:
Breaking News

Bihar News: BSSC उर्दू अनुवादक भर्ती पर हाईकोर्ट का फैसला, आरक्षण श्रेणी बदलने की मांग खारिज

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना हाईकोर्ट ने BSSC की 1,294 पदों वाली उर्दू अनुवादक भर्ती में आरक्षण श्रेणी दोबारा बदलने और चयन प्रक्रिया फिर खोलने की मांग खारिज कर दी।

पटना, 21 अक्टूबर। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की उर्दू अनुवादक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद पर पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने और अभ्यर्थियों को आवेदन में दर्ज आरक्षण श्रेणी बदलने का मौका देने के पक्ष में दिए गए एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। इस फैसले से वर्ष 2019 की भर्ती को लेकर चल रहा विवाद एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।


मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मेरिट सूची जारी हो जाने के बाद निर्धारित शर्तों से हटकर अभ्यर्थियों को श्रेणी बदलने की अनुमति देना उचित नहीं होगा।


1,294 पदों पर होनी थी नियुक्ति


BSSC ने विज्ञापन संख्या 01/2019 के माध्यम से उर्दू अनुवादक के 1,294 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने आरक्षण श्रेणी के उल्लेख को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विज्ञापन में अति पिछड़ा वर्ग के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों के कारण उन्हें अपनी सही श्रेणी चुनने में भ्रम हुआ।


याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, विज्ञापन में 'MBC' शब्द देखकर उन्होंने आवेदन में खुद को पिछड़ा वर्ग (BC) के अंतर्गत दर्ज कर दिया। बाद में काउंसलिंग के समय उन्हें अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के आधार पर लाभ नहीं मिला। इसी विवाद को लेकर उन्होंने न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।


आयोग ने विज्ञापन में अस्पष्टता के आरोप को नकारा


सुनवाई के दौरान बिहार कर्मचारी चयन आयोग की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन के हिंदी संस्करण में अति पिछड़ा वर्ग का उल्लेख स्पष्ट था। आयोग ने यह भी बताया कि भर्ती के लिए आवेदन करने वाले कुल 70,824 अभ्यर्थियों में से 31,344 ने EBC श्रेणी के तहत आवेदन किया था।


आयोग की दलील थी कि भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी पहचानने में ऐसी व्यापक कठिनाई नहीं हुई थी, जिसके आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा खोला जाना चाहिए।


चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रेणी बदलने पर रोक


खंडपीठ ने मामले में विज्ञापन की शर्तों, आरक्षण श्रेणी से जुड़े तर्कों और भर्ती के विभिन्न चरणों पर विचार किया। अदालत ने माना कि MBC और EBC शब्दों के इस्तेमाल में अंतर होने मात्र से चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का आधार नहीं बनता।


अदालत के सामने यह तथ्य भी था कि लिखित परीक्षा, काउंसलिंग और अंतिम मेरिट सूची जारी करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अंतिम मेरिट सूची 23 नवंबर 2024 को जारी की गई थी।


ऐसी स्थिति में चयन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी बदलने का अवसर देना भर्ती के निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना गया।


7 जनवरी 2026 का आदेश किया निरस्त


इन कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ द्वारा 7 जनवरी 2026 को दिए गए आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, संबंधित रिट याचिका भी खारिज कर दी गई।


इस फैसले से BSSC की उर्दू अनुवादक भर्ती को दोबारा खोलने और आरक्षण श्रेणी में बदलाव की अनुमति देने की मांग को राहत नहीं मिली है। भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए इस फैसले का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि मामला आवेदन के समय दर्ज की गई श्रेणी और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसमें बदलाव की मांग से जुड़ा था।


यह भी पढ़ें: बिहार में भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों से जुड़ी अन्य खबरों के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *