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Muzaffarpur News: जर्जर सामुदायिक भवन में बड़ा हादसा, कोचिंग के दौरान छत का प्लास्टर गिरने से करीब एक दर्जन बच्चे घायल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मुजफ्फरपुर के हथौड़ी में जर्जर सामुदायिक भवन में चल रही निजी कोचिंग के दौरान छत का प्लास्टर गिरने से करीब एक दर्जन बच्चे घायल हो गए।

मुजफ्फरपुर, 1 अक्टूबर, आलम की खबर: हथौड़ी थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव में गुरुवार की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक जर्जर सामुदायिक भवन की छत का प्लास्टर अचानक नीचे आ गिरा। जिस समय हादसा हुआ, भवन के अंदर निजी कोचिंग चल रही थी और बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। अचानक मलबा गिरने से कई बच्चे इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब एक दर्जन बच्चे घायल हुए हैं। सभी को इलाज के लिए एसकेएमसीएच भेजे जाने की सूचना है।

हादसा हथौड़ी थाना क्षेत्र की सहिला बल्ली पंचायत के भवानीपुर गांव स्थित वार्ड संख्या तीन में हुआ। बताया जा रहा है कि जिस सामुदायिक भवन में बच्चों की कक्षा चल रही थी, उसकी हालत पहले से खराब थी। भवन के जर्जर होने के बावजूद वहां बच्चों को निजी तौर पर पढ़ाया जा रहा था।

जानकारी के अनुसार सुबह करीब 8:30 बजे बच्चे रोज की तरह पढ़ाई के लिए सामुदायिक भवन पहुंचे थे। कोचिंग चल रही थी, तभी अचानक छत के एक हिस्से का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर गया। प्लास्टर के साथ मलबा भी नीचे आ गया, जिसकी चपेट में कई बच्चे आ गए।

अचानक हुए हादसे से कोचिंग के अंदर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बच्चों के चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने तत्काल मलबे में फंसे या घायल बच्चों को बाहर निकालने में मदद की और उन्हें इलाज के लिए भेजने की व्यवस्था की।

प्रारंभिक सूचना में करीब एक दर्जन बच्चों के घायल होने की बात सामने आई है। चोट लगने के बाद बच्चों को श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी एसकेएमसीएच भेजा गया। अस्पताल में घायल बच्चों के पहुंचने की सूचना के बाद उनके परिजन भी वहां पहुंचने लगे। फिलहाल बच्चों की चोट और हालत से जुड़ी विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने आने का इंतजार है। एसकेएमसीएच में 24 घंटे आपातकालीन सेवा उपलब्ध है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सामुदायिक भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। भवन की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहा है कि आखिर खराब हालत वाले परिसर में बच्चों की नियमित कक्षा कैसे संचालित हो रही थी। हालांकि, भवन की वास्तविक स्थिति, उसके रखरखाव और वहां कोचिंग चलाने की अनुमति से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल भवन की सुरक्षा को लेकर खड़ा हुआ है। यदि भवन पहले से क्षतिग्रस्त था तो वहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराने से पहले उसकी सुरक्षा की जांच क्यों नहीं हुई, यह जांच का विषय है। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि भवन की जर्जर हालत के संबंध में स्थानीय स्तर पर पहले कोई शिकायत या सूचना संबंधित विभाग तक पहुंची थी या नहीं।

घटना की सूचना मिलने के बाद हथौड़ी थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। पुलिस यह भी देख रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और जिस भवन में कक्षा चल रही थी, उसकी स्थिति क्या थी।

फिलहाल प्राथमिकता घायल बच्चों के इलाज की है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में चिंता का माहौल है। घटना ने सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा और उनके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब जांच के बाद यह तस्वीर साफ होगी कि छत का प्लास्टर किन कारणों से गिरा, भवन की स्थिति कितनी खराब थी और वहां बच्चों की कक्षा संचालित करने की जिम्मेदारी किसकी थी। प्रशासनिक जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।

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