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Bihar Crime News: नवादा में साइबर ठगी पर पुलिस का शिकंजा, एक साल में 234 गिरफ्तार; 398 मोबाइल जब्त

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | नवादा में साइबर अपराध के खिलाफ अभियान में 171 प्राथमिकी दर्ज कर 234 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी मात्रा में मोबाइल, सिम और नकदी जब्त।

नवादा, 27 सितंबर, आलम की खबर: बिहार के नवादा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले करीब एक वर्ष के दौरान पुलिस ने डिजिटल ठगी से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए 171 प्राथमिकी दर्ज की हैं और 234 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इस अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नकदी और वाहन बरामद किए गए हैं।

पुलिस के मुताबिक सितंबर 2025 से 14 सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान में 398 मोबाइल फोन और 150 सिम कार्ड जब्त किए गए। इसके अलावा 64 लाख रुपये नकद, नौ दोपहिया और चार चारपहिया वाहन भी पुलिस कार्रवाई में जब्त किए गए हैं।

साइबर ठगी की कमाई से जुड़ी संपत्ति पर भी कार्रवाई

पुलिस की कार्रवाई केवल आरोपितों की गिरफ्तारी और मोबाइल-सिम की बरामदगी तक सीमित नहीं रही। जांच के दौरान साइबर ठगी से अर्जित संपत्ति से जुड़े मामलों में सोना और चांदी भी जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

अभियान के दौरान पुलिस ने 406 ग्राम सोना और 1646 ग्राम चांदी बरामद की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि डिजिटल ठगी से हासिल रकम और उससे खरीदी गई संपत्ति का नेटवर्क किस तरह संचालित होता था।

फर्जी सिम नेटवर्क पर भी पुलिस की नजर

साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए जाने वाले फर्जी सिम कार्ड की सप्लाई को लेकर भी नवादा पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार अवैध तरीके से सिम की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल के मामले में तीन प्राथमिकी दर्ज की गईं।

इस कार्रवाई में पांच सिम एजेंटों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान इन एजेंटों के माध्यम से उपलब्ध कराए गए करीब 140 सिम कार्ड का पता चला है।

पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया कि इन सिम कार्ड के जरिए करीब 1.20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों से लेकर ठगी करने वाले आरोपितों तक नेटवर्क की पूरी कड़ी किस तरह जुड़ी हुई थी।

तकनीकी जांच के जरिए नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

साइबर अपराध के मामलों में पुलिस तकनीकी निगरानी को जांच का अहम हिस्सा बना रही है। जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच के अलावा संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों, संपर्कों और लेनदेन से जुड़े सुरागों को भी खंगाला जा रहा है।

पुलिस का उद्देश्य केवल सामने आए आरोपितों तक कार्रवाई सीमित रखना नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान करना है। फर्जी सिम की सप्लाई, बैंकिंग माध्यमों के इस्तेमाल और ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

स्कूल-कॉलेजों में भी चल रहा जागरूकता अभियान

पुलिस की कार्रवाई के साथ लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। ‘साइबर स्मार्ट मंगलवार’ अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत भवनों में लोगों को ऑनलाइन अपराध से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं।

इस दौरान लोगों को फर्जी लिंक, बैंकिंग फ्रॉड, संदिग्ध कॉल और डिजिटल ठगी के अलग-अलग तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है। लोगों को समझाया जा रहा है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर कई तरह के साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।

पोस्टर-बैनर के जरिए भी लोगों को किया जा रहा जागरूक

जिले के प्रमुख स्थानों पर बैनर और पोस्टर लगाकर भी साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेश लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य खास तौर पर उन लोगों को सतर्क करना है जो ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल भुगतान और इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई लिंक न खोलें और संदिग्ध वेबसाइट या संदेश से दूरी बनाए रखें। OTP, बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई है।

संदिग्ध गतिविधि की तुरंत दें सूचना

पुलिस के अनुसार साइबर अपराध में ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल पुलिस को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

अनजान नंबर से आए संदेश, संदिग्ध लिंक, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर की गई कॉल या किसी डिजिटल भुगतान को लेकर दबाव बनाने जैसी गतिविधियों में सावधानी बरतने की अपील की गई है।

नवादा में पिछले एक साल के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ फर्जी सिम की सप्लाई और ठगी से जुड़ी संपत्ति की भी जांच की जा रही है। अब पुलिस की नजर उन लोगों तक पहुंचने पर है जो इस पूरे नेटवर्क को पर्दे के पीछे से संचालित करने में शामिल हो सकते हैं।

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डिजिटल दौर में सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव की पहली कड़ी

साइबर अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है और ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के साथ आम लोगों की डिजिटल जागरूकता भी जरूरी है। अनजान लिंक से दूरी, OTP और बैंकिंग जानकारी की गोपनीयता तथा संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देकर साइबर ठगी के जोखिम को कम किया जा सकता है। स्कूल, कॉलेज और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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