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Health News: शरीर या सिर में चिपक गई चिचड़ी तो घबराएं नहीं, जानिए टिक हटाने का सुरक्षित तरीका

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | शरीर या सिर में चिपकी चिचड़ी को सुरक्षित तरीके से निकालने और संक्रमण से बचने के जरूरी उपाय जानिए।

बारिश और नमी के मौसम में घास, झाड़ियों और पालतू जानवरों के आसपास रहने वाले लोगों को चिचड़ी यानी टिक से परेशानी हो सकती है। यह छोटा परजीवी त्वचा से चिपककर खून चूसता है और लंबे समय तक शरीर पर लगा रहने पर कुछ संक्रमणों का जोखिम बढ़ा सकता है। सिर, गर्दन, कान के आसपास, बगल और शरीर के दूसरे हिस्सों में टिक चिपका हुआ मिल सकता है।

ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी बात यह है कि टिक को जल्दबाजी में खींचकर, जलाकर या किसी तेज रसायन से हटाने की कोशिश न करें। सही तरीके से हटाने पर त्वचा को होने वाली चोट और संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।

चिचड़ी चिपक जाए तो सबसे पहले क्या करें?

अगर शरीर पर टिक दिखाई दे तो सबसे पहले हाथ साफ करें और अच्छी रोशनी में उस जगह को देखें। इसके बाद बारीक नोक वाली साफ चिमटी यानी ट्वीजर्स लें।

चिमटी से टिक को उसके शरीर के पास, त्वचा के बिल्कुल करीब पकड़ने की कोशिश करें। अब उसे धीरे-धीरे और लगातार सीधी दिशा में ऊपर की ओर खींचें। उसे घुमाने, मरोड़ने या अचानक झटका देने से बचें।

टिक निकल जाने के बाद काटे वाली जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। चिमटी को भी साफ करें और हाथ दोबारा धो लें।

किन घरेलू तरीकों से बचना चाहिए?

टिक को हटाने के लिए त्वचा पर तेल, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल, माचिस की आग, गर्म चीज या अन्य रसायन लगाने से बचना चाहिए। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है और टिक के शरीर से परेशान करने वाले पदार्थों के संपर्क का जोखिम बढ़ सकता है।

इसी तरह टिक को नाखून से दबाकर या जबरदस्ती नोचकर निकालना भी सही तरीका नहीं है।

अगर टिक का कोई हिस्सा त्वचा में रह गया हो या वह बहुत गहराई से चिपका हो और आसानी से नहीं निकल रहा हो, तो उसे खुद से कुरेदने के बजाय डॉक्टर से दिखाना बेहतर है।

टिक निकलने के बाद क्या करें?

टिक निकलने के बाद उस स्थान को साबुन और पानी से साफ रखें। अगले कुछ दिनों तक वहां लालिमा, सूजन, बढ़ता हुआ दर्द, गर्माहट या घाव जैसी स्थिति पर नजर रखें।

इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द और शरीर पर असामान्य दाने जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। टिक से जुड़े संक्रमणों के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और हर टिक के काटने से बीमारी हो, यह जरूरी नहीं है।

क्या टिक का सिर त्वचा में रह जाता है?

टिक निकालते समय उसका मुंह वाला हिस्सा अलग होकर त्वचा में रह सकता है। ऐसी स्थिति में उसे सुई या नुकीली वस्तु से खुद निकालने की कोशिश करने के बजाय चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लेना सुरक्षित विकल्प है।

अगर टिक पूरी तरह निकल गया है और कोई हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा है, तो काटे वाली जगह को साफ रखकर उसकी स्थिति पर नजर रखें।

भैंस या दूसरे पशुओं में चिचड़ी हो तो क्या करें?

भैंस, गाय, कुत्ते या दूसरे पशुओं में चिचड़ी लगने पर इंसानों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा सीधे पशु पर नहीं लगानी चाहिए। पशुओं के लिए टिक नियंत्रण की अलग-अलग दवाएं और डोज होती हैं, जो पशु की प्रजाति, वजन, उम्र और स्थिति के अनुसार तय की जाती हैं।

इसलिए भैंस में चिचड़ी ज्यादा होने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेकर पशुओं के लिए स्वीकृत टिक नियंत्रण दवा का इस्तेमाल करना उचित है। दवा की मात्रा या उपयोग का तरीका बिना विशेषज्ञ की सलाह के तय करना सुरक्षित नहीं है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

टिक निकालना मुश्किल हो रहा हो, त्वचा में उसका हिस्सा रह गया हो, काटे वाली जगह पर लगातार लालिमा या सूजन बढ़ रही हो या बुखार जैसे लक्षण विकसित हों तो डॉक्टर से संपर्क करें।

खास तौर पर टिक काटने के बाद शरीर पर फैलता हुआ रैश, तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी या जोड़ों में दर्द जैसी समस्या सामने आए तो इसे सामान्य एलर्जी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बचाव के लिए क्या करें?

घास या झाड़ियों वाले इलाकों में जाते समय शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर लौटने के बाद कपड़ों और शरीर की जांच करें, खासकर बालों, कानों के पीछे, गर्दन, बगल और पैरों के आसपास।

पालतू और घरेलू पशुओं की भी नियमित जांच करें। पशुओं में चिचड़ी की समस्या बार-बार दिखाई दे तो पशु चिकित्सक से उचित नियंत्रण योजना के बारे में सलाह लें।

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