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Samastipur News: टीबी-मुक्त भारत अभियान को लेकर समस्तीपुर में बैठक, डीसीसी ने दिए कई निर्देश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | टीबी-मुक्त भारत अभियान को लेकर समाहरणालय में बैठक हुई, जिसमें समय पर जांच, उपचार, पोषण सहायता और मरीजों की निगरानी पर जोर दिया गया।

समस्तीपुर, 8 अक्टूबर आलम की खबर: टीबी-मुक्त भारत अभियान को जिले में और प्रभावी बनाने को लेकर समस्तीपुर प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर गतिविधियों को तेज करने पर जोर दिया है। बुधवार को समाहरणालय सभागार में उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में टीबी की पहचान से लेकर जांच, उपचार, मरीजों की निगरानी और पोषण सहायता तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की गई।

बैठक में अधिकारियों ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में चल रहे कार्यों की स्थिति पर चर्चा की। उप विकास आयुक्त ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। इसे जनभागीदारी से जोड़कर अभियान का स्वरूप देना होगा, ताकि अधिक से अधिक संभावित मरीज समय पर जांच और उपचार तक पहुंच सकें।

उन्होंने संभावित टीबी मरीजों की पहचान में तेजी लाने का निर्देश दिया। जांच में बीमारी की पुष्टि होने के बाद उपचार तत्काल शुरू कराने और उपचाररत मरीजों की लगातार निगरानी करने को कहा गया। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि मरीज निर्धारित अवधि तक दवा का पूरा कोर्स लें और बीच में इलाज न छोड़ें।

बैठक में मरीजों को इलाज के साथ पोषण एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी विशेष चर्चा हुई। उप विकास आयुक्त ने निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने सक्षम लोगों, सामाजिक संस्थाओं और संगठनों से टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।

प्रशासन का जोर केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है। टीबी के लक्षणों को लेकर आम लोगों को जागरूक करने और बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत पर भी बैठक में चर्चा हुई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाने का निर्देश दिया गया, ताकि लोग लक्षण नजर आने पर जांच कराने में देरी न करें।

अधिकारियों को यह संदेश लोगों तक पहुंचाने को कहा गया कि टीबी इलाज योग्य बीमारी है। समय पर बीमारी की पहचान और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार से मरीज स्वस्थ हो सकता है। बीमारी को लेकर सामाजिक कलंक कम करना भी टीबी उन्मूलन अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बैठक में जिले में टीबी मरीजों की जांच और उपचार की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग, पोषण संबंधी सहायता, फॉलोअप और जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति पर भी जानकारी ली गई।

सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी है, लगातार बुखार रहता है, रात में पसीना आता है, वजन कम हो रहा है, भूख कम लगती है या बलगम में खून दिखाई देता है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।

बैठक में डॉ. विशाल सहित स्वास्थ्य विभाग और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी रखे।

बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि टीबी-मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी से मजबूत करते हुए जिले में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

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टीबी के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता भी जरूरी

टीबी का इलाज उपलब्ध होने के बावजूद समय पर जांच और उपचार शुरू नहीं होने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए संभावित लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराना जरूरी है। सरकारी योजनाओं के साथ समाज की भागीदारी भी मरीजों को उपचार पूरा करने और पोषण संबंधी सहायता दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है। टीबी-मुक्त भारत का लक्ष्य तभी मजबूत होगा, जब बीमारी के इलाज के साथ उसके प्रति फैली भ्रांतियों और सामाजिक संकोच को भी दूर किया जाए।

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