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Parliament News: अमित शाह पर राहुल गांधी के बयान से लोकसभा में हंगामा, रिजिजू बोले- माफी मांगें

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लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के बयान पर हंगामा हुआ। किरेन रिजिजू ने माफी की मांग की, जबकि विपक्ष ने अपने रुख का बचाव किया।

लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग को लेकर गृहमंत्री की भूमिका रही। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे फैसलों की अनुमति केवल प्रधानमंत्री या गृहमंत्री स्तर से ही दी जा सकती है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तत्काल आपत्ति जताई।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यदि उनके पास किसी भी दावे का प्रमाण है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि बिना साक्ष्य किसी मंत्री पर इस तरह का आरोप लगाना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है और राहुल गांधी को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

इस दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष ने कोई गंभीर मुद्दा उठाया है तो सरकार को तथ्यों के साथ उसका जवाब देना चाहिए। इस पर किरेन रिजिजू ने कहा कि जांच की मांग अलग विषय है, लेकिन किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाने के लिए ठोस आधार होना आवश्यक है।

सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी सदस्यों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि चर्चा विधेयक के विषय पर केंद्रित रखें और ऐसे आरोपों से बचें जिनके समर्थन में तत्काल तथ्य प्रस्तुत न किए जा सकें।

हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और मामले को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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नजरिया

संसद लोकतांत्रिक बहस का सर्वोच्च मंच है। गंभीर आरोप और जवाब दोनों तथ्यों एवं संसदीय मर्यादा के अनुरूप होने चाहिए। इससे सदन की गरिमा भी बनी रहती है और जनता तक स्पष्ट एवं विश्वसनीय जानकारी पहुंचती है।

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