लगातार सफलता, त्वरित कार्रवाई और रिकॉर्ड स्तर पर कांडों का खुलासा—जिले में अपराध का ग्राफ तेजी से नीचे।
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समस्तीपुर। जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पिछले लंबे समय से उठ रहे सवालों ने उस समय करवट बदली जब पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने कमान संभाली। उनके कार्यभार ग्रहण करते ही जिले में अपराधियों के खिलाफ ऐसा मोर्चा खोला गया, जिसने समस्तीपुर की कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की। आज स्थिति यह है कि जिले में छोटे से लेकर बड़े कांड तक, हर मामले में पुलिस की तेज़ी, प्रोफेशनल रवैया और समयबद्ध कार्रवाई का असर साफ दिखाई देता है। लगातार हो रहे खुलासे, संगठित अपराधियों की गिरफ्तारी, हथियार बरामदगी और शराब–माफिया तक पर चोट से जिले का माहौल बदला हुआ महसूस होता है।
पुलिस की इन उपलब्धियों की सूची इतनी लंबी है कि यह स्पष्ट हो गया है।समस्तीपुर अब ‘अपराध मुक्त जिला’ की ओर व्यवस्थित तरीके से बढ़ रहा है। इसके केंद्र में हैं एसपी अरविंद प्रताप सिंह, जिनकी नेतृत्व शैली न केवल पुलिस बल का मनोबल बढ़ा रही है बल्कि पूरे जिले में यह संदेश दे रही है कि अपराध का अंत तय है और कानून की पकड़ बेहद तेज।
गृहभेदन, चोरी और लूट की घटनाओं पर रिकॉर्ड गति से कार्रवाई
मो० नगर और मोहनपुर थाना क्षेत्र में हुई गृहभेदन की एक के बाद एक घटनाओं ने लोगों को परेशान कर रखा था, लेकिन पुलिस ने त्वरित छापेमारी कर तीन अपराधियों को चोरी के सामान सहित गिरफ्तार कर लिया। इन मामलों का खुलासा वह भी तब हुआ जब कई जिलों में ऐसी घटनाएँ महीनों तक लंबित रहती हैं। यहां पुलिस की सक्रियता ने यह साबित किया कि समस्तीपुर में अपराध अब टिक नहीं पाएगा।
शिवाजीनगर में हुई चोरी की घटना का खुलासा पुलिस ने मात्र 6 घंटे के भीतर कर दिया। चार अपराधियों की गिरफ्तारी और उनसे बरामद सामानों ने पुलिस की फील्ड इंटेलिजेंस और तकनीकी जांच की दक्षता को फिर एक बार सामने रखा। पुलिस के इस ‘अति-तेज’ रिएक्शन मॉडल ने थानों के कामकाज में भी नई ऊर्जा दी है।
रोसड़ा थाना क्षेत्र में हुई चोरी की बड़ी घटना का खुलासा भी लगातार छापेमारी और सटीक रणनीति के कारण संभव हो सका। यह कार्रवाई दिखाती है कि अब किसी भी अपराध को हल्के में नहीं लिया जा रहा है और प्रत्येक थाने को सीधे नेतृत्व से मॉनिटर किया जा रहा है।
जमीनी विवाद में गोलीबारी—सिलौत गोलीकांड का कम समय में पर्दाफाश
मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सिलौत गांव में जमीनी विवाद के दौरान तीन लोगों को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल किया गया था। जिला स्तरीय तनाव की संभावना थी, लेकिन पुलिस ने इस कांड का खुलासा अत्यंत कम समय में कर लिया। इसमें शामिल आरोपियों की पहचान, उनके भागने के रास्ते, और घटना के पीछे की वजहों को पुलिस ने न केवल सटीक तरीके से सामने रखा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों इसके लिए क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई।
हथियारबंद गिरोहों पर लगातार प्रहार, सात अपराधी गिरफ्तार
रोसड़ा थाने की टीम ने एसपी के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में सात अपराधियों को देसी कट्टा, जिंदा कारतूस और अन्य हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि जिले में अवैध हथियार कारोबार और उससे जुड़े गिरोहों पर पुलिस की निगरानी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। कई अपराधी इलाके छोड़कर भागने लगे हैं, जो पुलिस की दबदबे का प्रमाण है।
कुख्यात अपराधियों पर लगाम—बैंक ऑफ महाराष्ट्र डकैती का बड़ा खुलासा
