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Online Child Safety: ऑस्ट्रेलिया का सोशल मीडिया आयु प्रतिबंध कानून सवालों के घेरे में, बिना सत्यापन बन रहे किशोरों के अकाउंट

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Alam Ki Khabar: ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाने वाले कानून पर नए सवाल उठे हैं। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कई प्लेटफॉर्म बिना प्रभावी आयु सत्यापन के अकाउंट बना रहे हैं।

सिडनी, 15 जुलाई।बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया द्वारा लागू किए गए आयु-प्रतिबंध कानून की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब भी प्रभावी आयु सत्यापन के बिना किशोरों को नए अकाउंट बनाने की अनुमति दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार परीक्षण के लिए बनाए गए 50 अकाउंट विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना किसी अतिरिक्त पहचान या आयु प्रमाण के सक्रिय हो गए। अध्ययन करने वाली टीम का कहना है कि किसी भी प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्ताओं से उम्र साबित करने के लिए कोई मजबूत सत्यापन प्रक्रिया नहीं अपनाई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ परीक्षण अकाउंट्स पर बैंकिंग सेवाओं के विज्ञापन और एक प्लेटफॉर्म पर वयस्क सामग्री भी दिखाई गई, जिससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। इस मामले पर अलग-अलग टेक कंपनियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ कंपनियों ने परीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। ऑस्ट्रेलियाई सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने अधिकतम जुर्माने की सीमा बढ़ा दी है और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई का संकेत भी दिया है। ई-सेफ्टी आयुक्त का कहना है कि बड़ी टेक कंपनियों के पास इतनी तकनीकी क्षमता मौजूद है कि वे कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोक सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत डिजिटल आयु सत्यापन प्रणाली और प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है ताकि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा वास्तव में सुनिश्चित की जा सके।

स्टडी की प्रमुख बातें • 50 परीक्षण अकाउंट बिना प्रभावी आयु सत्यापन के सक्रिय हुए।

• कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अध्ययन में शामिल रहे।

• कुछ अकाउंट्स पर बैंकिंग विज्ञापन और संवेदनशील सामग्री भी दिखाई गई।

• विशेषज्ञों ने मजबूत एज वेरिफिकेशन सिस्टम की आवश्यकता बताई।

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कानून के साथ तकनीक भी जरूरी

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल कानूनी प्रावधानों से सुनिश्चित नहीं की जा सकती। यदि आयु सत्यापन प्रणाली मजबूत और प्रभावी नहीं होगी, तो नियमों का उद्देश्य पूरी तरह पूरा नहीं हो पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों और टेक कंपनियों को मिलकर अधिक विश्वसनीय समाधान विकसित करने होंगे।

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