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Technology News: 5G से फिर 4G की ओर बढ़ा बजट बाजार, 15 हजार रुपये में फोन खरीदने वालों की पसंद बदली

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बढ़ती स्मार्टफोन कीमतों के बीच भारत में 4G फोन की मांग फिर बढ़ रही है। 10 से 20 हजार रुपये के सेगमेंट में कई कंपनियां नए 4G मॉडल ला रही हैं।

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 5G की लगातार बढ़ती पकड़ के बीच अब 4G फोन एक बार फिर चर्चा में हैं। उम्मीद थी कि 5G तकनीक के विस्तार के साथ बजट सेगमेंट से 4G फोन लगभग गायब हो जाएंगे, लेकिन बढ़ती कीमतों ने बाजार का समीकरण बदल दिया है। अब बड़ी संख्या में खरीदार सिर्फ 5G कनेक्टिविटी के नाम पर ज्यादा पैसे खर्च करने के बजाय डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी और रोजमर्रा के प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

4G फोन की हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान

काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक भारत के स्मार्टफोन बाजार में 4G डिवाइस की हिस्सेदारी 2025 में करीब 11 प्रतिशत थी। 2026 में इसके बढ़कर 13 प्रतिशत और 2027 में 15 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत मिलता है कि 4G की वापसी केवल बेहद सस्ते फोन तक सीमित नहीं रह गई है। मध्यम बजट वाले ग्राहक भी अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनमें कम कीमत में बेहतर हार्डवेयर और उपयोगी फीचर्स मिल सकें।

10 से 20 हजार रुपये के सेगमेंट में बड़ा बदलाव

सबसे दिलचस्प बदलाव 10,000 से 20,000 रुपये की कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार में दिखाई दे रहा है। 2025 में इस रेंज में सीमित कंपनियां ही 4G मॉडल पेश कर रही थीं, जबकि 2026 में करीब 12 कंपनियां इस सेगमेंट में 4G स्मार्टफोन पर दांव लगा रही हैं।

इसका एक बड़ा कारण यह है कि ग्राहक अब फोन खरीदते समय पूरे पैकेज को देख रहे हैं। यदि 4G मॉडल में बेहतर कैमरा, लंबी बैटरी, अच्छा डिस्प्ले और पर्याप्त स्टोरेज मिल रहा है तो कई खरीदार सिर्फ 5G के लिए अतिरिक्त रकम खर्च करने से बच रहे हैं।

स्मार्टफोन महंगे होने से बदला खरीदारी का तरीका

भारत में स्मार्टफोन की कीमतों पर कंपोनेंट की बढ़ती लागत का असर पड़ा है। खासकर मेमोरी से जुड़े कंपोनेंट महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ी है। इसका असर फोन की अंतिम कीमत पर भी पड़ा है।

महंगे होते फोन के बीच बजट खरीदारों के सामने विकल्प सीमित हुए हैं। ऐसे में कंपनियां भी 5G के बजाय बेहतर स्पेसिफिकेशन वाले 4G मॉडल पेश करके ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।

15 हजार रुपये से कम में 5G देना चुनौती

15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन में बिना किसी बड़े समझौते के 5G उपलब्ध कराना कंपनियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। 5G चिपसेट और दूसरे कंपोनेंट की लागत के कारण इस बजट में कंपनियों को फीचर्स के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

यही वजह है कि कुछ ब्रांड इस कीमत वाले ग्राहकों के लिए 4G मॉडल को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। इन फोन में कंपनियां कैमरा, बैटरी, डिस्प्ले और डिजाइन जैसे फीचर्स पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।

कंपनियों ने फिर बढ़ाई 4G मॉडल की रफ्तार

भारतीय बाजार में Lava के साथ Xiaomi, Infinix और Realme जैसे ब्रांड भी 4G मॉडल पेश कर रहे हैं। कंपनियों की रणनीति साफ दिखाई देती है—ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करना जो सीमित बजट में ज्यादा से ज्यादा फीचर्स चाहते हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपोनेंट की कीमतों में तुरंत बड़ी गिरावट नहीं आने की स्थिति में 4G फोन की मांग बनी रह सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि 5G की मांग खत्म हो रही है, बल्कि बजट सेगमेंट में ग्राहक अब कनेक्टिविटी के साथ कीमत और फीचर्स का संतुलन भी देख रहे हैं।

क्या 4G फोन खरीदना अब भी सही विकल्प है?

अगर किसी यूजर की प्राथमिकता सोशल मीडिया, कॉलिंग, वीडियो देखने, ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग और सामान्य रोजमर्रा के काम हैं तो अच्छा 4G फोन अभी भी उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं जिन लोगों को तेज मोबाइल नेटवर्क, भविष्य के लिए बेहतर कनेक्टिविटी या लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने की जरूरत है, उनके लिए 5G फोन ज्यादा उपयुक्त विकल्प हो सकता है।

यानी बाजार में 4G की वापसी को 5G की हार के तौर पर देखना सही नहीं होगा। असल बदलाव यह है कि बढ़ती कीमतों के दौर में ग्राहक अब सिर्फ नेटवर्क टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि पूरे फोन की कीमत और मिलने वाले फीचर्स को देखकर फैसला कर रहे हैं।

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