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Bihar Drowning News: कर्मा-धर्मा पर्व के दौरान कई जिलों में डूबने के हादसे, कई लोगों की मौत और तलाश जारी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | कर्मा-धर्मा पर्व के दौरान बिहार के बांका, नालंदा और पटना समेत कई इलाकों में डूबने की घटनाएं सामने आईं। कई लोगों की मौत हुई जबकि कुछ की तलाश जारी है।

बिहार, 23 सितंबर 2026। Alam Ki Khabar: कर्मा-धर्मा पर्व के दौरान पूजा, स्नान और विसर्जन के लिए जलस्रोतों तक पहुंचे लोगों के बीच कई जगह हादसों ने उत्सव का माहौल गम में बदल दिया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से नदी और तालाब में डूबने की घटनाएं सामने आई हैं। बांका में तीन नाबालिग छात्राओं की जान चली गई, जबकि नालंदा में भी डूबने से मौत की घटनाएं सामने आईं। पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में मूर्ति विसर्जन के दौरान कई लोग गंगा में डूबने लगे। इनमें कुछ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि एक युवक का शव बरामद हुआ और कई लोगों की तलाश जारी बताई गई।

बांका में तीन सहेलियों की मौत

बांका जिले के शंभूगंज थाना क्षेत्र के शोभनाथपुर गांव में पर्व के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ। दीघिया पोखर में स्नान करने पहुंचीं तीन नाबालिग छात्राएं गहरे पानी में चली गईं। तीनों की उम्र करीब 12 से 13 वर्ष बताई गई है।

बताया गया कि स्नान के दौरान एक छात्रा गहरे पानी में फंस गई। उसे बचाने की कोशिश में उसकी दो सहेलियां भी पानी में उतर गईं। देखते ही देखते तीनों पानी में डूब गईं।

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और तीनों को पानी से बाहर निकाला। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। पर्व के मौके पर एक साथ तीन बच्चियों की मौत से गांव में मातम छा गया।

नालंदा में दोस्त को बचाने के दौरान हादसा

नालंदा जिले में भी कर्मा पूजा से जुड़ी गतिविधियों के दौरान डूबने की घटनाएं सामने आईं। नगरनौसा क्षेत्र के बलधा निवासी 19 वर्षीय दिलखुश कुमार तालाब के पास कर्मा पूजा के लिए मिट्टी लेने और स्नान करने गया था।

इसी दौरान एक साथी के गहरे पानी में फंसने की जानकारी सामने आई। उसे बचाने के लिए दिलखुश पानी में चला गया। साथी को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन दिलखुश खुद गहरे पानी में चला गया और डूब गया।

इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। स्थानीय स्तर पर उसकी तलाश की गई और घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई।

रहुई इलाके में भी दो लोगों की मौत की सूचना

नालंदा के रहुई क्षेत्र से भी गोइठवा नदी में स्नान के दौरान एक महिला और एक बच्ची की मौत की सूचना सामने आई है। पर्व के दौरान नदी में स्नान करने के दौरान दोनों के डूबने की जानकारी मिली।

इन घटनाओं के बाद स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। नदी और तालाब में उतरने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

पटना के बाढ़ अनुमंडल में गंगा में हादसे

पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में भी मूर्ति विसर्जन के दौरान गंगा में कई लोगों के डूबने की घटना सामने आई। बाढ़, अथमलगोला और बख्तियारपुर थाना क्षेत्रों से जुड़े घाटों पर कुल 11 लोगों के डूबने की सूचना सामने आई।

स्थानीय लोगों की मदद से चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक युवक का शव भी बरामद किया गया। वहीं छह लोगों की तलाश जारी बताई गई।

लापता लोगों की तलाश के लिए स्थानीय गोताखोरों के साथ बचाव दल की मदद ली जा रही है। नदी में पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण तलाश अभियान में चुनौती बनी हुई है।

