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Bihar News: किशनगंज में पशु तस्करी और अवैध वसूली के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों पर FIR, पहले हो चुके हैं निलंबित

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | किशनगंज में मवेशियों से लदे ट्रक को कथित अवैध वसूली के बाद छोड़ने के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज की गई है। एसपी संतोष कुमार ने तीनों को पहले ही निलंबित कर दिया था।

किशनगंज, 11 अक्टूबर 2026: बिहार के किशनगंज जिले में पशु तस्करी से जुड़े एक मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मवेशियों से लदे ट्रक को कथित तौर पर अवैध वसूली के बाद छोड़ने के आरोप में तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार पहले ही तीनों को निलंबित कर चुके हैं। अब प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच का दायरा पशु तस्करों और कथित एंट्री माफिया तक भी पहुंच गया है।

पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर कानूनी जांच के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

किन तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR?

इस मामले में पाठामारी थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष गंगा प्रसाद गुप्ता, सहायक अवर निरीक्षक सुनील कुमार और चालक सिपाही पवन कुमार के खिलाफ ठाकुरगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

आरोप है कि तीनों पुलिसकर्मियों ने पशु तस्करों और कथित एंट्री माफिया के साथ मिलीभगत कर मवेशियों से लदे एक ट्रक को छोड़ दिया था। इस दौरान अवैध रूप से पैसे लेने का भी आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने मामले में पशु तस्करों, कथित लाइनरों और अन्य एंट्री माफिया को भी नामजद किया है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ट्रक को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही।

17-18 अगस्त की रात का है मामला

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह मामला 17 और 18 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि का है। घटना ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में टोल प्लाजा के आसपास की बताई गई है।

बताया जाता है कि पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि तत्कालीन पाठामारी थानाध्यक्ष और दो अन्य पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर पशु तस्करों तथा एंट्री माफिया के साथ संपर्क में रहते हुए मवेशियों से लदे ट्रक को छोड़ दिया।

सूचना मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। पुलिस अधिकारियों ने घटनाक्रम और संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण की पड़ताल की। जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभागीय कार्रवाई की गई और बाद में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मवेशियों से लदे ट्रक को रोकने, उसके कागजात और मवेशियों से संबंधित आवश्यक विवरणों की जांच करने तथा उसे छोड़ने के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

SDPO-2 की जांच के बाद हुई थी निलंबन की कार्रवाई

मामले की जांच किशनगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-द्वितीय मनोज कुमार सिंह को सौंपी गई थी। जांच प्रतिवेदन में संबंधित पुलिसकर्मियों के आचरण को संदिग्ध बताते हुए कर्तव्य में लापरवाही और कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी संतोष कुमार ने 22 सितंबर 2026 को तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

अब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से कार्रवाई का अगला चरण शुरू हो गया है। पुलिस को आरोपों से संबंधित तथ्यों, संभावित लेनदेन और कथित तस्करी नेटवर्क की कड़ियों की जांच करनी होगी।

जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे कि आरोपित पुलिसकर्मियों और अन्य नामजद व्यक्तियों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित अवैध वसूली में किसकी क्या भूमिका रही।

एसपी का सख्त संदेश, अनियमितता बर्दाश्त नहीं

पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान लापरवाही, अनियमितता और भ्रष्ट आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिसकर्मियों को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और किसी भी परिस्थिति में ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देने का निर्देश दिया है।

पुलिस विभाग के लिए इस मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई अहम होगी। आरोप पुलिसकर्मियों पर लगे हैं, इसलिए जांच में तथ्यों और साक्ष्यों की भूमिका विशेष महत्व रखती है।

सीमांचल में पशु तस्करी पर निगरानी की चुनौती

किशनगंज सीमांचल का सीमावर्ती जिला है। यहां पशुओं के अवैध परिवहन और तस्करी से संबंधित मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पशु तस्करी से जुड़े मामलों में केवल वाहन को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होता। परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच, पशुओं की स्थिति का सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान भी जरूरी होती है।

ऐसे में यदि जांच के दौरान किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना विभाग की जवाबदेही का हिस्सा है।

अब जांच में किन बिंदुओं पर रहेगी नजर?

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में कई सवालों के जवाब तलाशे जाने हैं। इनमें कथित अवैध वसूली के साक्ष्य, ट्रक को छोड़ने की परिस्थितियां, संबंधित पुलिसकर्मियों और कथित एंट्री माफिया के बीच संपर्क तथा अन्य नामजद आरोपितों की भूमिका प्रमुख हैं।

पुलिस की जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि यह घटना किसी एक ट्रक तक सीमित थी या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी।

फिलहाल तीनों पुलिसकर्मी निलंबित हैं और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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