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ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या है? ये फूड्स बढ़ा सकते हैं शुगर और मोटापा

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ग्लाइसेमिक इंडेक्स बताता है कि भोजन ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है। हाई जीआई फूड्स जैसे सफेद ब्रेड, चावल और मीठे पेय डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं।

आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में खानपान का असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल कैलोरी ही नहीं, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि कोई भोजन शरीर में जाकर ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है। इसी को समझाने के लिए “ग्लाइसेमिक इंडेक्स” (GI) का उपयोग किया जाता है। यह एक ऐसा पैमाना है जो बताता है कि कोई भी खाद्य पदार्थ खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज कितनी तेजी से रिलीज करता है।

जिन खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, वे जल्दी पचते हैं और खून में शुगर को तेजी से बढ़ा देते हैं। बार-बार ऐसा होने पर शरीर में इंसुलिन पर दबाव बढ़ता है, जिससे आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्यों है जरूरी समझना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि जो चीज दिखने में हल्की या सामान्य है, वह शरीर के लिए सुरक्षित है। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता। कुछ फूड्स बाहर से हेल्दी दिखते हैं, लेकिन उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी ज्यादा होता है। यही कारण है कि न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स अब केवल पोषण नहीं बल्कि GI वैल्यू पर भी ध्यान देने की सलाह देते हैं।

GI को सामान्य तौर पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है—

कम GI (Low GI), मध्यम GI (Medium GI) और ज्यादा GI (High GI)। हाई GI वाले फूड्स सबसे ज्यादा नुकसानदायक माने जाते हैं क्योंकि ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।

सफेद ब्रेड और मैदे वाले फूड्स सबसे बड़ा खतरा

रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें जैसे सफेद ब्रेड, पिज्जा, बर्गर और मैदे से बनी चीजें हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली होती हैं।

सफेद ब्रेड का GI लगभग 70 से 90 तक हो सकता है, जो काफी ज्यादा माना जाता है। इनमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे यह शरीर में तेजी से टूटकर शुगर को बढ़ा देते हैं।

ब्राउन ब्रेड को लोग अक्सर हेल्दी मानते हैं, लेकिन कई ब्रांड्स में इसमें भी रिफाइंड मैदा और अतिरिक्त शुगर मिलाई जाती है, जिससे इसका असर भी ब्लड शुगर पर पड़ सकता है।

सफेद चावल का अधिक सेवन भी बढ़ा सकता है जोखिम

भारतीय डाइट में चावल का बहुत अहम स्थान है, लेकिन सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी मध्यम से उच्च (लगभग 55 से 70) तक होता है।

सफेद चावल खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज तेजी से रिलीज होता है, जिससे शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है। कई रिसर्च में यह पाया गया है कि अधिक मात्रा में सफेद चावल का सेवन करने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि चावल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और संतुलन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

फ्रूट जूस और मीठे पेय भी नुकसानदायक

फलों को हेल्दी माना जाता है, लेकिन जब इन्हें जूस के रूप में लिया जाता है तो उनका असर बदल जाता है। पैकेज्ड फ्रूट जूस में अतिरिक्त शुगर मिलाई जाती है, जिससे इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 66 से 76 तक हो सकता है।

इसके अलावा सॉफ्ट ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और फ्लेवर्ड कॉफी भी ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार ऐसे मीठे पेय पदार्थ वजन बढ़ाने और इंसुलिन रेजिस्टेंस का प्रमुख कारण बनते हैं।

हाई GI फूड्स के नुकसान

जब शरीर बार-बार हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स लेता है, तो इंसुलिन का स्तर लगातार बढ़ता रहता है। इससे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।

इसके परिणामस्वरूप डायबिटीज, पेट की चर्बी, हार्ट डिजीज और थकान जैसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं।

हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डाइट में फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को शामिल किया जाए। साबुत अनाज, हरी सब्जियां, दालें, नट्स और लो GI फूड्स का सेवन शरीर के लिए बेहतर माना जाता है।

इसके अलावा खाने के साथ फिजिकल एक्टिविटी और नियमित वॉक भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

निष्कर्ष

ग्लाइसेमिक इंडेक्स को समझना आज के समय में बेहद जरूरी हो गया है। क्योंकि यह सिर्फ डायबिटीज के मरीजों के लिए नहीं बल्कि हर व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अगर रोजमर्रा की डाइट में हाई GI फूड्स को नियंत्रित किया जाए और संतुलित भोजन अपनाया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

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