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Patna Protest: दरोगा भर्ती मेंस परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थियों का आक्रोश, गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक मार्च की तैयारी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द होने के विरोध में अभ्यर्थियों का पटना में बड़ा प्रदर्शन, गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक मार्च की तैयारी।

पटना, 5 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार में 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों का आंदोलन अब राजधानी पटना की सड़कों तक पहुंच गया है। पिछले कई दिनों से गर्दनीबाग धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को बड़ा मार्च निकालने की तैयारी की है। करीब 10,789 सफल अभ्यर्थियों की ओर से गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक मार्च का ऐलान किया गया है।

अभ्यर्थियों के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। गांधी मैदान से लेकर डाकबंगला चौराहा और आगे के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है, जबकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। डाकबंगला चौराहे के आसपास लोहे की बैरिकेडिंग और कंटीले तार लगाए जाने की बात सामने आई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण चरणों को पार कर चुके हैं। प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने मेंस परीक्षा की तैयारी की। निर्धारित प्रक्रिया के तहत मेंस परीक्षा में भी शामिल हुए और इसके बाद शारीरिक परीक्षा की तैयारी में जुट गए। ऐसे समय में मेंस परीक्षा को रद्द किए जाने की सूचना ने हजारों अभ्यर्थियों के सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द करने संबंधी निर्णय को वापस लिया जाए और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है तो पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट तरीके से सामने रखा जाए, लेकिन उन सभी अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जाए, जिन्होंने मेहनत कर परीक्षा के विभिन्न चरणों में सफलता हासिल की है।

गर्दनीबाग में कई दिनों से चल रहे धरने के बाद अब अभ्यर्थियों ने आंदोलन को राजधानी के मुख्य मार्गों तक ले जाने का फैसला किया है। गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से मार्च शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद प्रदर्शनकारी लोक सेवक आवास की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे। इसी वजह से प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने के कारण आंदोलन को बड़ा रूप देने की जरूरत महसूस हुई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के कई चरण पूरे करने के बाद अचानक परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी मेहनत, समय और तैयारी पर बड़ा असर पड़ा है।

सबसे ज्यादा चिंता उन अभ्यर्थियों में है, जो मेंस परीक्षा के बाद शारीरिक परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। कई उम्मीदवारों ने शारीरिक दक्षता के लिए महीनों तक नियमित अभ्यास किया है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार बदलती स्थिति के कारण अभ्यर्थियों के बीच मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।

पटना पुलिस ने भी संभावित भीड़ को देखते हुए अपनी रणनीति तैयार की है। गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और लोक सेवक आवास की ओर जाने वाले मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी निर्धारित सुरक्षा घेरे को पार न करें और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

दरोगा भर्ती अभ्यर्थियों का यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है, जब बिहार में सरकारी नौकरियों से जुड़ी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार नाराजगी देखने को मिल रही है। इससे पहले भी राजधानी में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं।

अब सोमवार को होने वाले प्रस्तावित मार्च पर सभी की नजर है। एक तरफ हजारों अभ्यर्थी अपनी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और मेंस परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। ऐसे में गांधी मैदान से लोक सेवक आवास तक प्रस्तावित मार्च के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

अभ्यर्थियों की मांग फिलहाल स्पष्ट है—1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार हो, भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार स्थिति साफ करे और सफल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए।

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संपादकीय विचार:

भर्ती परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केवल एक तारीख या परिणाम नहीं होती, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, आर्थिक खर्च और भविष्य की उम्मीद जुड़ी होती है। यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन साथ ही उन अभ्यर्थियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए जिन्होंने निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा दी है।

दरोगा भर्ती के मामले में सरकार और संबंधित भर्ती आयोग को अभ्यर्थियों के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। परीक्षा रद्द करने के कारण, आगे की प्रक्रिया और संभावित समयसीमा को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने से असमंजस कम होगा। हजारों युवाओं का भविष्य इस भर्ती से जुड़ा है, इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्य अभ्यर्थियों के हितों की भी रक्षा हो।

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