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Gold Silver Price: सोने-चांदी में जबरदस्त उतार-चढ़ाव, अगले हफ्ते फेड के फैसले पर टिकी बाजार की नजर

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Gold Silver Price Update में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जानिए अगले सप्ताह फेडरल रिजर्व की बैठक, क्रूड ऑयल और वैश्विक तनाव का बाजार पर क्या असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली, 25 जुलाई।कमोडिटी बाजार में 20 से 24 जुलाई के बीच का कारोबारी सप्ताह सोने और चांदी के निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने दोनों कीमती धातुओं की चाल को प्रभावित किया। सप्ताह के दौरान सोना और चांदी दोनों ने मजबूत तेजी दर्ज की, हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली के कारण ऊपरी स्तरों से कुछ नरमी भी देखने को मिली।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कॉमेक्स पर सोने की कीमतों में हल्की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर दिल्ली सर्राफा बाजार में सप्ताह के अंतिम दिन सोने के दाम में गिरावट देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अंतर का प्रमुख कारण स्थानीय मांग, आयात लागत और वैश्विक संकेत रहे।

चांदी की बात करें तो इस सप्ताह इसमें सोने की तुलना में अधिक तेजी दर्ज की गई। औद्योगिक मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आया। सप्ताह के अंत तक चांदी प्रति किलोग्राम नए ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गई।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी, जिससे कच्चा तेल महंगा हुआ। महंगे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई और इसका असर कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दिया।

हालांकि तनावपूर्ण माहौल के बावजूद सोने में पारंपरिक 'सेफ हेवन' खरीदारी उतनी मजबूत नहीं रही, जितनी सामान्य परिस्थितियों में युद्ध या वैश्विक संकट के दौरान देखने को मिलती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद ने कीमतों को गिरने से बचाए रखा और बाजार को मजबूत आधार दिया।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन अमेरिकी बेरोजगारी से जुड़े सकारात्मक आंकड़े सामने आने और डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका असर सोने और चांदी दोनों पर देखने को मिला और तेजी पर कुछ ब्रेक लगा।

विश्लेषकों का कहना है कि अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर टिकी हुई है। यदि फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है या भविष्य में दरें बढ़ाने का संकेत देता है तो सोने और चांदी में दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि ब्याज दरों को लेकर नरम रुख सामने आता है तो दोनों धातुओं में फिर से तेजी लौट सकती है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए 1.41 लाख और 1.38 लाख रुपये के स्तर मजबूत सपोर्ट माने जा रहे हैं, जबकि 1.45 लाख और 1.47 लाख रुपये के स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस हैं। चांदी के लिए 2.16 लाख और 2.10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम मजबूत सपोर्ट हैं, जबकि 2.26 लाख और 2.32 लाख रुपये प्रमुख रेजिस्टेंस माने जा रहे हैं।

कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों और ट्रेडर्स को सावधानी के साथ कारोबार करना चाहिए। उनका मानना है कि बाजार में फिलहाल "सेल ऑन राइज" यानी ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली की रणनीति अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकती है। साथ ही निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी फेड के फैसलों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

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विशेष टिप्पणी

सोना और चांदी केवल आभूषण नहीं बल्कि निवेश का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर युद्ध, महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, निवेशकों को भावनाओं के बजाय सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। विशेषज्ञों की राय, जोखिम प्रबंधन और लंबी अवधि की रणनीति अपनाना मौजूदा बाजार में अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।

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