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Technology News: पहली कोशिश में सफल हुई भारत की VIHAAN चिप, Wi-Fi राउटर और फाइबर नेटवर्क में घटेगी विदेशी निर्भरता

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | भारत ने VIHAAN स्वदेशी ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप तैयार की है। पहली ही फैब्रिकेशन कोशिश में सफल इस चिप का इस्तेमाल Wi-Fi राउटर और फाइबर उपकरणों में किया जा सकेगा।

नई दिल्ली, 18 अगस्त। आलम की खबर: भारत ने सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो देश के डिजिटल और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चेन्नई स्थित फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी अहीसा डिजिटल इनोवेशंस ने स्वदेशी ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप VIHAAN विकसित की है।

इस चिप की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि इसे पहली ही फैब्रिकेशन कोशिश में सफल सिलिकॉन मिला। सेमीकंडक्टर उद्योग में इसे First-Pass Silicon Success कहा जाता है। यानी पहली बार तैयार किए गए सिलिकॉन में ही चिप ने अपेक्षित तरीके से काम किया और डिजाइन को दोबारा सुधारकर फैब्रिकेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ी।

यह उपलब्धि इसलिए अहम है क्योंकि जटिल चिप को पहली कोशिश में सही तरीके से काम करने लायक बनाना सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण की कठिन प्रक्रियाओं में दुर्लभ सफलता मानी जाती है।

Wi-Fi राउटर और फाइबर उपकरणों में हो सकता है इस्तेमाल

VIHAAN को मुख्य रूप से ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग सिस्टम के लिए डिजाइन किया गया है। इसका इस्तेमाल घरों और कार्यालयों में लगने वाले Wi-Fi राउटर, ब्रॉडबैंड उपकरण, मॉडेम और नेटवर्क एक्सेस प्वाइंट जैसे सिस्टम में किया जा सकता है।

इसका सीधा संबंध देश के FTTH यानी Fiber-to-the-Home नेटवर्क से भी है। FTTH नेटवर्क में फाइबर के जरिए घर तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचता है। ऐसे नेटवर्क में नेटवर्किंग चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

यदि इन उपकरणों में स्वदेशी चिप का इस्तेमाल बढ़ता है, तो भारतीय कंपनियों को विदेशी नेटवर्किंग सिलिकॉन पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

RISC-V आर्किटेक्चर पर तैयार हुई VIHAAN

VIHAAN को ओपन-स्टैंडर्ड RISC-V आर्किटेक्चर पर बनाया गया है। इसमें C-DAC द्वारा विकसित स्वदेशी VEGA प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है।

RISC-V एक ओपन इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर है, जिसका उपयोग दुनिया भर में चिप डिजाइन के क्षेत्र में बढ़ रहा है। भारत में भी इसे स्वदेशी प्रोसेसर और चिप डिजाइन क्षमता विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण तकनीक माना जा रहा है।

VIHAAN में स्वदेशी VEGA प्रोसेसर को शामिल करना इस परियोजना को केवल एक नेटवर्किंग चिप बनाने से आगे ले जाता है। यह देश में विकसित प्रोसेसर तकनीक को वास्तविक कमर्शियल नेटवर्किंग उत्पादों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में भी कदम है।

पहली ही कोशिश में सिलिकॉन सफल होना क्यों बड़ी बात?

सेमीकंडक्टर चिप तैयार करने की प्रक्रिया लंबी और महंगी होती है। डिजाइन तैयार होने के बाद उसे फैब्रिकेशन के लिए भेजा जाता है। पहली बार तैयार सिलिकॉन में अगर कोई गंभीर डिजाइन समस्या सामने आ जाए तो चिप को दोबारा डिजाइन और फैब्रिकेट करना पड़ सकता है।

इस प्रक्रिया में समय और लागत दोनों बढ़ते हैं।

VIHAAN का पहली ही फैब्रिकेशन प्रयास में काम करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चिप डिजाइन की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग क्षमता का संकेत मिलता है। इसे First-Pass Silicon Success के रूप में देखा जा रहा है।

यही सफलता भारत के घरेलू चिप डिजाइन इकोसिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देती है कि देश में डिजाइन की गई जटिल नेटवर्किंग चिप को उत्पादन के अगले चरण तक पहुंचाने की क्षमता विकसित हो रही है।

चिप में साइबर सुरक्षा पर भी जोर

VIHAAN को सिर्फ तेज नेटवर्किंग के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी डिजाइन किया गया है। इसमें Hardware Root of Trust, Secure Boot और Cryptographic Engines जैसे सुरक्षा फीचर शामिल किए गए हैं।

इन तकनीकों का उद्देश्य नेटवर्किंग उपकरणों में अनधिकृत सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर के जोखिम को कम करना और डेटा तथा नेटवर्क सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करना है।

आज घरों से लेकर सरकारी कार्यालयों और उद्योगों तक इंटरनेट से जुड़े उपकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में राउटर और नेटवर्किंग उपकरणों की सुरक्षा भी साइबर सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है।

स्वदेशी हार्डवेयर के जरिए सुरक्षा व्यवस्था पर अधिक नियंत्रण हासिल करना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

