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Business News: UPI ट्रांजेक्शन पर MDR लागू करने की तैयारी, जानिए क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त शुल्क?

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Alam Ki Khabar: Business News: केंद्र सरकार ने UPI ट्रांजेक्शन पर लागू जीरो MDR व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। जानिए इसका मकसद क्या है, किस पर शुल्क लग सकता है और ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली, 5 अगस्त। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान के बीच केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित संशोधन के तहत भविष्य में UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि फिलहाल यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे लागू करने से पहले संसद की मंजूरी सहित आगे की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो मौजूदा जीरो MDR व्यवस्था में बदलाव संभव हो सकता है। वर्ष 2020 से सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर MDR को शून्य रखा था, ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके।

क्या होता है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी (मर्चेंट) बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है। फिलहाल UPI भुगतान पर यह शुल्क नहीं लिया जाता, इसलिए व्यापारी को पूरी राशि प्राप्त होती है।

यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो यह शुल्क किस दर से और किन लेनदेन पर लगेगा, इसका फैसला बाद में किया जाएगा। अभी सरकार ने ऐसी कोई दर घोषित नहीं की है।

क्या ग्राहकों को देना होगा चार्ज?

मौजूदा प्रस्ताव में आम UPI उपभोक्ताओं से किसी प्रकार का अतिरिक्त ट्रांजेक्शन शुल्क लेने का उल्लेख नहीं है। शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि यदि MDR लागू होता भी है, तो उसका प्रभाव मुख्य रूप से व्यापारियों पर पड़ सकता है। यानी फिलहाल ग्राहकों के लिए UPI भुगतान मुफ्त ही रहने की संभावना है।

बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हुई?

डिजिटल भुगतान के लगातार बढ़ते दायरे के कारण UPI नेटवर्क पर हर महीने करोड़ों लेनदेन हो रहे हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी प्रणाली को लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने, नई तकनीक विकसित करने और सुरक्षा मजबूत करने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी सहायता से भविष्य की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उद्योग जगत की क्या मांग है?

डिजिटल पेमेंट सेक्टर से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि जीरो MDR नीति के कारण बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है, जिससे डिजिटल भुगतान का विस्तार भी जारी रहे और भुगतान प्रणाली से जुड़े संस्थानों को संचालन के लिए पर्याप्त संसाधन भी मिल सकें।

फिलहाल सरकार की ओर से किसी अंतिम शुल्क दर या लागू होने की तारीख की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में UPI उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को आगे आने वाले आधिकारिक निर्णय का इंतजार करना होगा।

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क्या UPI का मुफ्त सफर आगे भी जारी रहेगा?

UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आसान, तेज और मुफ्त लेनदेन इसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो चुनौती यह होगी कि डिजिटल भुगतान की रफ्तार भी बनी रहे और बैंकिंग व भुगतान प्रणाली भी आर्थिक रूप से मजबूत रह सके। सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस संतुलन को किस तरह बनाए रखा जाएगा।

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