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Bihar Health News: IGIMS की स्टडी में स्टेंट मरीजों के लिए नई उम्मीद, तीन दवाओं से 84.8% का LDL 70 से नीचे

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | IGIMS की स्टडी में स्टेंट के बाद भी बढ़े LDL को नियंत्रित करने में तीन दवाओं के संयोजन का बेहतर परिणाम सामने आया। 48 हफ्ते में 84.8% मरीजों का LDL 70 से नीचे पहुंचा।

पटना, 6 अक्टूबर आलम की खबर: हार्ट अटैक के बाद स्टेंट लगने के बाद मरीजों को सिर्फ ब्लॉकेज खुलने से राहत नहीं मिलती, बल्कि आगे भी कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना बेहद अहम होता है। इसी चुनौती को लेकर पटना के आईजीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभाग में किए गए अध्ययन में तीन दवाओं के संयोजन से LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को लक्ष्य स्तर तक लाने के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। अध्ययन में 48 सप्ताह के बाद 84.8 प्रतिशत मरीजों का LDL 70 mg/dL से नीचे पाया गया।

स्टेंट के बाद भी क्यों जरूरी है LDL नियंत्रण

स्टेंट किसी संकरी या बंद धमनी में रक्त का प्रवाह बेहतर करने में मदद करता है, लेकिन इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म नहीं होती। यही वजह है कि हार्ट अटैक या कोरोनरी एंजियोप्लास्टी के बाद मरीजों में LDL को नियंत्रित रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।

अध्ययन में ऐसे मरीजों पर ध्यान दिया गया, जिनकी कोरोनरी एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी, लेकिन दवा लेने के बावजूद उनका LDL 70 mg/dL से ऊपर बना हुआ था। ऐसे मरीजों में आगे हृदय संबंधी जोखिम को कम करने के लिए कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है।

322 मरीजों पर हुआ अध्ययन

अध्ययन में कुल 322 मरीज शामिल किए गए। ये वे मरीज थे जिनकी कोरोनरी एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी और वे रोसुवास्टेटिन 40 एमजी तथा एजेटिमाइव की स्थिर खुराक ले रहे थे। इसके बावजूद उनका LDL 70 mg/dL से अधिक था।

ऐसे मरीजों के उपचार में तीसरी दवा के तौर पर बेम्पेडोइक एसिड को जोड़ा गया। मरीजों की 12, 24 और 48 सप्ताह पर जांच की गई, ताकि यह देखा जा सके कि अतिरिक्त दवा से LDL के स्तर में कितना बदलाव आता है।

48 सप्ताह में 84.8 प्रतिशत मरीज लक्ष्य के नीचे

अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआत में मरीजों का औसत LDL करीब 82.1 mg/dL था। 12 सप्ताह के बाद यह औसतन 57.6 mg/dL तक पहुंच गया, यानी शुरुआती स्तर की तुलना में लगभग 29.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

सबसे महत्वपूर्ण परिणाम 48 सप्ताह के फॉलोअप में सामने आया। इस अवधि के बाद 84.8 प्रतिशत मरीजों का LDL 70 mg/dL से नीचे पहुंच गया। वहीं 69.6 प्रतिशत मरीजों ने 55 mg/dL से नीचे का स्तर हासिल किया।

सूजन के मार्कर में भी कमी

अध्ययन में केवल LDL पर ही असर नहीं देखा गया, बल्कि हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन यानी hs-CRP में भी महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। यह शरीर में सूजन से जुड़ा एक मार्कर है।

हालांकि, अध्ययन के दौरान यूरिक एसिड में वृद्धि भी देखी गई। तीन मरीजों में क्लिनिकल गाउट की समस्या सामने आई। अध्ययन में मांसपेशियों से जुड़ी गंभीर समस्या, नई डायबिटीज या लिवर-किडनी से संबंधित नुकसान दर्ज नहीं किया गया।

तीन दवाओं का संयोजन क्यों महत्वपूर्ण

इस अध्ययन का प्रमुख पहलू यह है कि जिन मरीजों में रोसुवास्टेटिन और एजेटिमाइव के बावजूद LDL लक्ष्य तक नहीं पहुंच रहा था, उनमें बेम्पेडोइक एसिड जोड़ने के बाद बेहतर नियंत्रण देखा गया।

यानी ऐसे मरीजों के लिए उपचार की रणनीति में एक अतिरिक्त विकल्प सामने आया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्टेंट मरीज को तीनों दवाएं लेनी चाहिए। दवा की जरूरत, खुराक और संयोजन मरीज की उम्र, बीमारी, अन्य दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।

महंगे इलाज के बीच कम लागत वाले विकल्प की चर्चा

स्टेंट के बाद LDL को लक्ष्य तक लाने के लिए कुछ मरीजों में अतिरिक्त लिपिड-लोअरिंग उपचार की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे उपचारों की लागत मरीजों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

आईजीआईएमएस के अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि पहले से चल रही दो दवाओं में बेम्पेडोइक एसिड जोड़ने से LDL नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार हासिल किया जा सकता है। हालांकि किसी भी दवा की वास्तविक लागत ब्रांड, खुराक और अस्पताल या बाजार में उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इसे सीधे तौर पर हर मरीज के लिए सस्ता विकल्प मानने से पहले चिकित्सकीय और आर्थिक मूल्यांकन जरूरी होगा।

अध्ययन का मतलब क्या है मरीजों के लिए

इस अध्ययन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि स्टेंट लगने के बाद इलाज को समाप्त नहीं मानना चाहिए। नियमित फॉलोअप, LDL की जांच और डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का पालन लंबे समय तक जरूरी हो सकता है।

अगर किसी मरीज का LDL निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है, तो खुद से दवा बदलने या कोई नई दवा शुरू करने के बजाय कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। बेम्पेडोइक एसिड से यूरिक एसिड बढ़ने जैसी संभावित समस्याओं को देखते हुए डॉक्टर की निगरानी महत्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा

अध्ययन के परिणाम स्टेंट के बाद LDL नियंत्रण की रणनीति में अतिरिक्त दवा के संभावित लाभ की ओर इशारा करते हैं। हालांकि किसी अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में इसे नियमित उपचार विकल्प के रूप में अपनाने का फैसला अलग प्रक्रिया के तहत होगा।

आईजीआईएमएस की इस स्टडी से सामने आए आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि जिन मरीजों में सामान्य दवा संयोजन के बावजूद LDL नियंत्रित नहीं हो रहा था, उनमें उपचार को आगे बढ़ाने से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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हार्ट से जुड़ी बीमारी में समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह और नियमित दवा के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण पर ध्यान देना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों के लिए Alam Ki Khabar से जुड़े रहें।

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