AROS के साथ नेटवर्किंग उपकरणों में इंटीग्रेशन

VIHAAN को Ahisa Router OS यानी AROS के साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है। इससे इसे राउटर, मॉडेम और एक्सेस प्वाइंट जैसे नेटवर्किंग उपकरणों में इंटीग्रेट करने की सुविधा मिलती है।

इसका उद्देश्य एक ऐसा स्वदेशी नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है जिसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तर पर भारतीय तकनीक की भूमिका बढ़ाई जा सके।

अगर इस तरह के समाधान बड़े पैमाने पर अपनाए जाते हैं तो भारत में बनने वाले नेटवर्किंग उपकरणों के लिए घरेलू तकनीकी विकल्पों का दायरा बढ़ सकता है।

विदेशी चिप पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

भारत में इस्तेमाल होने वाले नेटवर्किंग उपकरणों के कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट अब भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं। नेटवर्किंग चिप उनमें सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है।

VIHAAN जैसी स्वदेशी चिप इस निर्भरता को कम करने का विकल्प देती है। खासकर टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में स्थानीय तकनीक की उपलब्धता से सप्लाई चेन में आने वाले व्यवधानों का असर कम किया जा सकता है।

इसके अलावा स्वदेशी डिजाइन होने के कारण देश की जरूरतों के मुताबिक सुरक्षा और नेटवर्किंग फीचर विकसित करने में भी अधिक लचीलापन मिल सकता है।

DLI स्कीम से मिला समर्थन

VIHAAN परियोजना को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की Design Linked Incentive (DLI) Scheme के तहत समर्थन मिला है। परियोजना को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के व्यापक प्रयासों से भी जोड़ा गया है।

DLI योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन को बढ़ावा देना तथा देश में डिजाइन किए गए उत्पादों को उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करना है।

VIHAAN की सफलता इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह दिखाती है कि चिप डिजाइन से आगे बढ़कर भारतीय कंपनियां वास्तविक नेटवर्किंग हार्डवेयर के लिए सिलिकॉन विकसित कर सकती हैं।

इंटरनेट की स्पीड और डेटा प्रोसेसिंग में भूमिका

ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग SoC का काम केवल इंटरनेट कनेक्शन को आगे बढ़ाना नहीं होता। यह डेटा को प्रोसेस करने, नेटवर्क ट्रैफिक को संभालने और अलग-अलग नेटवर्क इंटरफेस के बीच डेटा के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फाइबर नेटवर्क से आने वाले हाई-स्पीड डेटा को उपयुक्त नेटवर्क इंटरफेस के जरिए घर या कार्यालय के डिवाइस तक पहुंचाने की प्रक्रिया में नेटवर्किंग चिप महत्वपूर्ण होती है।

VIHAAN इसी तरह के नेटवर्किंग कार्यों के लिए डिजाइन की गई है। इसके सुरक्षा फीचर नेटवर्क ट्रैफिक और फर्मवेयर की सुरक्षा को मजबूत करने में भी मदद कर सकते हैं।

भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम के लिए नया संकेत

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में किसी देश की ताकत केवल चिप फैक्ट्री लगाने से नहीं बनती। चिप डिजाइन, IP, प्रोसेसर, पैकेजिंग, परीक्षण और अंतिम उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत होना जरूरी है।

VIHAAN जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने का संकेत देती हैं।

पहली ही कोशिश में सिलिकॉन सफलता हासिल करने वाली इस चिप का वास्तविक प्रभाव तब और स्पष्ट होगा जब इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर भारतीय नेटवर्किंग उपकरणों में शुरू होगा। फिलहाल इसकी सफलता स्वदेशी नेटवर्किंग हार्डवेयर और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

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स्वदेशी चिप सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, रणनीतिक बढ़त भी

भारत में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का विस्तार जिस तेजी से हो रहा है, उसी अनुपात में नेटवर्किंग हार्डवेयर की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में राउटर और ब्रॉडबैंड उपकरणों के लिए स्वदेशी नेटवर्किंग चिप विकसित होना महज एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि भारत को महत्वपूर्ण नेटवर्किंग कंपोनेंट के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़े। हालांकि किसी एक चिप की सफलता से विदेशी निर्भरता तुरंत खत्म नहीं होगी, लेकिन यह दिशा बदलने वाला कदम जरूर है।

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू साइबर सुरक्षा है। नेटवर्किंग उपकरण किसी भी डिजिटल सिस्टम का प्रवेश द्वार होते हैं। यदि इनके हार्डवेयर और सुरक्षा तंत्र पर घरेलू स्तर पर अधिक नियंत्रण हो, तो संभावित जोखिमों से निपटने की क्षमता भी बढ़ सकती है।

VIHAAN की सफलता का अगला परीक्षण इसके व्यावसायिक इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर उत्पादन में होगा। अगर भारतीय कंपनियां इसे वास्तविक Wi-Fi राउटर, मॉडेम और FTTH उपकरणों में सफलतापूर्वक अपनाती हैं, तो इसका असर देश के नेटवर्किंग हार्डवेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है।

भारत के लिए असली लक्ष्य केवल “मेड इन इंडिया” चिप बनाना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना होना चाहिए जो प्रदर्शन, सुरक्षा और लागत के मामले में वैश्विक उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हो। VIHAAN उस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती उपलब्धि के रूप में देखी जा सकती है।

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