर्जनों को अनुमंडलीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने तथा ड्यूटी रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया।

साफ-सफाई और मरीजों की मूलभूत सुविधाओं पर भी आयुक्त ने विशेष जोर दिया। अस्पताल परिसर, वार्ड, शौचालय, पेयजल स्थल और अन्य स्थानों पर नियमित सफाई, मरीजों के लिए साफ बेडशीट, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही एंबुलेंस सेवा को सक्रिय रखने की बात भी कही गई।

स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश सामने आए। आयुक्त ने पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के तहत निबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। इसके अलावा अस्पताल, नर्सिंग होम, जांच घर, एक्स-रे केंद्र सहित सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।

यहीं से स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा का एक दूसरा पहलू भी सामने आता है। बैठकों में दिशा-निर्देश देना प्रशासनिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है, लेकिन उन निर्देशों का वास्तविक असर अस्पतालों और मरीजों तक कितना पहुंच रहा है, इसकी जमीनी निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

दरभंगा प्रमंडल में स्वास्थ्य संस्थानों को लेकर समय-समय पर तरह-तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर निजी नर्सिंग होम, जांच केंद्र और कथित रूप से मानकों का पालन नहीं करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों को लेकर लोगों की शिकायतें प्रशासन के लिए गंभीर विषय हो सकती हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का आरोप है कि कुछ ऐसे संस्थान भी संचालित हैं, जिनकी वैधता, पंजीकरण और वहां इलाज करने वाले चिकित्सकों की योग्यता को लेकर स्पष्टता नहीं है।

कुछ लोगों की ओर से यह भी शिकायत की जाती रही है कि कथित रूप से कुछ निजी संस्थानों के बोर्ड, लेटरपैड या प्रचार सामग्री पर चिकित्सकों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि वास्तविक उपचार किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात कही जाती है। इसी तरह कुछ जगहों पर ऐसे लोगों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता और पंजीकरण की स्थिति को लेकर लोगों को जानकारी नहीं होती।

हालांकि ऐसी शिकायतों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग केवल कागजी निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक स्थिति की भी जांच करे। जिस डॉक्टर के नाम पर कोई संस्थान संचालित हो रहा है, क्या वह वास्तव में वहां मरीज देख रहे हैं, उनका पंजीकरण वैध है या नहीं, उनकी डिग्री किस मान्यता प्राप्त संस्थान से है, यह सब जांच का हिस्सा होना चाहिए।

विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में मरीज और उनके परिजन अक्सर डॉक्टर की डिग्री, पंजीकरण और संस्थान की वैधता की जांच स्वयं नहीं कर पाते। ऐसे में प्रशासनिक निगरानी की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। किसी व्यक्ति के पास वास्तव में कौन-सी चिकित्सकीय योग्यता है, वह किस पद्धति से उपचार करने के लिए अधिकृत है और उसका पंजीकरण संबंधित परिषद या सक्षम प्राधिकरण में है या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त ने आज की बैठक में निजी नर्सिंग होम, जांच घर, एक्स-रे केंद्र और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी पर भी अधिकारियों से जानकारी ली है। अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस समीक्षा के बाद जमीनी स्तर पर निरीक्षण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी होती है।

समस्तीपुर सहित पूरे प्रमंडल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों की अपेक्षा केवल बैठकों और निर्देशों तक सीमित नहीं है। मरीज और उनके परिजन चाहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर समय पर मिलें, जरूरी दवाएं उपलब्ध हों, साफ-सफाई रहे और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी नियमों का वास्तविक पालन हो।

आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देश अगर नियमित निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच और दोष मिलने पर कार्रवाई तक पहुंचते हैं, तो इसका सीधा लाभ आम मरीजों को मिल सकता है। लेकिन अगर समीक्षा बैठक के बाद निर्देश केवल फाइलों में दर्ज होकर रह जाएं और जमीनी स्तर पर उनकी निगरानी नहीं हो, तो व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव मुश्किल होगा।

Alam Ki Khabar स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े ऐसे मुद्दों को लगातार सामने लाता रहा है। सवाल किसी एक अधिकारी या किसी एक संस्थान का नहीं, बल्कि उन मरीजों की सुरक्षा और अधिकारों का है, जो इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल और नर्सिंग होम तक पहुंचते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर नियमित निरीक्षण के साथ-साथ शिकायतों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

आज की बैठक में आयुक्त ने बीएमएसआईसीएल के प्रबंधकों और अन्य पदाधिकारियों को संबंधित सिविल सर्जनों की बैठकों में उपस्थित रहने का भी सख्त निर्देश दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में विभिन्न स्तरों के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अब जरूरत इस बात की है कि समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों की अगली समीक्षा केवल रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी स्थिति के आधार पर भी हो। अस्पताल में दवा वास्तव में उपलब्ध है या नहीं, डॉक्टर वास्तव में ड्यूटी पर हैं या नहीं, एंबुलेंस चल रही है या नहीं, निजी संस्थान नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और मरीजों को वास्तविक सुविधा मिल रही है या नहीं—इन सवालों के जवाब मौके पर जाकर ही बेहतर तरीके से मिल सकते हैं।

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प्रमंडल के अस्पतालों में दवा, डॉक्टर, सफाई और मरीजों की सुविधाओं को लेकर प्रशासन के निर्देशों का असर अब जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है, इसकी निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण: आदेश से आगे निगरानी जरूरी

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठकें व्यवस्था को दिशा देने के लिए जरूरी हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता का पता सरकारी फाइलों से अधिक अस्पताल के वार्ड, ओपीडी, दवा काउंटर, जांच केंद्र और मरीजों के अनुभव से चलता है। इसलिए हर समीक्षा बैठक के बाद जमीनी सत्यापन की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। निजी स्वास्थ्य संस्थानों की वैधता, डॉक्टरों की योग्यता एवं पंजीकरण और मरीजों से संबंधित नियमों की जांच नियमित रूप से हो तो शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई संभव है। प्रशासन के निर्देश तभी प्रभावी माने जाएंगे जब उनका असर आम मरीज को अस्पताल की जमीन पर दिखाई दे।

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