समस्तीपुर के काशीपुर स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई करोड़ों की डकैती का खुलासा हाल के वर्षों में जिले की सबसे चर्चित पुलिस सफलता रही। इस कांड ने जिले की छवि को गहरा आघात पहुँचाया था, लेकिन पुलिस अधीक्षक और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए न केवल कुख्यात मास्टरमाइंड धर्मनाथ सिंह उर्फ धर्मा को गिरफ्तार किया बल्कि डकैती की पूरी साजिश से पर्दा उठा दिया।यह ऑपरेशन दर्शाता है कि समस्तीपुर पुलिस का अनुसंधान अब अत्याधुनिक तकनीक, इनपुट, और समन्वय पर आधारित है।
शिवाजीनगर छात्रा हत्या और हसनपुर लैब टेक्नीशियन हत्या—दोनों संवेदनशील मामलों में त्वरित सफलता
छात्रा की हत्या का मामला बेहद संवेदनशील और भावनात्मक था। पुलिस पर दबाव था, लेकिन टीम ने गहन अनुसंधान कर पूरा मामला सुलझा लिया। हसनपुर में लैब टेक्नीशियन की रहस्यमयी हत्या के मामले में भी पुलिस ने मजबूत साक्ष्य जुटाकर अपराधियों तक पहुँच बनाई और घटना के सभी पहलुओं को उजागर किया। इन दोनों मामलों ने यह स्थापित कर दिया कि पुलिस की अनुसंधान प्रक्रिया अब अधिक वैज्ञानिक और तथ्य-केंद्रित हो चुकी है।
विद्यापतिनगर का बड़ा लूटकांड भी सुलझा
09 नवंबर की रात विद्यापतिनगर में हुई बड़ी लूट की घटना में पुलिस को कई चुनौतियाँ थीं—अपराधियों की संख्या, भागने के रास्ते, और लगातार बदलते साक्ष्य। इसके बावजूद पुलिस ने इस कांड का सफलतापूर्वक उद्भेदन किया। यह कार्य जिला पुलिस की निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और फील्ड यूनिट्स के तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है।
ताजपुर में खेत से बरामद हुई 3627 लीटर विदेशी शराब—सटीक खुफिया इनपुट का नतीजा
राज्य में शराबबंदी के बावजूद शराब माफिया कई नए तरीकों से कारोबार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ताजपुर में खेत से मिली 3627 लीटर विदेशी शराब की भारी बरामदगी ने यह साबित किया कि पुलिस की निगाहें लगातार हर गतिविधि पर हैं। इस अभियान ने शराब तस्करों की कमर तोड़ने का काम किया।
बहुचर्चित कल्याणपुर डबल मर्डर: पेशेवर अंदाज़ में पूरी साजिश का खुलासा
इस केस की गूंज जिला ही नहीं, पूरे बिहार में थी। बिहार STF के साथ समन्वय कर पुलिस ने चार अपराधियों—सुधीर मधान, अमन मधान, आशुतोष कुमार और फूलबाबू राम—को गिरफ्तार किया।
तीन देशी कट्टा, नौ गोली, दो बाइक और छह मोबाइल बरामद हुए।
पूछताछ में सामने आया कि घटना एक जमीन से जुड़े आर्थिक विवाद का परिणाम थी।सुपारी, हथियार उपलब्धता, UPI लेन-देन, अपराधियों के बीच फोन पर हुई बातचीत—सब कुछ पुलिस ने साक्ष्य सहित सामने ला दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस साजिश में कुछ सफेदपोश लोगों की भूमिका की ओर भी इशारा मिला है, जिसकी जांच अलग से की जा रही है।
एसपी अरविंद प्रताप सिंह की कार्यशैली—सख्ती, सिस्टमेटिक वर्क और साफ़ संदेश
इन सभी उपलब्धियों का सार एक ही है—नेतृत्व।एसपी अरविंद प्रताप सिंह की कार्यशैली में तीन बातें सबसे प्रमुख रूप से दिखती हैं:
1. तत्काल प्रतिक्रिया, चाहे अपराध बड़ा हो या छोटा
2. तथ्य आधारित अनुसंधान, पुराने ढर्रे से हटकर आधुनिक ढंग से
3. जवाबदेही, प्रत्येक थाना और अधिकारी के लिए तय मानक
उनकी यही स्टाइल समस्तीपुर में अपराधियों के लिए भय और आम लोगों के लिए विश्वास का वातावरण तैयार कर रही है।
जिले में पहली बार एक साथ इतने कांडों के त्वरित खुलासे हुए हैं, वह भी बिना किसी देरी और बिना कोई दिखावा किए।
समस्तीपुर में पुलिस की एक नई पहचान।
लगातार चल रही ये सफलताएँ यह साबित कर रही हैं कि समस्तीपुर जिले में कानून-व्यवस्था सिर्फ संभाली नहीं जा रही, बल्कि मजबूत की जा रही है।एसपी अरविंद प्रताप सिंह के नेतृत्व में जिले की पहचान बदल रही है और पुलिस की छवि पर ईमानदार मेहनत का असर साफ दिखाई दे रहा है।
अपराध पर पुलिस की पकड़ अब पहले से कई गुना मजबूत है—और यही समय समस्तीपुर में कानून के नए अध्याय की शुरुआत का है।