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Bihar News: दानापुर में 20 हजार रिश्वत लेते पशुपालन विभाग का क्लर्क गिरफ्तार, 6 लाख के GPF भुगतान का था मामला

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | दानापुर में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पशुपालन विभाग के क्लर्क को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोपी पर 6 लाख रुपये के GPF भुगतान के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।

दानापुर, 8 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार में सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वालों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में दानापुर में पशुपालन विभाग के एक निम्नवर्गीय लिपिक को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान विजय कुमार के रूप में हुई है। आरोप है कि वह करीब 6 लाख रुपये के GPF भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग कर रहा था।

मामला पटना के नौबतपुर निवासी राजेंद्र प्रसाद की शिकायत से जुड़ा है। राजेंद्र प्रसाद ने दानापुर स्थित पशुपालन कार्यालय में तैनात लिपिक विजय कुमार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि GPF की करीब 6 लाख रुपये की राशि के भुगतान के लिए आरोपी कर्मचारी की ओर से पैसे की मांग की जा रही थी।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लिया। आरोपों की पुष्टि के लिए शिकायत की जांच और सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद आरोपी को पकड़ने की योजना तैयार की गई।

डीएसपी आसिफ इकबाल के नेतृत्व में धावा दल का गठन किया गया। टीम ने आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार करने के लिए पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा। तय योजना के तहत निगरानी टीम दानापुर पहुंची और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी गई।

बताया गया कि दानापुर एम्स गोलंबर के पास स्थित पान दुकान के आसपास आरोपी शिकायतकर्ता से रकम लेने पहुंचा था। जैसे ही विजय कुमार ने 20 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, निगरानी की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।

निगरानी की अचानक कार्रवाई से मौके पर कुछ देर के लिए अफरातफरी की स्थिति बन गई। टीम आरोपी क्लर्क को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए साथ ले गई। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि शिकायतकर्ता की करीब 6 लाख रुपये की GPF राशि के भुगतान जैसे जरूरी वित्तीय मामले को रिश्वत की मांग से जोड़ने का आरोप सामने आया। सरकारी कर्मचारियों से जुड़े GPF और अन्य भुगतान आम तौर पर सेवा संबंधी महत्वपूर्ण मामलों में आते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी या भुगतान के बदले पैसे की मांग से संबंधित शिकायतों पर निगरानी विभाग कार्रवाई करता रहा है।

निगरानी की कार्रवाई के बाद अब आरोपी लिपिक के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पूछताछ और आवश्यक कार्रवाई पूरी होने के बाद उसे निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में आगे जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि रिश्वत की मांग और भुगतान से जुड़े पूरे घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई से सरकारी महकमों में लगातार सख्ती का संदेश जा रहा है। रिश्वत लेते पकड़े जाने की कार्रवाई में शिकायत के सत्यापन के बाद जाल बिछाकर आरोपी को रकम स्वीकार करते समय गिरफ्तार किया जाता है। दानापुर की यह कार्रवाई भी इसी प्रक्रिया के तहत हुई है।

फिलहाल निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद आरोपी विजय कुमार कानूनी जांच के घेरे में है। GPF भुगतान से जुड़े इस मामले में अब निगरानी की आगे की कार्रवाई और न्यायालय में होने वाली प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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सरकारी व्यवस्था में किसी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा नागरिक के जरूरी भुगतान अथवा काम के बदले रिश्वत मांगना व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है। GPF जैसी राशि कर्मचारी की मेहनत और सेवा से जुड़ी होती है। ऐसे मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया और समय पर भुगतान जरूरी है। निगरानी की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई का रास्ता खुला है। सरकारी कार्यालयों में काम कराने पहुंचे लोगों को भी रिश्वत की मांग होने पर संबंधित सक्षम एजेंसी को शिकायत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

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