मनेर में महिला और दो बच्चियां लापता

पटना जिले के मनेर क्षेत्र में भी गंगा घाट पर हादसा हुआ। हल्दी छपरा गंगा घाट पर बुधवार सुबह कर्मा-धर्मा पर्व से जुड़ी रस्म के दौरान एक महिला और दो बच्चियां गहरे पानी की ओर चली गईं।

तीनों के लापता होने के बाद घाट पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई। स्थानीय तैराकों और गोताखोरों ने नदी में उतरकर तलाश शुरू की। लापता लोगों की खोज के लिए स्थानीय स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया।

एक साथ कई घटनाओं से बढ़ी चिंता

कर्मा-धर्मा पर्व के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई घटनाओं ने नदी, तालाब और दूसरे जलस्रोतों के किनारे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में लोग पूजा, स्नान, मिट्टी लाने और विसर्जन जैसी गतिविधियों के लिए जलस्रोतों तक पहुंचते हैं।

ऐसे समय में गहरे पानी, फिसलन वाले घाट, तेज बहाव और भीड़ जैसी परिस्थितियां दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। खासकर बच्चों और कम उम्र के लोगों के लिए नदी और तालाब के किनारे अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।

बचाव अभियान में स्थानीय लोगों की भूमिका अहम

कई घटनाओं में स्थानीय लोगों ने तत्काल पानी में उतरकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार किसी डूबते व्यक्ति को बचाने के प्रयास में बिना पर्याप्त सुरक्षा के सीधे पानी में उतरना खुद जोखिम पैदा कर सकता है।

ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस, प्रशिक्षित गोताखोर या आपदा बचाव दल को सूचना देना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है। घाटों पर भीड़ होने की स्थिति में प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं हादसों को रोकने में मदद कर सकती हैं।

पर्व के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी

कर्मा-धर्मा जैसे पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन अवसरों पर परिवार और समुदाय के लोग एक साथ पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन जलस्रोतों के पास होने वाली गतिविधियों में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है।

बच्चों को अकेले नदी या तालाब में जाने से रोकना, गहरे पानी में प्रवेश नहीं करना, तेज बहाव वाले हिस्सों से दूरी बनाए रखना और विसर्जन के दौरान निर्धारित सुरक्षित स्थान का इस्तेमाल करना जरूरी है।

प्रशासन के लिए भी चुनौती

एक ही पर्व के दौरान कई जिलों से डूबने की घटनाएं सामने आना प्रशासन के लिए भी चुनौती है। ऐसे अवसरों पर भीड़ वाले घाटों की पहचान, पुलिस बल की तैनाती, गोताखोरों की उपलब्धता और आपदा बचाव दल को तैयार रखने जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

विशेष रूप से गंगा जैसी बड़ी नदियों में पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा किनारे से लगाना मुश्किल होता है। इसलिए घाट पर मौजूद लोगों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए और बच्चों को नदी के किनारे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

हादसों ने छोड़ा गहरा दर्द

पर्व की खुशियों के बीच हुई इन घटनाओं ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बांका में तीन छात्राओं की मौत, नालंदा में डूबने की घटनाएं और पटना के अलग-अलग क्षेत्रों में गंगा में लोगों के डूबने की घटनाओं ने एक बार फिर जलस्रोतों के पास सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत सामने रखी है।

फिलहाल अलग-अलग स्थानों पर राहत और तलाश से जुड़े प्रयास जारी हैं। जिन लोगों के लापता होने की सूचना है, उनकी तलाश पूरी होने के बाद ही घटनाओं की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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जलस्रोतों के किनारे सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि आम लोगों की भी है। पर्व के दौरान सावधानी, बच्चों पर निगरानी और सुरक्षित घाटों का इस्तेमाल करके ऐसे हादसों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

पर्व की खुशियों के साथ सुरक्षा भी जरूरी

कर्मा-धर्मा पर्व के दौरान सामने आई डूबने की घटनाएं बताती हैं कि धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों के पास प्रशासनिक निगरानी के साथ लोगों की व्यक्तिगत सतर्कता भी जरूरी है। एक छोटी सी सावधानी किसी परिवार को जिंदगी भर के दर्द से बचा सकती है।

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