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Technology News: Meta का Project Hatch बदल सकता है AI का तरीका, खुद शॉपिंग-बुकिंग से लेकर ऑनलाइन काम संभालेगा AI एजेंट

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Meta Project Hatch नाम के AI एजेंट की टेस्टिंग कर रही है, जो यूजर की ओर से वेबसाइट पर जाकर शॉपिंग, बुकिंग और रिसर्च जैसे ऑनलाइन काम कर सकता है।

नई दिल्ली, 28 अगस्त। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया अब सिर्फ सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट तक सीमित नहीं रहना चाहती। टेक दिग्गज Meta एक ऐसे AI एजेंट की टेस्टिंग कर रही है जो यूजर के निर्देश पर उसके लिए ऑनलाइन काम खुद पूरा कर सके। Project Hatch नाम से सामने आया यह प्रयोग AI को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में कंपनी की कोशिश माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक Project Hatch को फिलहाल Meta के कर्मचारियों के बीच टेस्ट किया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल बातचीत नहीं करता, बल्कि वर्चुअल कंप्यूटर का इस्तेमाल करके वेबसाइट और ऑनलाइन सेवाओं पर जाकर यूजर की ओर से काम करने की क्षमता रखता है।

इसका मतलब यह हुआ कि भविष्य में यूजर को किसी वेबसाइट पर जाकर खुद जानकारी खोजने, फॉर्म भरने या खरीदारी करने की जरूरत कम हो सकती है। वह AI एजेंट को काम बताएगा और एजेंट उसके निर्देश के मुताबिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

चैटबॉट से कैसे अलग है Hatch?

सामान्य AI चैटबॉट मुख्य रूप से यूजर के सवालों का जवाब देते हैं या टेक्स्ट तैयार करते हैं। Project Hatch का मॉडल इससे आगे जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके पास एक वर्चुअल कंप्यूटर है, जिसके जरिए यह इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग वेबसाइटों और सेवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकता है।

मसलन, अगर यूजर किसी रेस्टोरेंट में टेबल बुक करना चाहता है तो AI एजेंट संबंधित वेबसाइट पर जाकर उपलब्ध विकल्प तलाश सकता है। इसी तरह ऑनलाइन खरीदारी, जानकारी जुटाने, फॉर्म भरने या दूसरे डिजिटल कामों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

यानी AI से सिर्फ यह पूछने के बजाय कि "मुझे क्या करना चाहिए?", यूजर भविष्य में उससे यह भी कह सकता है कि "मेरे लिए यह काम कर दो।"

ईमेल से लेकर कैलेंडर तक कनेक्टिविटी

Project Hatch को अलग-अलग डिजिटल सेवाओं से जोड़ने की क्षमता भी इसकी खास विशेषताओं में बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक एजेंट ईमेल, कैलेंडर, Instagram, Spotify और OpenTable जैसी सेवाओं के साथ काम कर सकता है।

इस तरह एक AI एजेंट यूजर के डिजिटल जीवन के कई हिस्सों को एक साथ संभालने की कोशिश करेगा। उदाहरण के तौर पर कैलेंडर में कार्यक्रम देखना, किसी सेवा पर बुकिंग करना या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जरूरी जानकारी तलाशना इसके संभावित इस्तेमाल में शामिल हो सकता है।

यूजर अपनी पसंद के मुताबिक बना सकेगा एजेंट

Hatch को ज्यादा व्यक्तिगत बनाने पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यूजर अपने AI एजेंट को नाम दे सकता है और उसके बातचीत करने के अंदाज को भी अपनी पसंद के अनुसार तय कर सकता है।

इसके अलावा यूजर यह तय कर सकता है कि एजेंट किन जानकारियों को ज्यादा महत्व दे। इसका उद्देश्य AI को एक सामान्य डिजिटल टूल की बजाय व्यक्तिगत सहायक जैसा अनुभव देना है।

सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलू यह बताया गया है कि संवेदनशील काम करने से पहले एजेंट यूजर से अनुमति लेता है। यानी हर काम को बिना पूछे पूरा करने की बजाय महत्वपूर्ण फैसलों या संवेदनशील कार्रवाई के लिए इंसानी मंजूरी जरूरी रखी गई है।

Meta कर्मचारी किस तरह कर रहे हैं इस्तेमाल?

Project Hatch की टेस्टिंग के दौरान इसके संभावित इस्तेमाल के कुछ उदाहरण भी सामने आए हैं। Meta के एक प्रोडक्ट मैनेजर के मुताबिक एजेंट ने उनके लिए डॉग सिटर तलाशने, Father's Day के लिए उपहार खरीदने और नींद से जुड़ी आदतों में सुधार करने जैसे कामों में मदद की।

अगर इस तरह की क्षमता बड़े स्तर पर सफल होती है तो AI का इस्तेमाल केवल ऑफिस या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। रोजमर्रा की छोटी-बड़ी डिजिटल जिम्मेदारियां भी AI एजेंट को सौंपी जा सकती हैं।

क्या आम लोगों के लिए आएगा Project Hatch?

फिलहाल Project Hatch को आम यूजर्स के लिए कब लॉन्च किया जाएगा, इसकी आधिकारिक तारीख Meta ने घोषित नहीं की है। कीमत को लेकर भी कंपनी की ओर से कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

हालांकि, रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि Meta भविष्य में इसे पेड सर्विस के तौर पर पेश कर सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसकी संभावित कीमत 200 डॉलर प्रति माह तक होने की चर्चा हुई है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 19 हजार रुपये से अधिक बैठती है, लेकिन इसे आधिकारिक कीमत नहीं माना जाना चाहिए।

जुकरबर्ग का बड़ा AI विजन

Project Hatch को Meta CEO मार्क जुकरबर्ग के उस बड़े विजन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वह व्यक्तिगत स्तर पर बेहद सक्षम AI यानी "personal superintelligence" विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

कंपनी AI को अपने उत्पादों और आंतरिक कामकाज में तेजी से शामिल कर रही है। ऐसे में Hatch जैसे एजेंट Meta की भविष्य की AI रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

AI से नौकरियों पर फिर उठेगा सवाल?

Meta के भीतर AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कंपनी के संगठनात्मक बदलाव भी चर्चा में रहे हैं। इसी वर्ष Project OT नाम के एक प्लान को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें AI एजेंट्स के साथ छोटे कर्मचारी समूहों के जरिए काम करने और कुछ टीमों के आकार में बड़े बदलाव की संभावनाओं पर विचार किए जाने की बात कही गई थी।

हालांकि, Meta ने यह स्पष्ट किया था कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटाने जैसी बातें शुरुआती योजना और विचार-विमर्श का हिस्सा थीं। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे शुरुआती प्लान को पूरी कंपनी में कर्मचारियों की कटौती की अंतिम योजना नहीं माना जाना चाहिए।

Meta ने इसी साल कर्मचारियों की संख्या में कटौती भी की थी। बाद में AI टूल्स से मिलने वाली वास्तविक उत्पादकता और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया को लेकर कंपनी की रणनीति में बदलाव की खबरें सामने आईं।

AI एजेंट का दौर कितना दूर?

Project Hatch की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह AI को "जवाब देने" से आगे ले जाकर "काम करने" की दिशा में बढ़ाता है। लेकिन इसके साथ सुरक्षा, प्राइवेसी, गलत फैसलों और यूजर की अनुमति जैसे सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।

अगर कोई AI एजेंट यूजर की ओर से खरीदारी, बुकिंग, ईमेल या दूसरे ऑनलाइन काम करता है तो उसे संवेदनशील जानकारी तक कितनी पहुंच दी जाए, यह बड़ा सवाल होगा। ऐसे में Hatch जैसे सिस्टम की सफलता केवल उसकी तकनीकी क्षमता पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे पर भी निर्भर करेगी।

फिलहाल Project Hatch टेस्टिंग चरण में है। यदि Meta इसे सफलतापूर्वक विकसित करके आम यूजर्स के लिए उपलब्ध कराती है, तो यह AI चैटबॉट के बाद डिजिटल असिस्टेंट की अगली बड़ी छलांग साबित हो सकती है।

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AI चैटबॉट से AI एजेंट तक का सफर

AI की अब तक की सबसे लोकप्रिय पहचान चैटबॉट के रूप में रही है। यूजर सवाल पूछता है और सिस्टम जवाब देता है। लेकिन AI एजेंट का विचार इससे अलग है। यहां लक्ष्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि यूजर के निर्देश के आधार पर काम को पूरा करना है।

यही वजह है कि Project Hatch जैसी तकनीक को लेकर उत्सुकता के साथ सावधानी की जरूरत भी है। अगर AI को ईमेल, कैलेंडर, शॉपिंग और बुकिंग जैसी सेवाओं तक पहुंच मिलती है तो उसके पास यूजर की निजी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी भी पहुंच सकती है।

इसलिए आने वाले समय में AI की असली प्रतिस्पर्धा केवल इस बात पर नहीं होगी कि कौन सा मॉडल ज्यादा बुद्धिमान है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा कि कौन सा AI एजेंट ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और यूजर के नियंत्रण में रहता है।

Meta का Hatch प्रयोग इसी बदलती दिशा का संकेत है—जहां AI से बातचीत करने के बजाय यूजर अपने डिजिटल कामों की जिम्मेदारी AI को सौंप सकता है।

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