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Bihar News: पंचायत सरकार भवन में रोज देनी होगी हाजिरी, बायोमीट्रिक रिकॉर्ड से जुड़ेगा वेतन

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में पंचायत स्तर के कर्मचारियों की पंचायत सरकार भवन में रोजाना उपस्थिति अनिवार्य होगी, बायोमीट्रिक हाजिरी के आधार पर वेतन भुगतान और गैरहाजिरी पर कार्रवाई होगी।

पटना, 7 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार में पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को सख्त किया जा रहा है। पंचायत सरकार भवनों में तैनात कर्मियों को अब नियमित रूप से अपने निर्धारित कार्यालय में मौजूद रहना होगा। उनकी उपस्थिति बायोमीट्रिक सिस्टम से दर्ज करने और इसी रिकॉर्ड को वेतन भुगतान से जोड़ने की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार का जोर केवल कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज कराने पर नहीं, बल्कि पंचायत सरकार भवन से ग्रामीणों को नियमित सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने पर है। गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

मुख्य सचिव ने दिए निगरानी के निर्देश

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पंचायत सरकार भवनों में पंचायत स्तर के कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। संबंधित कर्मियों से कहा गया है कि वे रोज पंचायत सरकार भवन में उपस्थित रहकर अपने विभागीय कार्यों का निष्पादन करें।

निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमित या लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। बायोमीट्रिक हाजिरी के रिकॉर्ड को वेतन भुगतान की प्रक्रिया से जोड़ने का उद्देश्य कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना है।

कई विभागों के कर्मचारी दायरे में

पंचायत सरकार भवनों में काम करने वाले अलग-अलग विभागों के कर्मचारी इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के राजस्व कर्मचारी, पंचायती राज विभाग के पंचायत सचिव, ग्राम कचहरी सचिव, तकनीकी सहायक, लेखापाल और कार्यपालक सहायक शामिल हैं।

ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत रोजगार सेवक, आवास सहायक और स्वच्छता पर्यवेक्षक भी पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मियों में शामिल हैं। कृषि विभाग के किसान सलाहकार और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के विकास मित्रों को भी इस व्यवस्था के तहत काम करना होगा।

ग्रामीणों को कार्यालय के चक्कर से मिलेगी राहत

पंचायत सरकार भवनों में कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी का सीधा लाभ ग्रामीणों को मिलने की उम्मीद है। कई सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्तर के कार्यों के लिए ग्रामीणों को संबंधित कर्मचारी से संपर्क करना पड़ता है।

कर्मचारी अपने निर्धारित स्थान पर उपलब्ध रहेंगे तो लोगों को छोटे-छोटे सरकारी काम के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। सरकार का उद्देश्य पंचायत सरकार भवन को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं का प्रभावी केंद्र बनाना है।

पंचायत सरकार भवन को मिनी सचिवालय बनाने की योजना

सरकार ने पंचायत सरकार भवनों को गांवों के 'मिनी सचिवालय' के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की है। इन भवनों में पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए कार्यालय की व्यवस्था के साथ पंचायत एवं स्थायी समितियों की बैठक के लिए हॉल भी बनाए गए हैं।

ग्रामीणों के लिए स्वागत कक्ष और विभिन्न सरकारी सेवाओं से जुड़े सेवा केंद्रों की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे में भवनों में कर्मचारियों की उपलब्धता को इस पूरी व्यवस्था की अहम कड़ी माना जा रहा है।

3215 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण

राज्य में अब तक 3215 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई है। सरकार की कोशिश है कि इन भवनों का इस्तेमाल केवल सरकारी ढांचे के रूप में न होकर ग्रामीणों को वास्तविक सेवाएं देने के केंद्र के तौर पर हो।

इसके लिए भवन में संबंधित कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी है। बायोमीट्रिक उपस्थिति लागू होने के बाद विभागों के पास यह रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा कि निर्धारित कर्मचारी कब और कितनी देर कार्यालय में मौजूद रहे।

हाजिरी से आगे सेवा की गुणवत्ता पर भी नजर

नई व्यवस्था से कर्मचारियों की उपस्थिति पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि पंचायत सरकार भवनों की सफलता केवल बायोमीट्रिक हाजिरी तक सीमित नहीं होगी। असली असर तब दिखाई देगा जब ग्रामीणों को प्रमाणपत्र, राजस्व, आवास, रोजगार, कृषि और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए समय पर संबंधित कर्मचारी उपलब्ध होंगे।

सरकार की ओर से उपस्थिति, निगरानी और वेतन भुगतान को एक व्यवस्था से जोड़ने का संदेश साफ है कि पंचायत स्तर पर ड्यूटी में लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायत सरकार भवनों में कर्मचारियों की मौजूदगी के साथ ग्रामीण सेवाओं की गति में कितना सुधार आता है।

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