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Bihar News: अनंत सिंह का जदयू पर पलटवार, बोले- नीतीश के लिए कुर्बानी दी, मेरे खिलाफ ही कार्रवाई क्यों?

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | जदयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के लिए कुर्बानी देने का दावा किया। संजय झा पर निशाना साधा और शाम्भवी चौधरी व महेश्वर हजारी के परिवारों का जिक्र कर कार्रवाई पर सवाल उठाए।

25 अक्टूबर 2026 | Alam Ki Khabar: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी पुरानी निष्ठा का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मुश्किल वक्त में सरकार का साथ देने के लिए कुर्बानी दी थी। अब उनका सवाल है कि पार्टी में कार्रवाई का पैमाना सबके लिए एक जैसा क्यों नहीं है?


पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि जब दूसरे नेताओं के परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ते हैं, तब उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती? इस सिलसिले में उन्होंने सांसद शाम्भवी चौधरी और महेश्वर हजारी के परिवार का जिक्र किया।


‘नीतीश कुमार के लिए हमने कुर्बानी दी’


अनंत सिंह ने अपने बयान में फरवरी 2024 के बिहार विधानसभा बहुमत परीक्षण का जिक्र किया। उस समय नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को विश्वास मत हासिल करना था। अनंत सिंह ने दावा किया कि उन्होंने सरकार बचाने में भूमिका निभाई थी और उनके योगदान को भुलाया नहीं जाना चाहिए।


दरअसल, उस बहुमत परीक्षण के दौरान अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी राष्ट्रीय जनता दल की विधायक थीं, लेकिन उन्होंने नीतीश कुमार सरकार के पक्ष में मतदान किया था। उस समय राजद के कुछ अन्य विधायकों ने भी पार्टी के रुख से अलग जाकर सरकार का समर्थन किया था।


अनंत सिंह ने इसी घटनाक्रम को अपनी दलील का आधार बनाते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने नीतीश कुमार का साथ दिया था, तो आज उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई? यह उनका अपना दावा और राजनीतिक पक्ष है; इस पर जदयू नेतृत्व की प्रतिक्रिया को भी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।


संजय झा पर निशाना, पार्टी चलाने के तरीके पर सवाल


अनंत सिंह ने जदयू के मौजूदा नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में पहले जैसी स्थिति नहीं रह गई है। उन्होंने संजय झा को निशाने पर लेते हुए दावा किया कि कुछ बाहरी प्रभाव वाले लोग पार्टी पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रहे हैं।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को पार्टी के भीतर चल रही पूरी स्थिति की जानकारी नहीं है। हालांकि, यह अनंत सिंह का आरोप है। पार्टी नेतृत्व की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।


शाम्भवी चौधरी और महेश्वर हजारी के परिवार का नाम लेकर उठाए सवाल


अनंत सिंह ने कार्रवाई को लेकर कथित दोहरे मापदंड का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब अशोक चौधरी की बेटी शाम्भवी चौधरी ने लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर समस्तीपुर से चुनाव लड़ा था, तब उनके पिता के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


इसी तरह उन्होंने महेश्वर हजारी के बेटे के दूसरे राजनीतिक दल से चुनाव लड़ने का जिक्र करते हुए पूछा कि उस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई।


इन उदाहरणों के जरिए अनंत सिंह ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की कोशिश की। हालांकि, अलग-अलग नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के राजनीतिक फैसलों की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए उनके आरोपों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और पार्टी के नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।


एमएलसी चुनाव बना टकराव की बड़ी वजह


जदयू और अनंत सिंह के बीच विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के दौरान खुलकर सामने आया। जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया।


अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया और पार्टी के कुछ नेताओं को लेकर भी बयान दिए। जदयू नेतृत्व ने इसे पार्टी के निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता से जोड़ते हुए कार्रवाई की।


24 अक्टूबर को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए दोनों को छह साल के लिए निष्कासित करने की घोषणा की गई। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर भी विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की अनुशंसा की है।


अब आगे क्या करेंगे अनंत सिंह?


निष्कासन के बाद अनंत सिंह के तेवर से स्पष्ट है कि विवाद फिलहाल समाप्त नहीं हुआ है। वह पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों को अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं।


अब तीन सवाल अहम हैं—क्या जदयू नेतृत्व उनके आरोपों का जवाब देगा, क्या अनंत सिंह अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने के विकल्प पर आगे बढ़ेंगे और विधानसभा सदस्यता को लेकर क्या निर्णय होता है?


फिलहाल इतना स्पष्ट है कि एमएलसी चुनाव से शुरू हुआ विवाद अब पार्टी अनुशासन से आगे बढ़कर नेतृत्व, राजनीतिक निष्ठा और कथित दोहरे मापदंड की बहस में बदल गया है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस राजनीतिक टकराव की दिशा तय करेंगी।


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