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Bihar News: बिहार के 5 जिलों में एयरपोर्ट और 9 में हेलीपोर्ट की योजना, छपरा समेत इन शहरों को मिलेगा फायदा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में संशोधित उड़ान योजना के तहत छपरा, किशनगंज, बेगूसराय, अररिया और गोपालगंज में एयरपोर्ट तथा नौ जिलों में हेलीपोर्ट बनाने की योजना को मंजूरी मिली है।

बिहार में हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार, छपरा समेत 5 जगहों पर एयरपोर्ट और 9 जिलों में हेलीपोर्ट की योजना


पटना: बिहार में छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 12 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधित उड़ान योजना के तहत पांच स्थानों पर हवाई अड्डों और नौ जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस योजना में सारण जिले का छपरा भी शामिल है। सरकार की पहल का मकसद क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाना और उन इलाकों तक विमानन सुविधाएं पहुंचाना है, जहां अभी हवाई यात्रा के विकल्प सीमित हैं। <Cite refs={["turn565141search0","turn565141search1"]}/>


इन पांच स्थानों पर प्रस्तावित हैं एयरपोर्ट


प्रस्ताव के तहत जिन पांच जगहों को क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना में शामिल किया गया है, उनमें किशनगंज, छपरा यानी सारण, बेगूसराय के उलाव, अररिया जिले के फारबिसगंज और गोपालगंज के सबेया का नाम है। इन स्थानों को विकसित करने की योजना से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हवाई सेवाओं की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। <Cite refs={["turn565141search0","turn565141search2"]}/>


यहां यह समझना जरूरी है कि मंत्रिमंडल की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी स्थानों पर निर्माण पूरा हो गया है या नियमित उड़ानें शुरू होने की तारीख तय हो चुकी है। आगे की प्रक्रिया में स्थल की स्थिति, तकनीकी जरूरतों, जरूरी मंजूरियों, वित्तीय प्रावधान और उड़ान संचालन की व्यवहार्यता अहम होगी।


नौ जिलों में हेलीपोर्ट बनाने की तैयारी


एयरपोर्ट के साथ सरकार ने नौ जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दी है। प्रस्तावित जिलों में औरंगाबाद, बांका, जमुई, कटिहार, खगड़िया, नवादा, शेखपुरा, बेगूसराय और सीतामढ़ी शामिल हैं।


हेलीपोर्ट छोटे विमानों के लिए बने हवाई अड्डे से अलग सुविधा होती है, जहां हेलीकॉप्टरों के उतरने और उड़ान भरने की व्यवस्था विकसित की जाती है। जरूरत और संचालन की स्वीकृत व्यवस्था के मुताबिक ऐसी सुविधाएं प्रशासनिक यात्राओं, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा संबंधी आपात स्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों तक जल्दी पहुंचने में उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, हर स्थान पर किस तरह की सेवा उपलब्ध होगी, यह संबंधित परियोजना की योजना और परिचालन व्यवस्था तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


छपरा और आसपास के लोगों को क्या फायदा हो सकता है?


छपरा और सारण क्षेत्र के लोगों के लिए इस प्रस्ताव का महत्व इसलिए है क्योंकि लंबी दूरी की हवाई यात्रा के लिए यात्रियों को दूसरे शहरों के हवाई अड्डों तक जाना पड़ सकता है। यदि छपरा में प्रस्तावित एयरपोर्ट विकसित होता है और वहां से नियमित उड़ानें शुरू होती हैं, तो यात्रा के समय और दूसरे शहरों तक पहुंचने में लगने वाली मशक्कत कम हो सकती है।


हवाई संपर्क बेहतर होने से व्यापार, पर्यटन, निवेश और व्यावसायिक यात्राओं को भी मदद मिल सकती है। स्थानीय कारोबारियों को बड़े व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंचने के अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए भी क्षेत्र तक पहुंचना आसान हो सकता है। लेकिन इन संभावित लाभों का वास्तविक असर उड़ानों की संख्या, गंतव्यों, किराए और यात्रियों की मांग पर निर्भर करेगा।


सरकार उठाएगी परियोजना लागत का 25 प्रतिशत


मंत्रिमंडल के फैसले में संशोधित उड़ान योजना के तहत राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी का भी प्रावधान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना लागत का 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। उड़ानों के संचालन के दौरान प्रचार-प्रसार के लिए सालाना 10 लाख रुपये खर्च करने की व्यवस्था भी प्रस्ताव में शामिल है। इसके अलावा नजदीकी शहरों तक मुफ्त पिकअप और ड्रॉप की सुविधा, करों में छूट तथा परिचालन से जुड़ी वित्तीय सहायता देने का प्रावधान बताया गया है। <Cite refs={["turn565141search0","turn565141search1","turn565141search2"]}/>


इन सुविधाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय उड़ानों के संचालन को बढ़ावा देना और यात्रियों के लिए हवाई यात्रा को अधिक व्यावहारिक बनाना है। हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक उपलब्धता संबंधित स्थल पर परियोजना लागू होने और सेवा संचालन की शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


निर्माण और उड़ानों के संचालन की अगली प्रक्रिया अहम


किसी एयरपोर्ट या हेलीपोर्ट की योजना को जमीन पर उतारने के लिए केवल घोषणा पर्याप्त नहीं होती। भूमि और मौजूदा हवाई पट्टी की स्थिति, तकनीकी सर्वेक्षण, सुरक्षा मानक, जरूरी अनुमतियां, निर्माण लागत और संचालन की व्यवस्था जैसे कई पहलुओं पर काम करना पड़ता है। इसके बाद विमानन कंपनियों की भागीदारी और यात्रियों की मांग के अनुसार उड़ानों का संचालन तय होता है।


केंद्र की संशोधित उड़ान योजना का व्यापक उद्देश्य उन क्षेत्रों में हवाई संपर्क बढ़ाना है, जहां विमानन सुविधाएं कम हैं। बिहार के लिए प्रस्तावित पांच एयरपोर्ट और नौ हेलीपोर्ट इसी क्षेत्रीय संपर्क विस्तार की पहल का हिस्सा हैं। <Cite refs={["turn565141search3","turn565141search4"]}/>


फिलहाल इस योजना का अगला महत्वपूर्ण चरण परियोजनाओं को व्यावहारिक रूप देना होगा। यदि प्रस्तावित सुविधाएं तय प्रक्रिया के तहत विकसित होती हैं और नियमित उड़ानें शुरू होती हैं, तो बिहार के छोटे शहरों के लिए हवाई यात्रा के विकल्प बढ़ सकते हैं। छपरा, किशनगंज, बेगूसराय, फारबिसगंज और सबेया सहित संबंधित क्षेत्रों में लोगों की नजर अब आगे की कार्यवाही और निर्माण की समयसीमा पर रहेगी।


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