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International News: ईरान युद्ध पर पेंटागन की पहली रिपोर्ट, अमेरिका ने 33.4 अरब डॉलर खर्च किए

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी पर अमेरिका ने जून 2026 तक 33.4 अरब डॉलर खर्च किए। पेंटागन की रिपोर्ट में हथियारों के इस्तेमाल, सैन्य उपकरणों के नुकसान और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पड़े असर का ब्यौरा सामने आया है।

16 सितंबर 2026 को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से जुड़ी पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की पहली रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। रिपोर्ट में 30 जून 2026 तक अभियान के दौरान हुए सैन्य खर्च, हथियारों के इस्तेमाल, सैन्य उपकरणों को पहुंचे नुकसान और अमेरिकी ठिकानों पर पड़े प्रभाव का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 29 जून तक अमेरिका इस अभियान पर करीब 33.4 अरब डॉलर खर्च कर चुका था।

हथियारों पर 22.3 अरब डॉलर खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक कुल खर्च में लगभग 22.3 अरब डॉलर इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च हुए। इसके अलावा 7.4 अरब डॉलर अतिरिक्त सैन्य अभियान पर और 3.7 अरब डॉलर क्षतिग्रस्त या नष्ट सैन्य उपकरणों को बदलने पर खर्च किए गए। बुनियादी ढांचे की मरम्मत का खर्च इस आंकड़े में शामिल नहीं है।

पेंटागन की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर हथियारों के इस्तेमाल से अमेरिकी रणनीतिक हथियार भंडार पर पड़े दबाव को भी रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति और रक्षा उत्पादन से जुड़ी सप्लाई चेन में भी दबाव सामने आया है।

रक्षा उद्योग के सामने उत्पादन बढ़ाने की चुनौती

अमेरिका ने हथियारों के भंडार को दोबारा मजबूत करने के लिए उत्पादन बढ़ाने और मौजूदा उत्पादन लाइनों की क्षमता बढ़ाने के प्रयास शुरू किए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में सॉलिड रॉकेट मोटर्स जैसे महत्वपूर्ण घटकों की उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाओं का उल्लेख किया गया है।

इसका मतलब यह है कि युद्ध में इस्तेमाल किए गए हथियारों की जगह नए हथियार तैयार करना केवल बजट का मामला नहीं है। इसके लिए उत्पादन क्षमता, कच्चे माल, विशेषज्ञ कर्मचारियों और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

चार F-15E विमान नष्ट

इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य विमानों और दूसरे उपकरणों को हुए नुकसान का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार चार F-15E लड़ाकू विमान नष्ट हुए, जबकि एक F-35A विमान को नुकसान पहुंचा। KC-135 रिफ्यूलिंग विमान, A-10, E-3 AWACS और हेलीकॉप्टरों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।

MQ-9 Reaper ड्रोन को भी अभियान के दौरान नुकसान हुआ। रिपोर्ट में अलग-अलग घटनाओं में इन ड्रोन के नुकसान का उल्लेख किया गया है।

417 अमेरिकी सैनिक घायल

रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी से 30 जून 2026 के बीच सात अमेरिकी सैनिक युद्ध संबंधी घटनाओं में मारे गए। इसी अवधि में सात अन्य अमेरिकी सैनिकों की गैर-युद्ध संबंधी घटनाओं में मौत हुई। कुल 417 अमेरिकी सैनिक घायल हुए।

मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का असर

ईरानी हमलों का असर मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे पर भी पड़ा। रिपोर्ट में क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इमारतों को हुए नुकसान का उल्लेख किया गया है।

बहरीन में अमेरिकी नौसेना की महत्वपूर्ण सुविधाएं भी हमलों की चपेट में आईं। इसके अलावा कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे पर भी नुकसान दर्ज किया गया।

अमेरिकी राजनयिक परिसरों को करीब 184 मिलियन डॉलर का नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी राजनयिक परिसरों को भी नुकसान पहुंचा। अमेरिकी विदेश विभाग ने इन नुकसान का अनुमान करीब 184 मिलियन डॉलर लगाया है।

इराक में करीब 157.35 मिलियन डॉलर, कुवैत में 14.75 मिलियन डॉलर, सऊदी अरब में 11.5 मिलियन डॉलर और संयुक्त अरब अमीरात में करीब 1.25 लाख डॉलर के नुकसान का अनुमान बताया गया है।

करीब 9 हजार अमेरिकी नागरिकों को बाहर निकाला गया

युद्ध के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व और आसपास के देशों से करीब 9,000 अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की। इसके लिए 56 चार्टर्ड उड़ानों के साथ बसों का भी इस्तेमाल किया गया।

इस अभियान पर करीब 11.6 मिलियन डॉलर खर्च होने की जानकारी दी गई है। इजरायल से करीब 6,500, संयुक्त अरब अमीरात से 1,200 और कतर से करीब 850 अमेरिकी नागरिकों को निकाला गया।

अभियान में वायु, समुद्र, जमीन, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का इस्तेमाल

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार ऑपरेशन एपिक फ्यूरी केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं था। अभियान में अमेरिकी वायुसेना, नौसेना, थलसेना के साथ साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का भी इस्तेमाल किया गया।

ईरान की मिसाइल साइटों, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और क्रूज मिसाइल ठिकानों, कमांड सेंटर, नौसैनिक क्षमता तथा रक्षा उद्योग से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य भी इस अभियान का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा। यहां अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों के साथ वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

बड़े पैमाने पर अमेरिकी सैन्य तैनाती

अभियान के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड क्षेत्र में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। अलग-अलग सैन्य ठिकानों पर लड़ाकू विमान, विध्वंसक जहाज, एयर डिफेंस सिस्टम और लॉजिस्टिक संसाधन तैनात किए गए।

THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम, HIMARS और 82वीं एयरबोर्न डिविजन के कुछ हिस्सों की तैनाती भी की गई। दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप समुद्री क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे।

1,500 से अधिक एयर मिशन

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी ट्रांसपोर्टेशन कमांड ने अभियान के दौरान 1,500 से अधिक एयर मिशन संचालित किए। अभियान के कुछ चरणों में प्रतिदिन 30 से 40 उड़ानें सेंट्रल कमांड क्षेत्र में भेजी गईं।

पेंटागन की रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष अमेरिकी हथियार भंडार पर पड़ा दबाव है। बड़े पैमाने पर गोला-बारूद के इस्तेमाल के बाद अब अमेरिका के सामने अपने रणनीतिक भंडार को दोबारा मजबूत करने और रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की चुनौती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी ओर कहा है कि अमेरिका अपने इतिहास के किसी भी समय की तुलना में अधिक अत्याधुनिक हथियार बना रहा है और मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों तक हथियार पहुंचाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट ने युद्ध की वास्तविक लागत का पहला आधिकारिक ब्यौरा दिया

पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की यह रिपोर्ट ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से जुड़े अमेरिकी खर्च और नुकसान का पहला विस्तृत सार्वजनिक आधिकारिक ब्यौरा है। इसमें 30 जून तक की स्थिति के आधार पर सैन्य खर्च, हथियारों की खपत, उपकरणों के नुकसान, सैन्य ठिकानों पर प्रभाव, राजनयिक नुकसान और नागरिकों के निकासी अभियान का विवरण दिया गया है।

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