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Bihar Cyber Crime: साइबर अपराध की रैंकिंग में बिहार के कई जिले टॉप-15 में, पटना से नवादा तक चर्चा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार के नवादा, नालंदा, पटना और शेखपुरा साइबर अपराध से जुड़े राष्ट्रीय आंकड़ों में शामिल हैं। जानें फर्जी सिम, म्यूल खातों और ठगी की रकम निकालने से जुड़े मामले।

बिहार में साइबर अपराध का नेटवर्क चर्चा में, नवादा-नालंदा से पटना तक सामने आए अहम आंकड़े


पटना। ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क पर लगाम लगाने की चुनौती बिहार में लगातार गंभीर बनी हुई है। साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड, ठगी की रकम निकालने के तरीके और संदिग्ध बैंक खातों को लेकर सामने आए आंकड़ों ने राज्य के कई जिलों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अगस्त 2026 में हुई समीक्षा बैठक में भी बिहार के कई जिलों की स्थिति पर ध्यान दिया गया था।


साइबर अपराध के हॉटस्पॉट में बिहार के कई जिले


बिहार सरकार की समीक्षा से जुड़ी प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, साइबर अपराध के प्रमुख केंद्रों की सूची में नवादा, नालंदा, पटना और शेखपुरा शामिल रहे। समग्र साइबर अपराध हॉटस्पॉट रैंकिंग में नवादा दूसरे, नालंदा चौथे, पटना सातवें और शेखपुरा पंद्रहवें स्थान पर बताए गए।


यह रैंकिंग साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न संकेतकों पर आधारित है। अलग-अलग गतिविधियों के आधार पर जिलों की स्थिति बदल सकती है, इसलिए हर रैंक को एक ही श्रेणी का आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।


ठगी की रकम निकालने में पटना का नाम


साइबर ठगी के बाद रकम निकालना अपराध के वित्तीय नेटवर्क की एक अहम कड़ी है। एटीएम या अन्य बैंकिंग माध्यमों से रकम निकालने के मामलों में पटना का नाम प्रमुखता से सामने आया है। जांच एजेंसियों के लिए ऐसे लेन-देन की पहचान करना जरूरी है, ताकि ठगी की रकम को आगे भेजने या निकालने वाले नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।


फर्जी सिम कार्ड से बढ़ती चुनौती


साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड की पहचान और उनकी बिक्री पर निगरानी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गलत पहचान पर जारी सिम कार्ड या किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों के दुरुपयोग से अपराधियों को लोगों से संपर्क करने और ठगी के प्रयास करने का अवसर मिल सकता है।


नालंदा और अरवल जैसे जिलों का नाम सिम कार्ड से जुड़े कुछ मानकों की रैंकिंग में सामने आने की जानकारी दी गई है। इस तरह के मामलों में सिम जारी करने वाले केंद्रों पर पहचान संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।


म्यूल बैंक खाते बनते हैं जांच का अहम विषय


साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए कभी-कभी ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका उपयोग खाताधारक की जानकारी या सहमति के बिना भी हो सकता है। जांच में ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।


इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित किए जाने से वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। संदिग्ध लेन-देन की पहचान, बैंक खातों का सत्यापन और समय पर पुलिस कार्रवाई इस तरह के नेटवर्क को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।


पुलिस ने तेज की साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई


अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, बिहार में ऑपरेशन साइबर प्रहार के तहत 6,251 म्यूल बैंक खातों का सत्यापन किया गया था। इस अभियान में 507 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई थी। यह कार्रवाई साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान करने और संदिग्ध खातों पर कार्रवाई करने के प्रयासों का हिस्सा है।


रैंकिंग के साथ आंकड़ों को समझना भी जरूरी


राष्ट्रीय सूची में किसी जिले का नाम शामिल होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस जिले का हर व्यक्ति या पूरा क्षेत्र साइबर अपराध में शामिल है। रैंकिंग का अर्थ संबंधित मानक पर दर्ज गतिविधियों या जांच में सामने आए मामलों से है।


साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फर्जी सिम कार्ड जारी करने वालों, संदिग्ध बैंक खातों, रकम निकालने वाले नेटवर्क और ठगी की शिकायतों पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। आम लोगों के लिए भी अनजान लिंक से बचना, OTP साझा नहीं करना और बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखना महत्वपूर्ण है।


यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

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