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Bihar News: स्कूली वाहनों पर बिहार सरकार की डिजिटल नजर, हर बस और चालक का बनेगा डाटाबेस

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में निजी स्कूलों के वाहनों और चालकों का डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा, फिटनेस और बीमा खत्म होने पर मिलेगा अलर्ट।

पटना, 4 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार में स्कूली बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन व्यवस्था को अब डिजिटल निगरानी से जोड़ा जा रहा है। निजी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों और उनके चालकों की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के लिए परिवहन विभाग ने विशेष पोर्टल तैयार कर लिया है। 

स्कूलों के सभी वाहनों की ऑनलाइन होगी जानकारी

नए सिस्टम के लागू होने के बाद राज्य के निजी स्कूलों को अपने यहां संचालित वाहनों का पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज कराना होगा। इसमें स्कूल बस से लेकर मिनी बस, वैन और बच्चों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले अन्य वाहनों को शामिल किया जाएगा।

वाहन के साथ उसके चालक की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इससे परिवहन विभाग के पास यह पता लगाने का एक केंद्रीकृत माध्यम होगा कि किस स्कूल में कौन-सा वाहन चल रहा है और उसे कौन चालक संचालित कर रहा है।

वाहन के दस्तावेजों पर भी रहेगी नजर

पोर्टल को सिर्फ वाहनों की सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रखा गया है। वाहन के फिटनेस प्रमाण-पत्र, बीमा, परमिट और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी इसमें दर्ज की जाएगी।

सबसे अहम व्यवस्था यह होगी कि किसी वाहन के फिटनेस प्रमाण-पत्र या बीमा की वैधता समाप्त होने पर विभाग और संबंधित स्कूल प्रबंधन को स्वतः सूचना मिल सकेगी। इससे दस्तावेजों की समय पर वैधता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बिना जरूरी कागजात वाले वाहन के संचालन पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई आसान होगी। 

वाहन और सारथी पोर्टल से जोड़ा जाएगा

परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों के लिए तैयार किए गए इस पोर्टल को अंतिम रूप दे दिया है। अब इसे वाहन और सारथी पोर्टल से इंटीग्रेट किया जाएगा। इसके बाद सिस्टम को लाइव किए जाने की तैयारी है।

इंटीग्रेशन के बाद वाहनों और चालकों से संबंधित जानकारी को मौजूदा परिवहन व्यवस्था से जोड़ना आसान होगा। इससे विभाग को अलग-अलग स्तर पर उपलब्ध जानकारी को एक जगह देखने और निगरानी करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

रियल टाइम निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है। विभाग के स्तर पर स्कूल वाहनों की निगरानी बेहतर होने के साथ ही स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।

किसी वाहन के दस्तावेज की वैधता समाप्त होने की जानकारी समय पर मिलने से स्कूल प्रबंधन को उसे अपडेट कराने का अवसर मिलेगा। वहीं नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों की पहचान करना भी विभाग के लिए आसान हो सकेगा।

बिहार में स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही नियम लागू हैं। राज्य के मोटर वाहन नियमों में स्कूली वाहनों के सुरक्षित संचालन और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। 

बच्चों की सुरक्षा पर तकनीक का इस्तेमाल

स्कूली वाहनों को लेकर सरकार की कोशिश अब केवल सड़क पर जांच तक सीमित नहीं रहने वाली है। वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था मजबूत होगी।

परिवहन विभाग की इस पहल से अभिभावकों के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों के बारे में विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से किसी घटना या शिकायत की स्थिति में संबंधित वाहन और चालक की जानकारी तक पहुंच आसान हो सकती है।

पोर्टल लाइव होने के बाद स्कूलों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

पोर्टल को लाइव किए जाने के बाद निजी स्कूलों के लिए अपने वाहनों और चालकों का विवरण दर्ज कराना महत्वपूर्ण होगा। स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी सही और अद्यतन रहे।

फिटनेस, बीमा और परमिट जैसे दस्तावेजों की वैधता बनाए रखना भी स्कूल परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा। इस पूरी प्रक्रिया से स्कूल वाहन संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने और लापरवाही की गुंजाइश कम करने की कोशिश की जा रही है।

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