:
Breaking News

Mobile Gaming Safety: बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं चैट वाले गेम्स, साइबर एक्सपर्ट ने पैरेंट्स को किया सतर्क

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने चेतावनी दी है कि इन-गेम चैट और वॉयस कॉल वाले मोबाइल गेम्स बच्चों और उनके परिवार के लिए साइबर जोखिम पैदा कर सकते हैं। जानिए पैरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

नई दिल्ली, 25 जुलाई।स्मार्टफोन और ऑनलाइन गेमिंग आज बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मोबाइल गेम्स में इन-गेम चैट और वॉयस कॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, वे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार कई माता-पिता यह मानकर निश्चिंत हो जाते हैं कि बच्चा घर के अंदर मोबाइल पर गेम खेल रहा है, इसलिए वह सुरक्षित है। लेकिन वास्तविकता यह है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बच्चे दुनिया भर के अनजान लोगों के संपर्क में आ सकते हैं। ऐसे में यदि कोई गलत व्यक्ति बातचीत शुरू करता है, तो वह बच्चे का भरोसा जीतकर उससे निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

अमित दुबे का कहना है कि सबसे अधिक सावधानी उन गेम्स में बरतने की जरूरत है, जिनमें चैटिंग और वॉयस कॉल की सुविधा होती है। इन माध्यमों से बच्चे ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं, जिनकी पहचान और मंशा दोनों अज्ञात होती हैं। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित करने, धोखाधड़ी करने या परिवार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।

कोविड-19 महामारी के बाद ऑनलाइन गेमिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। पहले स्मार्टफोन का उपयोग मुख्य रूप से कॉल और इंटरनेट तक सीमित था, लेकिन अब हाई-परफॉर्मेंस मोबाइल और तेज इंटरनेट ने गेमिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। यही कारण है कि कम उम्र के बच्चे भी लंबे समय तक ऑनलाइन गेम खेल रहे हैं।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को यह जानना चाहिए कि उनका बच्चा कौन-सा गेम खेल रहा है और उसमें कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि गेम में चैट या वॉयस कॉल का विकल्प है, तो उसे बंद कर देना बेहतर होगा। साथ ही बच्चों को यह भी समझाना चाहिए कि वे किसी भी ऑनलाइन व्यक्ति के साथ अपना नाम, पता, स्कूल, मोबाइल नंबर, फोटो या अन्य निजी जानकारी साझा न करें।

विशेषज्ञों ने पैरेंटल कंट्रोल टूल्स जैसे Google Family Link और Apple Screen Time के उपयोग की भी सलाह दी है। इनकी मदद से अभिभावक यह नियंत्रित कर सकते हैं कि बच्चा कौन-से ऐप डाउनलोड कर सकता है, कितना समय गेम खेल सकता है और कौन-सी गतिविधियों की अनुमति होगी।

यदि बच्चा BGMI, Free Fire या अन्य मल्टीप्लेयर ऑनलाइन गेम खेलता है, तो अभिभावकों को समय-समय पर उसकी सेटिंग्स की जांच करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर चैट तथा वॉयस कम्युनिकेशन फीचर को बंद कर देना चाहिए।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा केवल तकनीक से नहीं, बल्कि जागरूकता और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित की जा सकती है। बच्चों के साथ नियमित बातचीत और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में सही जानकारी देना भी उतना ही आवश्यक है।

यह भी पढ़ें

साइबर ठगी से बचने के आसान उपाय

सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान

विशेष टिप्पणी

ऑनलाइन गेमिंग मनोरंजन का अच्छा माध्यम हो सकता है, लेकिन बिना निगरानी के यह जोखिम भी बढ़ा सकता है। तकनीक पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय सुरक्षित उपयोग की आदत विकसित करना अधिक प्रभावी तरीका है। यदि अभिभावक बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें और डिजिटल सुरक्षा के नियम सिखाएं, तो ऑनलाइन खतरों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *