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Bihar News:नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश से बिहार में सतर्कता, मुख्य सचिव ने 17 जिलों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश के बाद बिहार के संवेदनशील जिलों में प्रशासन अलर्ट, NDRF-SDRF को तैयार रहने के निर्देश।

पटना, 26 सितंबर 2026, आलम की खबर: बिहार में लगातार हो रही बारिश और नेपाल के तराई क्षेत्र में गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में तेज वर्षा को देखते हुए राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संभावित स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में अधिकारियों को राहत और बचाव से जुड़ी सभी तैयारियां पहले से पूरी रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ गंडक, बागमती और कोसी नदी तंत्र से जुड़े जिलों की स्थिति पर विशेष चर्चा की गई। प्रशासन को नदी के जलस्तर और प्रवाह पर लगातार नजर रखने के साथ-साथ निचले इलाकों, तटबंधों, नदी किनारे बसे गांवों, पुल-पुलियों और संपर्क मार्गों की निगरानी करने को कहा गया है।

बैठक में सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इन जिलों में मौसम और नदियों की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

नदी किनारे और निचले इलाकों पर विशेष नजर

प्रशासन को खास तौर पर उन इलाकों की पहचान कर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है, जहां नदी का पानी बढ़ने की स्थिति में आबादी प्रभावित हो सकती है। तटबंधों की स्थिति, कटाव की आशंका, नदी किनारे बसे गांवों और प्रमुख संपर्क मार्गों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कोसी नदी के जलस्तर में गिरावट दर्ज होने के बावजूद उसके आसपास के जिलों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जलस्तर में किसी भी तरह के बदलाव की स्थिति में तत्काल सूचना संबंधित स्तर तक पहुंचाई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर बचाव कार्य में देरी न हो।

NDRF और SDRF को तैयार रहने के निर्देश

संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल को सतर्क रहने को कहा गया है। संवेदनशील जिलों में नाव, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और अन्य जरूरी संसाधनों को पर्याप्त संख्या में तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन को यह भी कहा गया है कि किसी इलाके में पानी बढ़ने या लोगों के प्रभावित होने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके। इसके लिए उपलब्ध संसाधनों को स्टैंडबाय और एक्टिव मोड में रखने पर जोर दिया गया है।

माइकिंग से लोगों को दी जाएगी अग्रिम सूचना

संभावित रूप से प्रभावित इलाकों में माइकिंग के जरिए लोगों तक समय रहते जरूरी सूचना पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को स्थानीय स्तर पर लोगों को मौसम और नदी की स्थिति से संबंधित जानकारी देते रहने को कहा गया है।

जरूरत पड़ने पर प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए ऐसे स्थानों की पहचान और वहां जरूरी व्यवस्थाओं को पहले से तैयार रखने पर जोर दिया गया है, ताकि अचानक उत्पन्न होने वाली स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने में परेशानी नहीं हो।

विभागों के बीच लगातार समन्वय रखने पर जोर

समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस, जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने को कहा गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसी भी तरह की महत्वपूर्ण सूचना को एक-दूसरे तक तत्काल पहुंचाया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करने और आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने को कहा। प्रशासनिक अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को भी स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह सहित विभाग के अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे। अपर सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, संयुक्त सचिव अविनाश कुमार और उप सचिव अमन प्रीत सिंह भी बैठक में शामिल हुए।

अफवाह से बचने की अपील

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य माध्यमों से लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी दी जाए। आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में आवश्यक संसाधनों को पहले से तैयार रखा जा रहा है। किसी भी आपातकालीन सहायता की जरूरत होने पर आपदा प्रबंधन विभाग के टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।

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प्रशासनिक तैयारी का महत्व

बारिश और नदियों के जलस्तर में बदलाव के दौरान सबसे जरूरी व्यवस्था समय पर सूचना और त्वरित बचाव की होती है। संवेदनशील इलाकों की पहले से पहचान, संसाधनों की उपलब्धता और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से आपात स्थिति में राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकता है। ऐसे समय में आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। स्थानीय स्तर पर जारी प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से बचने से अनावश्यक परेशानी को कम किया जा सकता है।

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