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Bihar Politics: संजय सरावगी की सफाई, निर्दलीय MLC के बीजेपी में शामिल होने पर विवाद

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में निर्दलीय विधान पार्षदों के बीजेपी को समर्थन देने पर विवाद गहराया। संजय सरावगी ने सदस्यता से किया इनकार, मनोज झा ने दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग उठाई।

1 नवंबर 2026 | बिहार की राजनीति में दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा के साथ आने का मामला अब समर्थन और दल-बदल के सवाल पर उलझ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने साफ किया है कि बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने पार्टी की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि भाजपा को अपना समर्थन देने की बात कही है। उनके इस बयान से राजनीतिक विवाद को नया मोड़ मिल गया है।


संजय सरावगी ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षद भाजपा और एनडीए के प्रति अपनी आस्था जता चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है।


प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, दोनों विधान पार्षद भाजपा को समर्थन देने के लिए पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान उनका स्वागत और अभिनंदन किया गया। पार्टी कार्यालय में भाजपा के पट्टे के साथ स्वागत किए जाने के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा शुरू हुई थी।


पट्टे के साथ स्वागत से शुरू हुआ विवाद


31 अक्टूबर को भाजपा कार्यालय में बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज का पार्टी के पट्टे के साथ अभिनंदन किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि निर्दलीय निर्वाचित विधान पार्षदों का किसी राजनीतिक दल के साथ इस तरह जुड़ना दल-बदल कानून के दायरे में आ सकता है या नहीं।


अब संजय सरावगी ने सदस्यता ग्रहण करने की बात को खारिज करते हुए इसे समर्थन का मामला बताया है। भाजपा का कहना है कि दोनों विधान पार्षदों ने पार्टी के प्रति अपना समर्थन जताया है, न कि भाजपा की औपचारिक सदस्यता ली है।


मनोज झा ने उठाया था संवैधानिक सवाल


इससे पहले राजद सांसद मनोज झा ने दोनों विधान पार्षदों के भाजपा के साथ आने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि निर्दलीय निर्वाचित विधान पार्षद चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण नहीं कर सकते।


मनोज झा ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे मामले में सदस्यता समाप्त करने की मांग उठ सकती है। उन्होंने विधान परिषद के सभापति के समक्ष मामला ले जाने और दोनों विधान पार्षदों की सदस्यता रद्द कराने की मांग करने की बात भी कही थी।


समर्थन और सदस्यता के बीच सियासी बहस


संजय सरावगी के बयान के बाद अब विवाद का केंद्र यह है कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों का भाजपा के प्रति समर्थन किस रूप में देखा जाएगा। भाजपा इसे राजनीतिक समर्थन बता रही है, जबकि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को दल-बदल कानून के नजरिये से देख रहा है।


फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच बिहार की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे इस पर विधान परिषद के सभापति या संबंधित संवैधानिक प्राधिकारी की क्या भूमिका होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।


पूरी खबर पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।

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