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Bihar Land Dispute: बिहार में जमीन के काम में ऑफलाइन व्यवस्था पर रोक, शिकायत मिली तो अधिकारियों पर कार्रवाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में जमीन और राजस्व से जुड़े कामकाज में ऑनलाइन व्यवस्था लागू, ऑफलाइन प्रक्रिया की शिकायत पर कार्रवाई के निर्देश।

पटना, 6 अक्टूबर, आलम की खबर: बिहार में जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर सरकार ने व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए राजस्व न्यायालयों में ऑफलाइन कामकाज पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी स्तर पर ऑफलाइन तरीके से काम करने या कराने की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने नवपदस्थापित अपर समाहर्ताओं और भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व मामलों की स्थिति समझने और निर्धारित नियमों के अनुसार काम करने को कहा गया है।

राजस्व न्यायालयों का होगा फिजिकल वेरिफिकेशन

विभाग की ओर से सभी राजस्व न्यायालयों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का फैसला लिया गया है। निरीक्षण के दौरान न्यायालयों में चल रहे मुकदमों, लंबित मामलों, फाइलों और पुराने रिकॉर्ड की स्थिति की जांच की जाएगी।

इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि किन मामलों में लंबे समय से कार्रवाई लंबित है और उनकी मौजूदा स्थिति क्या है। रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिचौलियों की भूमिका खत्म करने पर जोर

जमीन से जुड़े कामकाज में बिचौलियों की भूमिका कम करना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऑनलाइन व्यवस्था को मजबूत करने के पीछे एक बड़ा उद्देश्य लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से राहत देना भी है।

नई व्यवस्था के तहत नागरिक अपने भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। इससे आवेदन और मामलों की स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है।

नए अधिकारियों को भूमि विवादों का अध्ययन करने का निर्देश

नवपदस्थापित अधिकारियों को अपने क्षेत्र के प्रमुख भूमि विवादों और महत्वपूर्ण राजस्व मामलों का अध्ययन करने के लिए कहा गया है। किसी मामले में कानूनी पेंच या नियमों को लेकर संशय होने पर बिना पूरी जानकारी के आदेश पारित नहीं करने की हिदायत दी गई है।

ऐसे मामलों में वरीय अधिकारियों से सलाह लेने के बाद निर्णय लेने को कहा गया है। इससे राजस्व मामलों में गलत आदेश की संभावना कम करने और कानूनी विवादों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

CO, अमीन और राजस्व कर्मचारियों के साथ होगी बैठक

अधिकारियों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंचल अधिकारियों, अमीन और राजस्व कर्मचारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया है। बैठकों में जमीन से जुड़े स्थानीय विवादों, लंबित मामलों और जनता की शिकायतों की समीक्षा की जाएगी।

अधिकारियों को सिर्फ कार्यालय में बैठकर काम करने के बजाय क्षेत्र में जाकर वास्तविक स्थिति देखने पर भी जोर दिया गया है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत कर जमीन और राजस्व से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेने को कहा गया है।

जनता की शिकायतों के समय पर समाधान पर जोर

विभाग ने आम लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने और भूमि विवादों से जुड़ी शिकायतों का तय समय-सीमा में समाधान करने पर भी जोर दिया है।

अधिकारियों को राजस्व कानून और नियमों का नियमित अध्ययन करने के साथ ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय प्रक्रियाओं की जानकारी रखने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को सही जानकारी और बेहतर सेवा मिल सके।

रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर रहेगी नजर

राजस्व न्यायालयों के फिजिकल निरीक्षण के दौरान लंबित फाइलों और रिकॉर्ड की स्थिति की भी जांच होगी। इससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अनावश्यक देरी या संभावित अनियमितता की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

डीसीएलआर स्तर पर भूमि विवादों और राजस्व मामलों के अध्ययन से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। डिजिटल रिकॉर्ड के बेहतर इस्तेमाल से जमीन से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

घर बैठे देख सकेंगे भूमि मामलों की स्थिति

ऑनलाइन व्यवस्था मजबूत होने का सीधा फायदा आम नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। लोग अपने भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों की स्थिति घर बैठे ऑनलाइन देख सकेंगे।

विभाग ने ऑफलाइन प्रक्रिया पर सख्ती करके यह स्पष्ट संकेत दिया है कि जमीन से जुड़े सरकारी कामकाज में डिजिटल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही बिचौलियों के हस्तक्षेप को कम करने और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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बिहार में जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में डिजिटल व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। भूमि विवाद और राजस्व विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों के लिए आलम की खबर से जुड़े रहें।

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