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Bihar Corruption News: आरा में 10 हजार की रिश्वत लेते डाक सहायक गिरफ्तार, उपमंडलीय निरीक्षक पर भी केस

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | आरा में CBI ने रिश्वत मामले में डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को 10 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया है। उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार भी मामले में आरोपित हैं और उनकी तलाश जारी है।

आरा, 6 अक्टूबर, आलम की खबर: भोजपुर के आरा में डाक विभाग से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कार्रवाई की है। पटना स्थित CBI की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को गिरफ्तार किया है। मामले में उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार को भी आरोपित बनाया गया है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है।

तीन महीने से लंबित था वेतन

मामला छोटकी सासाराम स्थित उप डाकघर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता संदीप कुमार ने एक जुलाई 2026 को शाखा डाकपाल के पद पर योगदान किया था। आरोप है कि योगदान के बाद उनका करीब तीन महीने का वेतन लंबित था।

शिकायत के मुताबिक, लंबित वेतन जारी कराने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की गई। कथित तौर पर रिश्वत नहीं देने पर वेतन जारी नहीं होने की बात कही गई थी। इसी के बाद शिकायतकर्ता ने पटना CBI की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई से संपर्क किया।

शिकायत के बाद CBI ने बनाया ट्रैप

शिकायत मिलने के बाद CBI अधिकारियों ने पहले मामले से जुड़े आरोपों का सत्यापन किया। इसके बाद रिश्वत की रकम लेते आरोपित को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई गई।

रविवार रात CBI की टीम ने आरा प्रधान डाकघर के आवासीय परिसर में कार्रवाई की। इसी दौरान पुरुषोत्तम कुमार को कथित तौर पर 10 हजार रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया गया।

पुरुषोत्तम की भूमिका जांच के घेरे में

गिरफ्तार पुरुषोत्तम कुमार चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर-तापा जलपुरा गांव का रहने वाला बताया गया है। वह पहले आरा उपमंडलीय कार्यालय में ओवरसियर के पद पर काम कर चुका है।

वर्तमान में उसकी तैनाती अरवल उपमंडलीय कार्यालय में डाक सहायक के रूप में थी। जानकारी के अनुसार, पदोन्नति के बाद उसका स्थानांतरण भी हाल में हुआ था। इसके बावजूद CBI ने आरा स्थित उसके आवास पर ट्रैप कार्रवाई की।

दूसरे आरोपित की तलाश

इस मामले में उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार को भी आरोपित बनाया गया है। CBI टीम ने उसकी गिरफ्तारी के लिए पटना में छापेमारी की। बताया गया कि टीम बेऊर क्षेत्र के पास स्थित एक आवासीय परिसर तक पहुंची, लेकिन गौरव कुमार वहां नहीं मिला।

जांच एजेंसी अब उसकी तलाश कर रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित रिश्वत की मांग और सरकारी प्रक्रिया में दोनों आरोपितों की भूमिका क्या थी।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए गए

CBI की जांच में मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी अब डिजिटल सामग्री और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि रिश्वत की मांग कैसे की गई, दोनों आरोपितों के बीच किस तरह का संपर्क था और लंबित सरकारी कार्य को लेकर किस स्तर पर निर्णय लिया जाना था।

चार अक्टूबर को दर्ज हुई FIR

CBI की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई ने इस मामले में चार अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए ट्रैप कार्रवाई की गई।

मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

अब आगे क्या होगा?

गिरफ्तार डाक सहायक को पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया। उसे CBI की विशेष अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

वहीं, फरार बताए जा रहे उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। CBI यह भी जांच कर रही है कि मामला केवल इसी कथित रिश्वत मांग तक सीमित है या इसके पीछे डाक विभाग में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका भी सामने आती है।

सरकारी काम के बदले रिश्वत के आरोप ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच और अदालत की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में आगे कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।

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