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Bihar Tender Scam: बिहार टेंडर घोटाले में 6 IAS अधिकारियों को ED का समन, आनंद किशोर से 30 अक्टूबर को पूछताछ

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार टेंडर घोटाले में ED ने छह IAS अधिकारियों को समन भेजा। आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल समेत अन्य अधिकारियों से पूछताछ और पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

28 अक्टूबर 2026 | Alam Ki Khabar: बिहार में सरकारी टेंडरों से जुड़े कथित घोटाले की जांच ने अब वरिष्ठ नौकरशाहों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े मामले में बिहार के छह आईएएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा है। जांच एजेंसी सरकारी ठेकों के आवंटन, संभावित वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारियों की कथित भूमिका से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इस बीच पटना हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद मामले की जांच पर भी सवाल उठे हैं।


छह आईएएस अधिकारियों के नाम आए सामने


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के लिए बुलाए गए अधिकारियों में आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव शामिल हैं। एजेंसी अलग-अलग तारीखों पर अधिकारियों से जानकारी जुटाकर मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।


रिपोर्टों के मुताबिक, अभिलाषा कुमारी शर्मा से 26 अक्टूबर को पूछताछ हुई, जबकि श्रम संसाधन विभाग के विशेष सचिव सुनील यादव से 27 अक्टूबर को करीब छह घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। धर्मेंद्र कुमार को 28 अक्टूबर को पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है।


वहीं, संतोष कुमार मल्ल को 29 अक्टूबर और आनंद किशोर को 30 अक्टूबर को ईडी कार्यालय में पेश होने के लिए समन भेजे जाने की खबर है। योगेश कुमार सागर की ओर से पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने की भी रिपोर्ट है।


क्या है रिशु श्री से जुड़ा मामला?


यह प्रकरण ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री और सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच से संबंधित है। आरोप है कि सरकारी टेंडरों की प्रक्रिया में हेराफेरी कर कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसके जरिए धनशोधन की गतिविधियां हुईं।


जांच एजेंसियां कथित तौर पर टेंडर से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा किए जाने, ठेकों की शर्तों को प्रभावित करने और संबंधित लोगों के बीच संभावित वित्तीय लेनदेन के आरोपों की जांच कर रही हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच में जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।


पटना हाईकोर्ट ने जांच के दायरे पर उठाए सवाल


15 अक्टूबर को रिशु श्री की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। अदालत के समक्ष ईडी ने रिशु श्री को कथित धनशोधन मामले का प्रमुख सूत्रधार बताया था, लेकिन अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के संदर्भ में इस दावे पर सवाल उठाए।


अदालत ने इस संभावना पर भी ध्यान दिलाया कि कथित घोटाले में वास्तविक भूमिका निभाने वाले अन्य लोग पर्दे के पीछे हो सकते हैं। अदालत ने ईडी और बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) के बीच साझा की गई जानकारी तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा।


अदालती कार्यवाही के विवरण के मुताबिक, ईडी की ओर से छह वरिष्ठ अधिकारियों के नाम साझा किए जाने के बावजूद संबंधित प्राथमिकी में केवल तीन अधिकारियों को आरोपी बनाए जाने के कारणों पर सवाल उठाए गए। अदालत ने एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाकर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया। मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है।


अब आगे क्या होगा?


छह अधिकारियों को समन भेजे जाने के बाद जांच एजेंसी उनके बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर सकती है। टेंडर प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, प्रशासनिक फैसलों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।


हालांकि, पूछताछ के लिए समन जारी होना या जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के निष्कर्षों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।


बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले में अब सबकी निगाहें ईडी की आगे की पूछताछ और पटना हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


यह भी पढ़ें: बिहार की ताजा खबरों और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ी रिपोर्ट पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पर जाएं।

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