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Bihar News: सुधाकर सिंह-कुंदन कृष्णन विवाद में सम्राट चौधरी ने दिए जांच के आदेश, 5 करोड़ के मानहानि नोटिस पर बढ़ा मामला

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में राजद सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ आईपीएस कुंदन कृष्णन के बीच मानहानि नोटिस को लेकर विवाद गहराया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग को जांच के निर्देश दिए।

29 अक्टूबर 2026 | Alam Ki Khabar: बिहार में सांसद और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बीच विवाद गहराया, मानहानि नोटिस पर सरकार ने जांच के दिए निर्देश


पटना: बिहार में राजद सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन के बीच चल रहा विवाद अब सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने के बाद सांसद को पांच करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे की चेतावनी वाला कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके बाद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की।


मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से 27 अक्टूबर को गृह विभाग के प्रधान सचिव को सांसद के पत्र में उठाए गए मुद्दों की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम ने पुलिस की जवाबदेही, सरकारी अधिकारियों की निजी कानूनी कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक सवालों से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। <Cite refs={["turn739544search4","turn739544search5","turn739544search7"]}/>


छह अक्टूबर को भेजा गया था पांच करोड़ रुपये का नोटिस


मामले की शुरुआत उस कानूनी नोटिस से जुड़ी है, जिसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से उनके निजी अधिवक्ता के माध्यम से छह अक्टूबर को सुधाकर सिंह को भेजा गया था। नोटिस में सांसद के बयानों को कथित तौर पर मानहानिकारक बताते हुए सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई थी।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नोटिस में कहा गया था कि निर्धारित समय में माफी नहीं मांगने पर दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर कर पांच करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की जा सकती है। नोटिस में आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी का भी उल्लेख किया गया था। यह कुंदन कृष्णन की ओर से उठाया गया कानूनी कदम है; मुकदमे की चेतावनी अपने आप में किसी पक्ष के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। <Cite refs={["turn739544search1","turn739544search2"]}/>


सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उठाए सवाल


बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिखकर इस विवाद में हस्तक्षेप की मांग की थी। सांसद ने भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने, घटना के समय पुलिस कमान की जवाबदेही तय करने और उन्हें भेजे गए कानूनी नोटिस के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।


सुधाकर सिंह का कहना है कि जनहित के मुद्दे उठाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने उन्हें निजी अधिवक्ता के जरिए नोटिस भेजते समय सरकार से अनुमति ली थी या नहीं। नोटिस किस हैसियत से भेजा गया और इस संबंध में कौन-से नियम लागू होते हैं, यह भी उनके उठाए गए सवालों में शामिल है।


सांसद ने विवाद को केवल व्यक्तिगत कानूनी मामला मानने के बजाय पुलिस की जवाबदेही और जनहित के प्रश्नों से जुड़ा विषय बताया है। हालांकि, अनुमति की आवश्यकता और सेवा नियमों के उल्लंघन का प्रश्न संबंधित नियमों तथा जांच के आधार पर ही तय हो सकेगा। <Cite refs={["turn739544search5","turn739544search8"]}/>


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग को क्या निर्देश दिया?


सुधाकर सिंह की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने और उचित निर्णय लेने को कहा। निर्देश में सांसद के पत्र में उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई की जानकारी सांसद और मुख्यमंत्री सचिवालय, दोनों को देने की बात भी कही गई।


इस मामले में जांच का दायरा तीन प्रमुख विषयों से जुड़ा है। पहला, भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग। दूसरा, घटना के समय पुलिस कमान की भूमिका और जवाबदेही। तीसरा, जनहित के मुद्दे उठाने के बाद सांसद को भेजे गए मानहानि नोटिस से संबंधित सवाल।


फिलहाल गृह विभाग की जांच के निष्कर्ष या किसी अधिकारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई को लेकर कोई परिणाम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए मुख्यमंत्री के निर्देश को जांच की प्रक्रिया शुरू करने का कदम माना जाना चाहिए, न कि किसी पक्ष के खिलाफ दोष सिद्ध होने का फैसला। <Cite refs={["turn739544search0","turn739544search4"]}/>


विवाद की जड़: बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत


इस पूरे विवाद का संबंध भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुई भरत भूषण तिवारी की मौत से है। पुलिस ने इस घटना को मुठभेड़ से जुड़ा मामला बताया था, जबकि मृतक के परिजनों और कुछ जनप्रतिनिधियों ने पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।


सुधाकर सिंह ने घटना को लेकर पुलिस की भूमिका और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर प्रश्न उठाए थे। इसी संदर्भ में कुंदन कृष्णन की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया। मामले की परिस्थितियों की जांच के लिए न्यायिक जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। <Cite refs={["turn594572search0","turn594572search3"]}/>


भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर पुलिस और परिवार के पक्षों में अंतर रहा है। ऐसे मामलों में घटनास्थल के साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष अहम होते हैं। किसी आरोप या दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले संबंधित जांच की स्थिति और निष्कर्षों को देखना जरूरी है।


कुंदन कृष्णन का पक्ष और आगे की कानूनी कार्रवाई


कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए नोटिस में यह आपत्ति जताई गई थी कि सांसद ने उनके खिलाफ कथित रूप से गलत और मानहानिकारक बयान दिए। कानूनी नोटिस के जरिए माफी की मांग और संभावित मुकदमे की चेतावनी दी गई।


रिपोर्टों के मुताबिक, कुंदन कृष्णन ने कहा है कि निजी हैसियत से कानूनी नोटिस भेजने के लिए गृह विभाग की अनुमति जरूरी नहीं है। उन्होंने दीवानी मुकदमा दायर करने की बात भी कही है और इसके लिए विभागीय अनुमति लेने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। आगे की कानूनी कार्रवाई वास्तव में कब और किस आधार पर होती है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है।


दूसरी ओर, सुधाकर सिंह ने जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाने के अपने अधिकार का बचाव किया है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच विवाद अब कानूनी प्रक्रिया और सरकारी जांच—दोनों के दायरे में आ गया है।


पुलिस की जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर बहस


इस घटनाक्रम ने एक व्यापक सवाल खड़ा किया है: जब कोई जनप्रतिनिधि पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता है, तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाए और साथ ही किसी अधिकारी की प्रतिष्ठा को लेकर उठे विवाद का निपटारा किस तरह हो?


कानूनी नोटिस भेजना अपने आप में किसी पक्ष की गलती साबित नहीं करता। उसी तरह, जनहित में सवाल उठाना भी किसी आरोप को स्वतः प्रमाणित नहीं कर देता। दोनों पहलुओं की जांच तथ्यों, कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।


इस मामले में गृह विभाग की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सांसद की शिकायत में उठाए गए प्रशासनिक और प्रक्रियागत सवालों पर क्या निर्णय लिया जाता है। भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े प्रश्नों का उत्तर संबंधित जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों से ही मिल सकेगा।


अब गृह विभाग की जांच पर नजर


सुधाकर सिंह और कुंदन कृष्णन के बीच विवाद अब केवल नोटिस और जवाब तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश के बाद गृह विभाग को सांसद की शिकायत पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ानी है।


अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गृह विभाग कानूनी नोटिस से जुड़े सवालों पर क्या निष्कर्ष निकालता है और भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग पर क्या प्रगति होती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच विवाद का अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है।


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