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Bihar Government: मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में सुस्ती पर सख्त हुई सरकार, पूरे बिहार से मांगी गई रिपोर्ट

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की धीमी रफ्तार पर बिहार सरकार ने सख्ती बढ़ाई है। राज्यभर से लंबित योजनाओं, खर्च और कार्य प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

पटना, 6 अक्टूबर, आलम की खबर: बिहार में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत स्वीकृत विकास कार्यों को समय पर पूरा कराने के लिए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से अधूरी पड़ी योजनाओं और स्वीकृत राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं होने की शिकायतों के बीच योजना एवं विकास विभाग ने राज्यभर से योजनाओं की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि स्वीकृति मिलने के बाद भी कई योजनाएं वर्षों तक जमीन पर क्यों नहीं उतर पाईं।

सरकार की नजर अब लंबित योजनाओं पर

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों और विधान पार्षदों की अनुशंसा पर स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, भवन, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक जरूरतों से जुड़े कार्यों को स्वीकृति दी जाती है। सरकार चाहती है कि स्वीकृत योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे।

विभागीय स्तर पर तैयार आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 तक 17वीं विधानसभा के कार्यकाल यानी 2021-22 से 2025-26 के दौरान स्वीकृत विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि में करीब 71.40 प्रतिशत खर्च किया जा चुका था। वहीं लगभग 20 प्रतिशत योजनाएं अलग-अलग स्तर पर निर्माण या क्रियान्वयन की प्रक्रिया में थीं।

आठ साल पुरानी योजनाओं पर भी नजर

समीक्षा का सबसे अहम पहलू उन योजनाओं को लेकर है, जिनकी राशि कई वर्ष पहले स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हुआ। विभागीय स्तर पर ऐसी योजनाओं की भी जानकारी सामने आई है, जिनकी स्वीकृति को करीब आठ वर्ष तक का समय बीत चुका है।

अब सरकार संबंधित क्षेत्रों से यह जानकारी लेने की तैयारी में है कि योजना की वर्तमान स्थिति क्या है, कितनी राशि खर्च हुई, कितना काम बाकी है और देरी की वास्तविक वजह क्या है। इससे लंबे समय से फाइलों में अटकी योजनाओं की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सीएजी रिपोर्ट में भी उठे थे सवाल

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के वित्तीय प्रबंधन और क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की मार्च 2023 की रिपोर्ट में भी सवाल उठाए गए थे।

रिपोर्ट में नमूना जांच के लिए शामिल किए गए 13 प्रमंडलों में उपलब्ध निधि के 28 से 59 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल नहीं होने की बात सामने आई थी। बड़ी राशि पर्सनल लेजर अकाउंट में अव्यवहृत शेष के तौर पर पड़ी रहने की स्थिति भी रिपोर्ट में सामने आई थी।

सरकार अब यह देखना चाहती है कि ऐसी स्थिति दोबारा न बने और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए समय पर हो।

विधायकों और विधान पार्षदों की अनुशंसा से होती हैं योजनाएं

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिहार विधानमंडल में 243 विधायक और 75 विधान पार्षद हैं। दोनों सदनों को मिलाकर कुल 318 सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास योजनाओं की अनुशंसा करते हैं।

वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रत्येक विधायक के क्षेत्र के लिए वार्षिक आवंटन में भी वृद्धि की गई थी। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को पूरा कराना था।

कई बड़े शहरों में चल रहे विकास कार्य

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, छपरा, सीवान, सासाराम, बेतिया, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, नवादा, औरंगाबाद, बांका, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर, जमुई और लखीसराय समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में विकास कार्य चयनित किए गए हैं।

अब इन क्षेत्रों में स्वीकृत योजनाओं की प्रगति की जानकारी को भी समीक्षा के दायरे में लाया जा रहा है।

क्यों अटकी योजनाएं, सरकार तलाशेगी जवाब

सरकार की इस कवायद का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि योजनाओं में देरी की वजहों की पहचान करना भी है। समीक्षा के दौरान यह देखा जा सकता है कि किसी योजना में प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी प्रक्रिया, जमीन, विभागीय समन्वय, राशि के उपयोग या किसी अन्य कारण से काम रुका हुआ है।

लंबे समय से लंबित योजनाओं के मामले में संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की संभावना भी है। समीक्षा के बाद सरकार जरूरत के मुताबिक योजनाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

जनता को मिल सकेगा स्वीकृत योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना का सीधा संबंध स्थानीय विकास और आम लोगों की सुविधाओं से है। ऐसे में योजनाओं को लंबे समय तक लंबित रखने से न केवल सरकारी धन का उपयोग प्रभावित होता है, बल्कि उन लोगों को भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाती, जिनके लिए योजना स्वीकृत की गई है।

सरकार की ताजा पहल के बाद अब वर्षों से लंबित योजनाओं की फाइलों की दोबारा पड़ताल होने की उम्मीद है। आने वाले समय में समीक्षा के आधार पर काम की रफ्तार बढ़ाने और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

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बिहार में जमीन विवाद से जुड़े मामलों के निपटारे को लेकर सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था और राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर भी सख्ती बढ़ाई है। सरकार का जोर पारदर्शिता, जवाबदेही और लोगों को घर बैठे सेवाएं उपलब्ध कराने पर है।

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