मुजफ्फरपुर। तिरहुत के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। पारू थाना क्षेत्र में एक मां ने अपनी ममता को दांव पर लगाते हुए जन्म के कुछ ही घंटों बाद अपने नवजात बेटे को बेच दिया। हैरानी की बात यह है कि इस घिनौने सौदे में अस्पताल की आशा कार्यकर्ता ने बिचौलिया बनकर पूरी “डील” तय करवाई।
कीमत लगाई गई—1 लाख 60 हजार रुपये।जिसमें से 1 लाख मां की झोली में गया, बाकी 60 हजार आशा कार्यकर्ता ने अपनी जेब में रख लिए।
ससुर को हुआ शक, खुल गई पूरी कहानी
महिला जब बिना बच्चे के घर लौटी, तो परिवार को शक हुआ। ससुर ने पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों के साथ पारू थाने पहुंचकर पूरी बात बताई।पुलिस तुरंत हरकत में आई, और पूछताछ में मां और आशा कार्यकर्ता दोनों टूट गईं—दोनों ने नवजात को बेचने का अपराध कबूल कर लिया।
शहर के संभ्रांत परिवार से नवजात बरामद
पुलिस ने देर शाम शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार के घर छापेमारी कर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।बच्चे को तुरंत चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) को सौंपकर सुरक्षा में रखा गया है।
पीड़ित महिला का पति दिल्ली में मजदूर है और घर पर उसके पहले से ही दो बच्चे हैं। आर्थिक तंगी और लालच—दोनों मिलकर एक मासूम की जिंदगी की कीमत तय कर गए।
अस्पताल प्रशासन ने पल्ला झाड़ा, लेकिन सवाल खड़े
पारू सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. हैदर अयूब ने बताया कि प्रसव सुरक्षित हुआ था और मां-बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया था।
उन्होंने कहा—“अस्पताल से बाहर क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं। अगर जांच में किसी अस्पतालकर्मी की भूमिका सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई होगी।”लेकिन सवाल बड़ा है—क्या एक आशा कार्यकर्ता बिना अस्पताल की खिड़की से गुज़रे इस तरह का सौदा कर सकती है?
पुलिस जांच में जुटी, कई और खुलासों की आशंका
जांच अधिकारी मामले को मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क से जोड़कर देख रहे हैं।संभावना है कि यह कोई पहला मामला नहीं, सिर्फ पहली बार पकड़ में आया हो।
मां की ममता पर बड़ा सवाल
जहां मां का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र बंधन माना जाता है, वहीं इस घटना ने उस रिश्ते को कलंकित कर दिया।पैसों के लिए मां ने वह कर दिया जो कोई सोच भी नहीं सकता अपने ही कलेजे के टुकड़े को बेच दिया।